मुश्किल में गांडीव, कैसे उपलब्‍ध कराए श्रम विभाग को रजिस्‍टर

E-mail Print PDF

बनारस के सांध्‍य दैनिक गांडीव का प्रबंधन पूरी तरह से परेशान है. अपने कर्मचारियों के वेतन के मामले को लेकर वह बुरी तरह से फंस गया है. इसके चलते अब अखबार प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच वेतन विवाद का मामला और लम्‍बा खिंचता नजर आ रहा है. कर्मचारी प्रबंधन के गड़बड़झाले में साथ देने को तैयार नहीं हैं. श्रम विभाग ने 25 फरवरी तक सारे रजिस्‍टर जमा कराने को कहा है.

सूत्रों का कहना है कि श्रम विभाग के निर्देश के बाद प्रबंधन ने आनन-फानन में पांच साल का वेतन रजिस्‍टर तैयार करवाया तथा इस पर कर्मचारियों को दस्‍तखत करने को कहा, लेकिन कर्मचारी इस रजिस्‍टर में गड़बडि़यां बताते हुए दस्‍तखत करने को किसी कीमत पर तैयार नहीं हैं. कई शिकायतों तथा जांचों के बाद श्रम विभाग ने गांडीव प्रबंधन को 25 फरवरी तक कर्मचारियों द्वारा हस्‍ताक्षतिर वेतन रजिस्टर उपलब्‍ध कराने की बात कही है. इससे प्रबंधन बुरी तरह परेशान है. तयसीमा खतम होने में सिर्फ चार दिन रह गए हैं और कर्मचारी इस रजिस्‍टर पर हस्‍ताक्षर करने से इनकार कर रहे हैं. प्रबंधन की परेशानी का कारण यह है कि वह पहले कर्मचारियों का वेतन वाउचर या एडवांस के रूप में देकर अपना काम चला लेता था. रजिस्‍टर एवं कागजातों को मेंटेन करने की कभी जरूरत महसूस नहीं करता था. अब जब कर्मचारियों के हस्ताक्षरित रजिस्टर को पेश करने की बात श्रम विभाग कह रहा है तो प्रबंधन के हाथ पांव फूले हुए हैं.

गांडीव के सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश गुप्त पप्पू को बुलाकर गांडीव प्रबंधन ने पुनः रजिस्टर चेक कराया और पप्पू ने इसमें दुबारा गड़बड़ियां देखीं. दिलचस्‍प तथ्‍य यह है कि 2005 में गांडीव सातवें ग्रेड में था, लेकिन अगले ही साल यह आठवें ग्रेड पर आ गया. 2006 का वेतन इस तरह निर्धारित किया गया कि कर्मचारियों के बेसिक वेतन में ही एक हजार रुपये की कमी आ गयी. महंगाई, इंक्रीमेंट के बावजूद वेतन में असमानता बनी रही. गांडीव प्रबंधन ने अपने सफाई में कहा है कि अखबार का रेवेन्यू कम होने की वजह से आठवें ग्रेड में आ गया है. इसके चलते ही कर्मचारियों का बेसिक वेतन में कमी आ गई है. उसके पास अब देने को पर्याप्‍त रकम नहीं है. अब वह इससे ज्‍यादा कुछ नहीं कर सकता.

दूसरी तरफ श्रम विभाग द्वारा पिछले दिनों मारे गए छापे में उसे वेतन या हाजिरी रजिस्‍टर नहीं मिल पाया था. जिसके बाद श्रम विभाग ने गांडीव प्रबंधन को रजिस्‍टर उपलब्‍ध कराने के लिए 25 फरवरी का समय सीमा निर्धारित कर दिया. हड़बड़ी में प्रबंधन ने किसी तरह वेतन तथा हाजिरी रजिस्‍टर तैयार कराया, जिसमें ज्‍यादा गड़बडि़यां हो गईं. इन समस्‍यायों को गांडीव कर्मियों ने अपने बैठक में भी उठाया. समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के लोग भी इस बैठक में शामिल रहे. संघ ने इस मामले में सीधा हस्‍तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. कुछ कर्मचारी अपने रिटायरमेंट तक नौकरी की गारंटी भी चाहते हैं. इधर, श्रम विभाग ने चेतावनी दी है कि 25 फरवरी तक गांडीव प्रबंधन ने कर्मचारियों के हस्ताक्षरित वेतन, हाजिरी व अन्य रजिस्टर उपलब्‍ध नहीं कराए तो उसका प्रासीक्‍यूशन कर दिया जाएगा. अब देखना है कि प्रबंधन इस मुश्किल से किस तरह निपटता है क्‍योंकि अगर प्रासीक्‍यूशन हुआ तो इसका गांडीव की साख पर भी बुरा असर पड़ेगा.


AddThis