राजीव वर्मा और शशि शेखर को टका-सा मुंह लेकर लौटना पड़ा खंडूरी के यहां से!

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आजकल जिन मीडिया घरानों के पास कथित रूप से पत्रकारिता का ठेका है, वे पत्रकारों को पत्रकार नहीं बल्कि दलाल बनाने में लगे हुए हैं. वे अपने संपादकों को संपादक कम, लायजनिंग अधिकारी ज्यादा बनाकर रखते हैं. ताजा मामला हिंदुस्तान टाइम्स जैसे बड़े मीडिया हाउस का है. बिड़ला जी के इस मीडिया घराने की मालकिन शोभना भरतिया हैं. उनके हिंदी अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर हैं.

पिछले दिनों शशि के कंधे पर शोभना भरतिया ने एक बड़ा टास्क रख दिया. जब मालकिन ने कोई काम कह दिया तो भला संपादक कैसे ना-नुकूर करे. शोभना का आदेश मिलते ही हवा की वेग से शशि शेखर देहरादून पहुंच गए. अब जान लें कि मालकिन ने काम क्या सौंपा. दरअसल निशंक जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तो उन्होंने मौखिक रूप से यह ऐलान कर दिया था कि राज्य में एचटी ग्रुप को डीम्ड यूनिवर्सिटी खोलने का मौका प्रदान किया जाएगा. संभवतः निशंक की कैबिनेट ने इसे पारित भी कर दिया था और अब इसे विधानसभा में पास होना था. निशंक से हिंदुस्तान, देहरादून के स्थानीय संपादक दिनेश पाठक का गहरा याराना था. दिनेश पाठक को उन दिनों सीएम निशंक के दाएं-बाएं मंडराते हुए अक्सर देखा जा सकता था. निशंक से प्रेम का फायदा दिनेश पाठक ने हिंदुस्तान अखबार को नाना रूपों में दिलवाया जिसमें एक रूप विवि खोलने की अनुमति देना भी था. और, निशंकप्रेम से अत्यधिक प्रेम के चक्कर में दिनेश पाठक ने खंडूरी से भी पंगा ले लिया था, उन दिनों खंडूरी के खिलाफ खूब खबरें छापीं.

खंडूरी ने सीएम की कुर्सी संभालते ही निशंक के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की पहल करते हुए उनके फैसलों की समीक्षा का ऐलान कर दिया. एचटी वालों को डीम्ड यूनिवर्सिटी खोलने की अनुमति देने के कैबिनेट के प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में कमेटी बना दी. बात दिल्ली तक, शोभना भरतिया तक पहुंच गई कि उत्तराखंड में एचटी के प्रस्तावित विश्वविद्यालय पर खंडूरी सरकार पानी फेर सकती है. इसके बाद शोभना भरतिया ने अपने सीईओ राजीव वर्मा और संपादक शशि शेखर को ''आपरेशन खंडूरी'' में लगा दिया. कई दिनों तक राजीव वर्मा और शशि शेखर देहरादून में पड़े रहे. इनकी दो बार मीटिंग भी खंडूरी के साथ हुई पर खंडूरी टस से मस नहीं हुए. उन्होंने कहा कि वे वही करेंगे जो राज्य के हित में होगा और नीतियों के अनुरूप होगा. उन्होंने अलग से कोई छूट या अनुशंसा करने से मना कर दिया. इसके बाद राजीव वर्मा और शशि शेखर टका सा मुंह लेकर लौट गए.

सूत्रों का कहना है कि जिस कमेटी को विवि के प्रस्ताव पर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया, उसने इतनी कमियां प्रस्ताव में पाई हैं कि इसका नीति के तहत पास होना संभव ही नहीं है. पर शशि शेखर जुटे रहे कि वह किसी तरह से खंडूरी को मना कर काम करा लेंगे पर ऐसा हो न सका. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दिनेश पाठक बिलकुल हाशिए पर चले गए. सूत्रों का कहना है कि शशि शेखर की मीटिंग तक दिनेश पाठक नहीं रखवा पाए क्योंकि उनका खंडूरी व उनके लोगों से छत्तीस का आंकड़ा रहा है. इस कारण निशंक के कार्यकाल के दौरान हिंदुस्तान, देहरादून में हाशिए पर रखे गए अविकल थपलियाल को सामने लाया गया. अविकल ने अपने स्तर पर पहल कर खंडूरी से शशि शेखर की मीटिंग फिक्स कराई. इससे दिनेश पाठक की लायजनिंग के मामले में नंबर कम हो गए. वैसे दिनेश पाठक सीएम बदलने के बाद से खंडूरी की जय जय करने में भी खूब लगे हैं और सरकार परस्त खबरों को छाप छाप कर ज्यादा से ज्यादा तेल-मक्खन लगाकर खूब नंबर बटोरने की फिराक में लगे हैं पर उनकी दाल गल नहीं पा रही.

