क्‍या हो गया है हिंदुस्‍तान को, एक खबर दो बार

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आखिर क्‍या हो गया है हिंदुस्‍तान के पत्रकारों को खबर के अंदर तो अक्‍सर गलतियां देखेने को मिलती हैं, अब खबरों का रिपिटिशन भी होने लगा है. एक ही खबरें दो-दो जगहों पर लगने लगी हैं. कल यानी 17 फरवरी को दैनिक हिंदुस्‍तान के दिल्‍ली एडिशन में एक ही खबर दो जगह प्रकाशित हुई है. यह खबर दिल्‍ली पुलिस को कैट के एक आदेश से संबंधित है. जिसमें एक महिला की बर्खास्‍तगी को गलत बताया गया है.

संक्षिप्‍त तौर पर यह खबर पहले पन्‍ने पर तो है ही, इसके अलावा अंदर भी दो जगह यह खबर है. पृष्‍ठ संख्‍या सात पर यह खबर 'महज आरोपी होने पर नौकरी से नहीं हटा सकते' की हेडिंग से छपी है. यही सेम खबर पृष्‍ठ संख्‍या चौदह पर भी 'बरी हो गए तो फिर अपराधी कैसे' की हेडिंग से छापी गई है. पहली खबर का स्रोत कार्यालय संवाददाता है जबकि दूसरी खबर का स्रोत एजेंसी को लिखा गया है. अब सच क्‍या है यह तो अखबार मैनेजमेंट ही बता सकता है. परन्‍तु इससे अखबार की जगहंसाई जरूर हो रही है.

हिंदुस्‍तान

हिंदुस्‍तान

एएन शिबली हिंदुस्‍तान एक्‍सप्रेस के ब्‍यूरोचीफ हैं.


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