संपादक आदित्य सिन्हा की नई सनसनी

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: पेड न्यूज मुक्त अखबार होने का लिखित ऐलान कर डाला : जैसे पुलिस थानों के सामने लिखा होता है कि दलालों का प्रवेश वर्जित, पर थानों में सबसे सहज इंट्री इन्हीं दलालों की होती है, उसी तरह अब पेड न्यूज सिंड्रोम को भुनाने की कोशिश मीडिया हाउस करने लगे हैं और इसकी पहली कड़ी में आज से मुंबई से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक डेली न्यूज एंड एनालिसिस (डीएनए) ने फर्स्ट पेज पर एक मुहर नुमा लोगो प्रकाशित करना शुरू किया है जिसमें पेड न्यूज लिखे शब्द के उपर क्रास का निशान बना हुआ है.

नीचे छोटे अक्षरों में लिखा हुआ है कि हम पेड न्यूज से पूरी तरह मुक्त अखबार हैं. अब इन्हें कौन समझाए कि पेड न्यूज सिर्फ पैसे लेकर खबर छापने को ही नहीं कहते, पेड न्यूज सरकार से डरकर उन खबरों को भी न छापने को कहते हैं जिसमें जनता का तो भला होता है लेकिन सरकारों, नौकरशाहों और नेताओं की वाट लगती है और अंततः ये एक्सपोज होते हैं. महाघोटालों वाले बाजार के इस महा घटिया दौर में भास्कर समूह और जी समूह वालों के इस मिले जुले अखबार डीएनए ने भले ही पेड न्यूज को न प्रकाशित करने का ऐलान करके पाठकों को अपनी तरफ आकर्षित करने और देश भर के मीडिया वालों का ध्यान खींचने का प्रयास किया हो लेकिन सच तो यही है कि परंपरागत मीडिया हाउस यथा बड़े अखबार और टीवी चैनल अपने बड़े खर्चों के कारण और हर साल टर्नओवर बढ़ाने की मजबूरी के कारण पेड न्यूज करते रहेंगे, कोई ढंके छुपे करेगा और कोई खुलकर करेगा.

एक बड़े हिंदी अखबार ने पंजाब चुनाव में सभी प्रत्याशियों से पैसे लेने की बजाय एक पार्टी के आलाकमान से इकट्ठे पूरे पंजाब की डील कर ली. तो, ऐसे में पेड न्यूज की यह खबर लीक न हो सकी क्योंकि वहां कोई चौथा शख्स मौजूद न था. लेकिन जब जिले जिले के किसी अखबार के रिपोर्टर चुनाव लड़ रहे नेताओं से पैसे वसूलते हैं तो बात कई बार खुल जाती है. पर टॉप लेवल पर पूरे प्रदेश के लिए डील हो जाए तो कौन कहेगा कि ये पेड न्यूज है. दूसरे, पेड न्यूज सिर्फ चुनाव के वक्त की बात नहीं है. विज्ञापनदाता कारपोरेट कंपनियों के घटिया कारनामों की खबरें न छापना भी पेड न्यूज का हिस्सा है. क्या अंबानीज की कंपनियों के घपले-घाटालों पर डीएनएन के संपादक-पत्रकार कलम चला पाएंगे?. एक मिनट न लगेगा जब उनसे संपादक की कुर्सी छीन ली जाएगी. इसके दर्जनों उदाहरण भरे पड़े हैं. इस विचित्र दौर में हर कोई अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तरह-तरह के फंडे अपना रहा है, हो सकता है, डीएनए के नए एडिटर इन चीफ आदित्य सिन्हा अपनी और अपने अखबार की मार्केटिंग के लिए ये सब हथकंडे अपना रहे हों. पहले इन्हीं संपादक महोदय ने एडिट पेज खत्म करने का ऐलान किया और अब पेड न्यूज फ्री अखबार की घोषणा लिखिति रूप से कर दी है.

जो भी हो, आदित्य सिन्हा के ये दुस्साहसिक कदम बरबस ध्यान खींचते तो हैं ही. और, कुछ लोगों के मन में उम्मीद भी जगाते हैं कि हो सकता है कि ये अखबार वाकई ऐसा कर डाले. अब तो ये वक्त बताएगा कि डीएनए मैनेजमेंट अपने एडिटर इन चीफ आदित्य सिन्हा के लिखित ऐलान का कितना पालन कर पाता है. वैसे, कितना अच्छा रहता को डीएनए को चलाने वाले दोनों पार्टनर अपने दस्तखत से ये ऐलान करते, तब शायद इसे सच्ची पहल माना जा सकता था. लेकिन मालिक चुप हैं, संपादक साहब अति सक्रिय हैं और जोर-जोर से ऐलान कर रहे हैं. इस अंतरविरोध को बूझिए.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया


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