अविकल के आगे आने और ''आपरेशन खंडूरी'' के कई स्टेप्स संभालने से दिनेश पाठक की कुर्सी पर खतरा मंडरा गया है. एचटी प्रबंधन को समझ में आ गया है कि जब तक दिनेश पाठक देहरादून में हिंदुस्तान की कुर्सी पर आसीन रहेंगे, खंडूरी का गुस्सा शांत नहीं होने वाला. इस तरह नए संपादक की तलाश शुरू हो गई है पर कोई 'सूटेबल ब्वाय' अभी नहीं मिला है. शशि शेखर और राजीव वर्मा की खंडूरी से मीटिंग और टका सा मुंह लेकर वापस लौटने की घटना की देहरादून के वरिष्ठ पत्रकारों के बीच खूब चर्चा है. जितने मुंह उतनी बातें सुनाई पड़ रही हैं. बीसी खंडूरी के कुछ करीबी लोगों से जब भड़ास4मीडिया ने बात की तो उन्होंने शशि शेखर और राजीव वर्मा के देहरादून आने व खंडूरी से मिलने की पुष्टि की और साथ ही यह भी जानकारी दी कि ये लोग विश्वविद्यालय के मसले पर ही मिलने आए थे.

उधर, एक चर्चा और भी है. लोग कह रहे हैं कि उमाकांत लखेड़ा ने शशि शेखर से अच्छा बदला लिया. उमाकांत लखेड़ा दिल्ली में हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ थे और शशि शेखर के कारण उन्हें हिंदुस्तान छोड़ना पड़ा था. अब लखेड़ा सीएम खंडूरी के मीडिया एडवाइजर हैं. उन्होंने अपने लेवल पर भी भरसक यह कोशिश की होगी कि शशि शेखर के काम किसी भी हालत में सीएम के लेवल से पास न हो जाएं ताकि शशि शेखर को एहसास हो सके कि मीडिया की दुनिया वाकई छोटी है और कोई छोटे पद वाला जर्नलिस्ट भी उनके सामने शेर जैसी ताकत वाला बन सकता है. शह-मात के इस खेल में फिलहाल बुरी स्थिति शशि शेखर की है. कई लोग यह भी कह रहे हैं कि खंडूरी को न पटा पाना शशि शेखर के करियर के लिए भारी पड़ सकता है. शोभना भरतिया कई मसलों के कारण शशि शेखर से नाराज चल रही हैं और अब वे नए दौर के लिहाज से नए संपादक की तलाश में हैं जिसके तहत उनकी कई लोगों से मुलाकात व बातचीत भी शुरू हो गई है. तो लोग यह मानने लगे हैं कि छह महीने या साल भर में शशि शेखर के राज का खात्मा संभव है. फिलहाल शशि शेखर के लिए देहरादून की हार एक बड़ी हार है जिसका घाव भरते भरते वक्त लगेगा.

पर ऐसे वक्त में शशि शेखर को कौन समझाए कि उन्होंने जिस तरह की अवसरवादी पत्रकारिता अबतक के अपने करियर में की है, उसका अंजाम कुछ इसी तरह का होना था. प्रधान संपादक की कुर्सी पर बैठ जाने और पीएम के साथ कई देश घूम आने से लोग महान बन जाते या बड़े पत्रकार कहलाते तो इस देश में ऐसे कृत्य करने वाले हजारों पत्रकार हो चुके हैं पर उनका कोई नामलेवा नहीं है. हां, ये जरूर है कि उन्होंने इतना पैसा कमा लिया और दिल्ली में घर-दुकान बना लिया कि उनकी कई पीढ़ियां आराम से उनके जाने के बाद भी जी-खा सकती हैं. पर यह काम तो लाला लोग भी करते हैं, किराना वाला भी करता है, फिर उनमें और पत्रकार में फर्क क्या. दरअसल दिक्कत ये है कि आजकल के बाजारू दौर में पत्रकारिता के असली मतलब को पत्रकार लोग भूल गए हैं. कोई संपादक भी नहीं जानना चाहता कि संपादक होने के असली मतलब क्या होता है. वह तो मालिक और मालकिनों का मुंह देखता रहता है कि वे क्या कहें और हम तुरंत उसके अनुपालन में लग जाएं. एक जमाने में जो काम टाइपिस्टों, पीए, चाकरों आदि का होता था, वह अब प्रधान संपादकों का हो गया है.

इसी कारण आजकल के संपादक दोहरे व्यक्तित्व को लेकर जी रहे हैं. आफिस में दलाली और समझौते की बातें करते हैं और मंचों पर, पन्नों पर नैतिकता व सरोकार की. इसी के चलते संपादकों के खाने और दिखाने के दांत अलग-अलग होते हैं. इस बात को जानते तो सब हैं और इसके प्रामाणिक उदाहरण भी आए दिन मिल जाते हैं. इस खाने-दिखाने वाले दांतों के अलग-अलग होने को नए जमाने के संपादक लोग गर्व से मल्टीटास्किंग वाला प्रोफेशनल एट्टीट्यूड कहकर स्वीकारते-बताते हैं और यह सब कहते हुए उन्हें लाज-शरम भी नहीं आती.

