बिहार ही नहीं चार अन्‍य प्रदेशों में भी फैला है हिंदुस्‍तान का अवैध प्रकाशन और विज्ञापन फर्जीवाड़ा

E-mail Print PDF

मुंगेर। भारत में प्रजांतत्र है। भारतीय संविधान में कानून की नजर में सभी समान हैं, परन्तु संविधान की यह अवधारणा केवल कानून की कितबों तक ही सीमित है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेज उजागर करते हैं कि मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड की प्रमुख शोभना भरतीया की कारपोरेट हस्ती के कारण केन्द्र सरकार का प्रेस रजिस्ट्रार और दृष्य एवं प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के कार्यालय के साथ-साथ बिहार का सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय का कार्यालय नपुंसक बनकर काम कर रहा है।

इन तीनों कार्यालय के छोटे-बड़े सभी अधिकारी सूचना के अधिकार कानून के लागू होने के बाद मीडिया हस्ती शोभना भरतीया और उनके कंपनी के अवैध प्रकाशन के कारोबार को बचाने का ही भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार, तीनों विभागों ने संयुक्तरूप से दैनिक हिन्दुस्तान को बिहार के मुजफ्फरपुर और भागलपुर से बिना रजिस्ट्रेशन के प्रकाशन करने और केन्द्र और राज्य सरकारों के करोड़ों-अरबों के सरकारी विज्ञापन प्रकाशन के जरिए सरकारी खजाने की लूट की इजाजत दे रखी है। सारे दस्तावेजी साक्ष्य के बावजूद भी दैनिक हिन्दुस्तान का अवैध प्रकाशन और विज्ञापन फर्जीवाड़ा निरंतर जारी है।

अब जो सरकारी दस्तावेज हाथ लगे हैं, वे उजागर करते हैं कि दैनिक हिन्दुस्तान का फर्जीवाड़ा का दायरा केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है वरन इस विज्ञापन फर्जीवाड़ा का दायरा झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली राज्य भी है। इसीलिए अब समय की मांग है कि बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकारें एक साथ दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और विज्ञापन फर्जीवाड़ा की जांच संयुक्तरूप से करें।

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली की अनुभाग अधिकारी (आर-1) पूर्णिमा मलिक ने कार्यालय पत्रांक-4/विविध/2006-आर-1, दिनांक 20-04-2006 के जरिए बिहार के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना के तात्कालिक सचिव विवेक कुमार सिंह को सूचित किया है कि -‘‘कृप्या आप उपरोक्त विषय में अपने पत्रांक-विज्ञापन-48-01/2006-247, सू0ज0स0नि0, पटना, दिनांक 22-03-2006 का अवलोकन करें। इस संबंध में कहना है कि प्रेस एण्ड रजिस्‍ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 के अनुसार ‘हिन्दुस्तान’ समाचार पत्र का मुद्रण केवल पटना से ही हो सकता है क्योंकि इस कार्यालय द्वारा केवल पटना से ही मुद्रण की स्वीकृति प्राप्त है। यदि इस समाचार पत्र का मुद्रण मुजफ्फरपुर और भागलपुर से करना चाहते हैं, तो दोनों स्थलों से भी घोषणा पत्र देना होगा।’’

प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली के इस पत्र ने स्पष्ट कर दिया कि दैनिक हिन्दुस्तान ने भागलपुर और मुजफ्फरपुर से मुद्रण करने की कोई अनुमति/स्वीकृति प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय,  नई दिल्ली से 20 अप्रैल, 2006 तक नहीं ली गई है। इस प्रकार प्रेस रजिस्ट्रार से स्पष्ट जानकारी मिलने के बावजूद कि दैनिक हिन्दुस्तान ने भागलपुर और मुजफ्फरपुर से प्रकाशन/संस्करण की कोई अनुमति उसके कार्यालय से नहीं ली है। फिर भी निदेशालय ने वर्णित दोनों स्थानों से अवैध दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन भी आज तक बन्द नहीं किया और न ही अवैध विज्ञापन प्रकाशन के जरिए वसूले करोड़ों रुपये की वसूली की कार्रवाई ही की। और तो और, कानून के तहत जहां निदेशालय को अवैध प्रकाशन और फर्जीवाड़ा के लिए दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधन की प्रमुख शोभना भरतीया और अवैध प्रकाशनों के संपादकों, मुद्रकों और यूनिट प्रभारियों के विरुद्ध फौजदारी मुकदमा दर्ज करना था, निदेशालय ने वित्त जांच रिपोर्ट और प्रेस रजिस्‍ट्रार कार्यालय के पत्रों पर कुंडली मार दी और सभी घोटालों पर पर्दा डाल दिया।

सबसे दुःखद बात यह है कि प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली और विज्ञापन एवं दृष्य प्रचार निदेशालय, नई दिल्ली ने पटना के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के तात्कालिक सचिव विवेक कुमार सिंह के पत्र के द्वारा यह सूचना देने के बावजूद भी कोई कार्रवाई दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधन के विरूद्ध नहीं की। विज्ञापन एवं दृष्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी), नई दिल्ली ने बिना रजिस्‍ट्रेशन दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर और मुजफ्फरपुर प्रकाशन/संस्करण को डीएवीपी विज्ञापन दर स्वीकृत कर भ्रष्टाचार का इतिहास ही रच डाला है।

अब मांग उठ रही है कि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकारें अविलंब दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और विज्ञापन फर्जीवाड़ा की जांच करें और दोषियों के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्जकर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करें अन्यथा आने वाले समय में यह फर्जीवाड़ा इंग्‍लैंड के रूपर्ट मर्डोक के अखबार के फर्जीवाड़ा जैसी शक्ल ले लेगा।

मुंगेर से काशी प्रसाद की रिपोर्ट.


AddThis