पर इन्हें कौन फिर से पढ़ाए कि संपादक और पत्रकार होने का मतलब आधा बागी होना होता है, होलटाइमर सरीखे जीवन को जीना होता है, मिशनरी एप्रोज से जनहित में लिखना-लड़ना होता है. जो सत्ता और सिस्टम के द्वारा हाशिए पर फेंके गए लोग हैं, जिनका कोई सुनने वाला नहीं है, जिनकी आवाज को दमदारी से उठाने वाला कोई नहीं, वैसे वंचितों-दलितों-दरिद्रों का नेता बनने, अगुवा होने, आवाज उठाने, लड़ने का काम होता है पत्रकारों का. शासन और सत्ता के करप्शन, कारोबार, जनहित विरोधी कार्यों का खुलासा करते हुए दो-दो हाथ करना होता है पत्रकारों का काम.

इस प्रक्रिया में जितने संकट आए, मुश्किल आए, उससे निपटना होता है पत्रकार का काम क्योंकि ईमानदारी व सरोकार को जीने वाले संघर्षों और मुश्किलों के संग-संग ही जीवन को जी पाते हैं और इसी में संतुष्टि पाते हैं. तो यह काम वही कर सकता है जो आत्मा और दिल से बागी हो. जिनके अंदर बिकने और झुकने की लेशमात्र भी लालसा, इच्छा न हो. जिन्हें भौतिक सुख-सुविधाएं न लुभाती हों. जो पत्रकारिता को धंधा और बिजनेस न मानते हों. तो ऐसे होते हैं असली पत्रकार लेकिन दुर्भाग्य यह कि जो पत्रकार कहे जाते हैं आजकल, वही सबसे बड़े सुविधाभोगी बनने की ओर उन्मुख हैं. जो संपादक कहे जाते हैं आजकल वही सबसे बड़े पीआर एजेंट बनने की ओर उन्मुख हैं. इसी कारण हमारे दौर में राडियाओं का काम आसान हो जाता है कि क्योंकि उसके एक फोन पर बड़े बड़े संपादक लायजनिंग और पीआर के अनमोल बोल बोलने बकने लगते हैं.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत की रिपोर्ट. तथ्यों से असहमति और प्रतिवाद की इच्छा की स्थिति में नीचे दिए गए कमेंट बाक्स या This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it का इस्तेमाल कर सकते हैं.


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Comments (37)Add Comment
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written by Ved, May 08, 2012
I think, Time is back again for Shashi Ji, because Khandoori is no more in power.
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written by Ajit. Kumar.Pandey., November 18, 2011
सबसे पहले यशवंत जी आप हमारा प्रणाम स्वीकार करें ........
आपने वाकई जो लिखा है सच है वह अकाट्य है ......यही की मीडिया इन्दुस्ट्री के मालिक जैसा चाहेंगे वैसा ही आपको करना होगा चाहे आप चीफ एडिटर हो या चीफ मेनेजर अपनी नौकरी सभी बचाते है आज के दौर में जब महंगाई चरम पर है तो अपने आपको नौकरी सहित बचा कर रखना बहुत मुश्किल है ऐसे में शशिशेखर जी ने अगर अपने आपको बदल लिया और ढाल लिया है तो बुरा काया किया है कम से कम वह प्रभु चावला और बरखा दत्त तो नहीं बने है यह समझाने की बात है जो समाया के हिसाब से नहीं चल सका उसे वह अपने टीम में नहीं रखते है इसमें क्या बुराई है रही बात दलाली की मीडिया की भरी मंडी में एक भी पत्रकार ऐसा कोई बता दे जो यह काम नहीं करता हो , हाँ जिसे यह मौका नहीं मिला है वही इमानदारी का राग अलाप रहा है. इस बात को क्यों नहीं समझते की शशिशेखर जी ने अगर दस को निकला है तो पांच हज़ार को रोज़ी दिया जिनका परिवार जी रहा है. काम चोरो को यह नहीं रख सकते इन्हे जवाब देना होता है .......यह मत समझाना की मैं शशिशेखर जी की बड़ाई कर रहा हु यह कटु सत्य है . हालाँकि मैं इनके पास काम नहीं करता न तो कभी काम मांगने गया लेकिन इनकी सचाइयों से जरूर वाकिफ हूँ इन पर आरोप लगाने वालों जरा अपने गिरेबान में एअक बार झांक कर देखो आप किस लायक हो और आप किस हद तक जा सकते हो .........आरोप तो लोग यशवंत जी पर भी लगाते है लेकिन यह उफ़ तक नहीं करते ....................

आपके कमेन्ट के इन्तजार में .....................................
अजित कुमार पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार


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written by omprakash, October 19, 2011
यशवंत भाई श्रेष्ठ लेखन पर बधाई, पर शशि शेखर को नौकरी जाने की कोई चिंता नहीं होगी क्योंकि उनकी नोएडा, मेरठ, आगरा, कानपुर तक में इतनी संपत्ति है कि कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ेगा तो पुष्पेंद्र शर्मा जैसे इनके दलालों का जो शेखर की चापलूसी करके संपादक पद तक पहुंचे, शेखर के बाद ऐसे दलालों का क्या होगा यह सवाल उठता है
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written by Rajendra sharma, October 18, 2011
Shashi Shekhar ghor tanaashah to hai hi saath hi malikon ke taluae chatnewala bhi hai. Amar ujlala mein agrawal ke putr Manu Agarwal ko Maheshwari bandhuon ke khilaf khadha karne ki jang harne ke baad Shashi Shekhar buri tarah se benakab ho chuka hai. Rahi baat PM ke saath ghumne ki to woh pahle bhi khud kahte firte rahe hain ki aeroplain mein agli seat par baithne jaa rahe the Hindu ke N Ram ko voh dhakka dekar peeche kar chuke hain taki agli seat par khud baith saken. unka tuchchapan isse bhi jhalakta hai ki voh dava karte firte hain ki voh desh ke aise pahle patrakaar hain jinke paas banaras mein scoooter tha aur vho scooter par baith kar patrkarita karte the. voh Nelson mandela se mile. voh yah bhi baithak mein batane se nahin sharmate ki unhonne jo jeens pahan rakhi hai voh videshi hai. voh bechare yuva patrkaron se uski keemat poochhne se bhi nahin hichakte. Main swargiya Atul Maheshwari ko naman karta hun jinhone Shashi Shkekhar ki chaalon ko Shatranj ki chalon se katkar maat di. Aaj kahan gaye Shashi Shekhar ke Manu Agarwal? Jang mein har gaye Shashi Shekar itihaash ke studendt, khair ab to voh khud itihaas ban rahe hainn
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written by Rahul, October 17, 2011
Sashi Shekar se mera vasta to kabhi nahi pada par uska Chaplus Sthaniy Sampadak se Pada..........
Bahut Chutiya hai Sthaniy Sampadak or Sabse bada Fattu aadmi hai....
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written by ajay pandey but dont give my name, October 16, 2011
yaswant ji namaskar. sashi sekhar ko media me haramiyo ko badava dene ke liye yaad kiya jayega. Iska ek harami chela noida me ne bankar gaya hai
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written by ajay pandey, October 16, 2011
vaise sashi sekhar ne mera kuchh nahi bigada hai lekin isne media me apne kai aise logo ko ghused diya hai jo haramoyon me sarvsrestha hai jo aaj patrakarita ki ma behan ek kar rahe hai. Ghis ghis sab marenge sale. Tajjub is bat ka hota hai ki bhadas par padne ke bad bhi in kamino ki aankh nahi khulti aur real patrakaro ko naukari se nikala ja raha hai abhi jaldi hi isne noida me apne tathakathit sale ko naukari di hai unche ohde par
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written by sanjay, kanpur, October 16, 2011
dinesh pathak ne lucknow, faizabad, agra loota. naveen joshi ke talve chatne kebad ab shasi ka utha ker chal raha hai. pathak ne dehardun me kumbh se leker kai mamlon me bhrast logon se paisa liya hai . pathak ne nishank se lakhon liye. lucknow me apne daroga bhai ko bachane me akhbar ka istemal karta tha. sunil dubey ji ke samay me pathak ek mamle me phans gaya tha.
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written by pankaj.piyush, October 15, 2011
yashwant jee bahut-bahut badhi shashisekhar ki ashliyat ujagar karne ke liye. aapne tw bhare bazar unkee tamat hee utar dee.wayse aaj se 30-40 shal pahle hindee dainik AAJ ke sampadak pararkar jee ne kisee samahroh me kaha tha ki,"20-25 sall bad akhbaar bahut achche honge..letest kawreg hogi, achche printing hogee..lekin kishee sampadak kee itnee himmat nahe hogee ki vah malik se aankh milakar baat kar sake.. " param aadarniya-parta ishmarniya shashishekhar bhai bhe shwbhagya se hindee daink AAJ ke produkt hai. aaj ve ajj me nahee hai tw kaya.mana ki unme kabliyat the lekin kaya ve ALLAHABAD AAJ ke sampadak apnee kabliyat par bane ya papoo bhaiya (shardul vikram gupt) ke dosht hone ke natee bane. rahee cm khndooree ko na pata pane ki baat to showbhna jee ne galat bayana diya rastriya sahara ki tarah khndooreenama chaap dete ya sahara ke chintoo rakesh dobhall ko par lete to kam ban jata. ab bhee der nahee hooi hai. sahara se adhik vetan par use rakh laen jo kam shashisekhar, dinesh pathak ya avikal thapliyal nahee kar paye use rakesh dobhal kar dege. hakar se chif riportar u hee nahee ban gaye hai
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written by pankaj.piyush, October 15, 2011
rajesh vajpayee jee ek kahawat hai "shoop tw shoop bole, chalaniyan bole jekre 72 ched" shashisekhar par comment karte ho aapk bhai (swatantra mashra) sahab un hee itnee uchai par nahee pahooch gaye. unhone bhee yahee rashta apnaya tha.yaad hai ki bhool gye..smilies/grin.gif
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written by senior journalist, October 15, 2011
shashi shekhar ne phele aaj,phir amar ujala aur aab hindustan ke aise taise karne mein lage hue hain..............shashi shekhar ek kala kauaa hai jo news paper aur uske purane incharge aur reporter ka carrier karab karne ke baad hi dum leta hai....................shashi shekhar ko toh jutee,chapaal maar kar hindustan se nikalna chaiyee jane kitne logon ke roji roti par eesne laat mari hai...........
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written by aazad rajeev, October 15, 2011
apni to jaisi-taise kat jayegi unka kya hoga janabeaali...
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written by opsrivastava, October 15, 2011
YASHWANT JI,

THAKNKS FOR WRITTING THIS COMMENT.

YOU ARE REALY BOLD IN JURNALISM.

SHREE SHASHI SEKHAR JI YA KOI AUR MEDIA HOUSE ME JYADE

DINO TAK NAHI RUKTA HAI.

SHASHI SHEKHAR JI EK BADE PATRKAR HAI UNKO MALIKO KO BHI

MAJBURI ME KHUSH RAKHNA PADTA HAI.

MALIK ISH SAMAY KHUSH NAZAR NAHI ATTE. MALIK TO SHUDH

BYAPARI HAI. USHE PATRKARITA SE KYA LENA DENA. USHE TO

APNI INDUSTRY KO BADHANA HAI.

SHASHI SHEKHAR JI MOHRA BHAR HAI.

YEH ASHLI BAT APNE LIKHKAR MATHADHISH PATRKARON KE BICH

AAG LAGA DI HI HAI. ISHI WAJAH SE LOG APSHE BHADAK GAYE

HAIN.

YOUR'S-

O P SRIVASTAVA

A WELL WISHER FROM DEORIA U.P.

15 OCT. 2011
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written by एक पत्रकार , October 14, 2011
यशवंत जी,
सभी पत्रकार आपके बहुत आभारी है।
वैसे पत्रकार वही करता है जो उसका संपादक कहता है। फिर भले ही संपादक से मालिकान ने कहां हो या फिर वो अपने हित के लिए किसी अपने चहेते पत्रकार की बलि चढ़ा रहा हो। इस दौरान कुछ पत्रकार भी अपनी रोटियां सेकने से बाज नहीं आते है। उन कुछ पत्रकारों दंश ही बेचारे पत्रकार झेल रहे है। रही बात नंबर बढ़वाने की तो हर कोई बढ़ा अधिकारी यही चाहता है कि मालिकान सिर्फ उसकी मुठठी में रहे। कुछ लोग सत्‍यता से मालिकानों को आपनी मुठठी में रखते और कुछ लोग चापलूसी करके अपनी मुठठी में कर लेते है। वैसे तो आजकल सभी अखबारों ने इसे अपना धंधा बना लिया है। जो अधिकारी मालिकानों की कसौटी पर (मतलब तेल नहीं लगाता है) उसे मैनेजमेंट जादा दिन तक बर्दाश्‍त नहीं करता है। हर पत्रकार का यही सपना होता है कि वो एक दिन जरूर संपादक बनेगा। लेकिन अखबार के मैनेजमेंट ने भी अपनों को आगे बढ़ाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है। कहने के लिए तो बड़े बड़े अखबारों में आजकल प्रोन्‍नत्‍ती परीक्षा कराई जा रही है। इसका क्‍या मतलब है। क्‍या वाकई में प्रोन्‍नत्‍ती परीक्षा में पास होने वाला व्‍यक्ति संपादक बनने लायक है। ये कौन समझाए। अगर आपकी सेटिंग है तो आप प्रोन्‍नत्‍ित परीक्षा भी पास कर लेंगे और आपका प्रमोशन भी हो जाएगा। अब आप आज की स्थिति समझा ही सकते है। हर कोई अपना उल्‍लू सीधा करने में लगा हुआ है। अगर आपके पास तेल की भरी हुई शीशी है तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।
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written by Arun Kumar, October 14, 2011
Yashvat ji, aapane to kamal hi kar diya. Dallo ki panchayat ki khabar aapane itni bebaki se likhi hei, iske liye aap badhai ke patr hai. shashi shekhar ne resident editoro ki jagah par dalalo ki bharti ki hai. iska asar niche tak ja raha hai.
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written by Rajesh Kapil, October 14, 2011
Good shot Yashwant ji, Sach Kadwa he hota hai, jo bikta nahi complaint ussi patarkaar ki hoti hai, bik jane wale ki complaint kaun karta hai, editor khush rakhne k liye aaj kal exclusive news nahi setting zaroori hai, setting k liye aasaamiya (Politician, Businessman & Dalaal) khush rakhni zaroori, wo chahe kuch bhi galat kare log unko bura bole par aapko ignore karna hoga aur jab editor WAGAAR dale to fat se poori karna. Yehi hai aaj kal ki patarkari.

Cont......
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written by xyz, October 14, 2011
na jane shashi ne aur uske chamcho ne kitne journalist ka career karab kar diya,yahan tak ki amar ujala ko bhi barbad kar diya,eis sale ko toh joote,chappal mar kar hindustan se nikal na chaiye...............
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written by lucky, lucknow, October 14, 2011
shashi ji, pathak bahut ganda aadmi hai. ye saanp hai. ye aapke nam per up aur uttarakhand me dalali ker raha hai. ker jagah kahta hai ki vo ooper tak mal de raha hai. shashi ji jab tak pathak dehradun me rahega tab tak koi kam nahin hoga. pathak mahachor hai. jilon ke patarkaron se paisa lagta hai. pathak maderchod hai .
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written by PRAYAG PANDE, October 14, 2011
Yashwant ji ! aapane es lekh main patrkarita ki oat main apane vyaparik hit sadhane wale media gharanon ke gupchup khel ko bakhubi beprda kiya hai . yah sahasik karnama aap or bhadas hi kar sakate hain .BADHI !
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written by rajbali, October 14, 2011
shashi sekhar kee to lanka lag gayee samjho... sala mainpuri vapas jayega ya fir jahan se aaya hai vahin jayega .. sla kameena hai
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written by kapila khanm, October 14, 2011
badhai,,,,,,,,,,, khabar to yeh bhi hai ki shekher aur unke ek chamche resident editor ke khilakh janch shuru honewali hai.
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written by prashant kumaar, October 14, 2011
Another fire from point blank by Yashwant Bhai Saa'b. I like this article so much that I put some of its eye opening contents on facebook. Really a wonderful and marvelous piece of writing from the barrel of Yashwant's Gun. May God give u enough courage to expose n nude everyone who wears a mask.
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written by यशवंत, October 14, 2011
अनिकेत जी, आइना दिखाने के लिए शुक्रिया. पर आइने में कुछ नजर नहीं आया. दारू मैं लोगों से नहीं पीता, पिला जरूर देता हूं. और, पांच पांच हजार रुपये लेकर छापने की बात है तो भई, मैं कई बार लिख चुका हूं कि मैं दस फीसदी समझौते करता हूं, घोषित और लिखित तौर पर करता हूं. क्योंकि भड़ास के महीने डेढ़ दो लाख के खर्च निकालने पड़ते हैं. और मैं यह भी बता दूं कि मैं कोई लिखित में मीडिया नहीं हूं. न हमने सरकारी कोई लाभ लिया है, न सरकारी विज्ञापन लेते हैं, न अनुदान पर जमीन लेते हैं न पत्रकारिता का कोई कार्ड लेते हैं जिससे तमाम तरह के लाभ मिलते हैं... तब भी मैं यह कहन में सक्षम हूं कि भड़ास नब्बे फीसदी से ज्यादा ईमानदार है. लेकिन क्या यही बात आजकल के बड़े मीडिया हाउस कह सकते हैं? सच कहूं तो बड़े मीडिया हाउस नब्बे फीसदी से ज्यादा प्रतिशत मीडिया होने के कारण समझौते कर लेते हैं और बाकी बचे आठ दस फीसदी में मरा कटा होगा होगी टाइप खबरें छाप कर पन्ने भर देते हैं. यह लंबी बहस है दोस्त. इतनी आसानी से चीजों को जनरलाइज नहीं किया जा सकता. पर मैं समझ सकता हूं. शशि जी को चाहने वाले भारी मात्रा में हैं क्योंकि उन्होंने बहुतों को रोजी रोटी दी है. और दुर्भाग्य यह कि पत्रकारिता को रोजी रोटी पाने का जरिया मानने वाले इतनी बड़ी संख्या में पत्रकारिता में घुस आए हैं या घुसा दिए गए हैं कि उन्हें पत्रकारिता के सरोकार और पेट भरने की मजबूरी के बीच कोई फर्क नहीं समझ आता, इसलिए वे हर एक को गरियाने के लिए गरियाते हैं या खुश करने के लिए खुश करते हैं, क्योंकि उनके कहने में कोई नैतिकता नहीं बल्कि स्वार्थ या विद्वेष छिपा होता है. आपके कमेंट को प्रकाशित कर दिया गया है, यह भड़ास की डेमोक्रेसी है. यही बताता है कि हम लोगों की नीयत और दिल में खोट नहीं है. आप आगे जितनी भी मुझे गालियां देंगे, वह यहां छपता रहेगा और मैं सफाई भी नहीं दूंगा क्योंकि मैंने कभी अपने को सत्यवादी हरिश्चंद्र या मर्यादा पुरुषोत्तम राम नहीं बताया. मैंने अपने को हमेशा दारूबाज, अक्खड़, उद्दंड, इगोइस्ट, डाउन टू अर्थ, देहाती, चिरकुट, चूतिया... जाने क्या क्या माना है और सच भी यही है. वरना हम भी किसी की कृपा से कहीं पर अपने और अपने परिवार का पेट पालने पोसने के लिए दस से पांच की नौकरी बजा रहे होते पर अपनी बुरी आदतों ने किसी का गुलाम बनने नहीं दिया और अपन की आजादी बहुतों को रास आती नहीं. ऐसे में बताएं हम क्या करें, कहें तो मर जाएं या कहें तो चुप हो जाएं.... smilies/smiley.gif

यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया
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written by AshishAgarwal, October 14, 2011
This is true words for todays media,shashi shekhar is the only a chracter in this story but we can find everywhere a shashishekhar now a days,who is dominating in media houses,but we must hope time will take trurn soon.And लेकिन दुर्भाग्य यह कि जो पत्रकार कहे जाते हैं आजकल, वही सबसे बड़े सुविधाभोगी बनने की ओर उन्मुख हैं. जो संपादक कहे जाते हैं आजकल वही सबसे बड़े पीआर एजेंट बनने की ओर उन्मुख हैं. इसी कारण हमारे दौर में राडियाओं का काम आसान हो जाता है कि क्योंकि उसके एक फोन पर बड़े बड़े संपादक लायजनिंग और पीआर के अनमोल बोल बोलने बकने लगते हैं. The seen will change.
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written by Amit sharma, October 14, 2011
यशवंत जी लेख के लिए आप बधाई के पात्र है शशि जैसे आदमी के साथ यही होना चाहिए. वैसे उन संपादको का क्या होगा जो शशि के सिपहसालार है जब शशि कि पुंगी हिंदुस्तान से बज जायेगी
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written by raj kaushik, October 14, 2011
mai aaine taraash ke bhi behunar raha... wo kirchiyaan samet kar fankaar ho gaye....
raj kaushik
r.e. DLA
ghaziabad
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written by sindhu jha, October 14, 2011
Yashwan jee, mai aapki kuchh baton se sahmat or kuchh se asahmat hun. Aj ke editor wasulon per nahi balki wasuli karke jee rahe hain. ShashiShekhar koi Chelapathy Rao nahi hain jinke office me purva anumati lekar Pundit Nehru milne jate thhe. wo daur alag thha. Aaj ke adhiktar sampadak bazaaru bun gaye hain malik jo kahte hain chakar log usme jutt jate hain. Aapne jub charcha chhed dee hai to ek mai bhi apna Amar Ujala ka sansmaran sunana chahunga. mai karib 17 saalon ke baad Rashtriya sahara chhor kar 2008 me economic bureau chief ke roop me Amar Ujala join kiya lekin bamushkil 5-6 maah hi tik paya kyuki ShashiShekhar jo umeed lagakar mujhhe laye thhe wo pooree nahi ho payi. khair, mai vistaar me yaha nahi janaa chahta balki sirf ek wakya sunana chahta hun. Jis din main join karne pahuncha to formalities puree hone ke baad Shashi jee ne kaha ," Dekho Sindhu, humlog malikon ke chaprasi hain. Tumko khabar ke alawa malikon ke kuchh hidden agenda per bhi kaam karna hoga." Ek din mujhhe bataya gaya ki mujhhe Amar Ujala ke disinvestment se juree ek file ko finance ministry(North Block) me trace kar usko aage move karana hai. Ees kaam me Shashi jee ne akhabaar ke political bureaue chief Vidyashankar Tiwary ko bhi laga rakha thha. Humlogo ne file ko trace kiya or uske latest position ki jankaari apne boss ko di.. kahani or aage hai mai vistaar me nahi jana chahta. lekin ek din aisi ghatna ghati jisne meri ankhen khol dee ( Tiwary jee ki bhi shayad khul gayi hogi). North block me chakkar marne ke dauran ek Joint sec. A. K Pujary ne apne kamre me hum dono ko baithhakar poochha ki batao ki ye sub kam ( file clear karane ke kaam) me malik ne tumhe kyun lagaya hai, malik ko kaho ki CA ya Gm finance ko yaha bheje. Pujary sahab me bureaucrate ka koyee hang-ups nahi thha, apne chamber me aaye kuchh logon ko homeopathy ki daba bhi bata rahe thhe..Khair baad me Amar Ujala ke president finance waha pahunche....Es wakye ke kuchh hi dino baad mera na sirf Amar ujala, valki aaj ke journalism se hi moh bhung ho gaya. Ees samay mai teaching kar raha hun ek professor ke roop mai, or bahut jyada khush hun. JNU me Hindi ke professor Manager pandey ne ek baar aaj ki patrakaritaa ki tulana veshyavriti se ker dee to saare ptrakaar dukhi ho gaye thhe. Kyunki satya karwa hota hai.
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written by aniket, October 14, 2011
वैसे यशवंत जी यह लेख कोई और लिखता तो पढ़ने में मजा भी आता. आप खुद कितने बड़े लाइजनर हैं और हरामखोर हैं यह लोग खूब जानते हैं. रही बात शशि शेखर की तो उनके साथ जो होना होगा वह तो होगा ही. लोगों के साथ किया है तो उनके साथ भी होना चाहिए लेकिन आपके मुंह से यह सिद्धांत और पत्रकारिता की बातें सुनकर लगता है कि जो आदमी पांच हजार लेकर कुछ का कुछ छापता है. पचास रुपये की दारू पीने के लिए लोगों के पीछे-पीछे घूमता है वह जब सिद्धांत पेलता है तो हंसी आती है
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written by anam dehraduni, October 13, 2011
gajab yashwant bhai...gajab lika aur sach lika..
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written by rajesh vajpayee unnao, October 13, 2011
wah may ray sher bhai kya khoob jameen khod kar suchai nikali . maja aur tathakatith patrakaro ka asli kaam (taluve chatna) pathko k saamnay aa gaya. ye saalay patrakaro k naam badnuma dhabay hai .in say behtar tou bigboss ki laxmi hai jo apni asliyat tou kum say kum nahi chipati.aisay pattal chato ki wajah say he ab patrakaro ko samman politician nahi deytay.patrakaro ko kutta samajhtay hai. warna kalam may aj bhi wah takat hai ki politician ya har bada say bada adhikari bhi patrakarita aur patrakaro ki khabar ki kadra karein.
yashwant bhai aap hum logo k icon ho humlogo ko aap par bahut naaz hai
rajesh vajpayee ibn7 unnao
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written by Bijay singh, October 13, 2011
shashi sekhar ji aap jaise bade sampadak bhi agar yahi karenge to chuttbhaiye kya karenge... aree bhai saheb sampadak tak hi rahiye na ...malikon ke laisioning agent kyon ban jate hain aap log... ab fajihat to honi hi hai...waise hindustan jahan bhi hai apne patrakaron se yahi kam karwata hai... Jharkhand me bhi ek poorv sampadak yahi kam karte the ,abhi bechare ek channel me hain.. lekin wo to galatfahmi ke shikar hue aur sath me jamshedpur ke ek varishta patakar bhi bechare bahar ho gaye...
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written by raja, October 13, 2011
यशवंत भैया आपने सही लिखा की अभी सशिशेखर को खाली हाथ लोटना पड़ेगा। अब सशी शेखर का करियर लगातार खतम हैं क्योंकि अब बूड़े और घाघ हो चुके संपादकों की मीडिया में कोई जगह नहीं हैं क्योंकि यह हर मोरचे पर फ़ेल हो रहे हैं क्योंकि इनको मीडिया मनज़ेमेंट का जिम्मा दिया जाता हैं लेकिन यह अब उन कामो को भी नहीं करवा पा रहे हैं तो फिर क्या फायदा । रही नए नए प्रयोग की बात तो हिंदुस्तान लगातार पाँच राज्य और सोलह संसकरण में लगातार पिटा हुआ हैं इसके बाबजूद सशिशेखर के रुतवे में की कमी नहीं हैं। इसलिए आने वाले समय में मीडिया में जमे हुए बुड़े घाघ लाघभाग खतम ही हो जाएंगे क्योंकि बुड़ापा बहुत बूरी चीज है।जब जवानी में धुआँ पेला हैं तो धक्के भी खाने पड़ेंगे प्रभु चावला की तरह ।
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written by pankaj kumar, October 13, 2011
aap ne bilkool thick likhha hai-pankaj,ek paterker,meerut
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written by ravi kumar, October 13, 2011
भाई यशवंत जी..शशिशेखर खुद को मीडिया में सबसे कम उम्र में सबसे बड़े मीडिया ग्रुप का संपादक बताते हैं।उन्होंने लोगों का बुरा किया है तो उनका भला कैसे हो सकता है।ईश्वर की बेआवाज लाठी तो एक दिन शेखर पर पड़ेगी ही।आगरा के आज अखबार से हिन्दुस्तान तक का सफर तय करने से कोई बड़ा संपादक नहीं बन जाता।अहंकार से मनुष्य पतन को प्राप्त होता है।शशिशेखर जैसे अहंकारी पत्रकार के पतन की शुरुआत हो चुकी है।
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written by sandeep, October 13, 2011
yashwant ji, sachchi aur achchi report ke liye bahut saari badhai. lekin abhi ye kahna sahi nahi hoga ki shashi shekhar ke bure din aa gaye hain. burai ka ant itne aaram se kahan hota hai. shobhna ji, mana ki aapko business badane hain magar uske liye shashi shekar jaiso ka sath kharab nateeje hi layega. amar ujala se kuch to seekho. sekdo nirdosh patrakaro aur unke parijano ki baddua shashi shekar ke sath hain. un badduayo ko aap kyon apne sir leti hain? waise to kai purane aue wafadar logo ko bahar kar shashi shekhae un badduayo ko aapke ghar ka rasta dikha hi chuke hain magar abhi bhi waqt hai. sambhal jaiye. is burai ko jitni jaldi aap khatam kar de, achcha rahega.
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written by vivek, October 13, 2011
भईया बधाई...बहुत बड़ा हरामी है शशिशेखर ईश्वर एक न एक दिन इससे बदला जरूर लेगा।
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written by hahaha, October 13, 2011
महोदय, इन बड़े मीडिया हाउसेज में ये दौर तो एक दशक पहले ही शुरू हो चूका था अब तो सिर्फ ये एक्सपोज हो रहे है |

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