जाने से पहले हिदुस्‍तानियों को रूला गए अशोक पाण्‍डेय

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: साथियों ने दी अपने पूर्व संपादक को फेयरवेल : 25 फरवरी की शाम हिन्दुस्तान-झारखंड के वरीय स्थानीय संपादक अशोक पाण्डेय को साथियों ने बोझिल दिल के साथ विदा किया। अशोक जी की विदाई समारोह में संपादकीय विभाग के साथ-साथ मैनेजमेंट, प्रसार, मशीन तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी मौजूद रहे। क्या अपने-क्या पराये, सभी की आंखे नम थीं।

इस मौके पर हिन्दुस्तान झारखंड के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट बेनी माधव चटर्जी तो अशोक पाण्डेय से गले मिलकर भावुक हो गये। उन्होंने कहा कि मैनें अपने 26 बरस के प्रबंधकीय जीवन में अशोक जी जैसा बेबाक और साफ दिल वाला संपादक नहीं देखा। वे झारखंड को बहुत याद आयेंगे। इसी दौरान पुरानी यादों और साथ काम करने के तौर-तरीकों को याद करते हुए कई साथियों के गले रूंध गये।

तमाम साथियों ने कहा कि यह एक नयी परंपरा की शुरुआत है। दस साल के अंदर अब तक झारखंड में हिन्दुस्तान के 11 संपादक बदल गये, लेकिन किसी को भी विदाई सम्मान नहीं दिया गया। यह नयी परंपरा संपादक अशोक पाण्डेय के सद्भाव और टीम भावना की पूंजी है। आभार व्यक्त करते हुए निवर्तमान संपादक श्री पाण्डेय ने कहा कि कमांडर तो सिर्फ रणनीति बनाते हैं, असल मोर्चा तो टीम के सिपाही ही जीतते हैं।

अशोकजी

समारोह में ब्यूरो प्रभारी चंदन मिश्र ने ब्यूरो सदस्यों की ओर से शाल तथा कलाई घड़ी देकर सम्मानित किया, जबकि लोकल टीम ने भगवान बिरसा की भूर्ति भेंट की। अन्य सदस्यों ने बैग सहित कई अन्य उपहार दिये। मैनेजमेंट की ओर से झाखंड के प्रसार प्रबंधन पकंज यादुका, एचआर हेड किरन बगाई, बिजनेस हेड  इंद्रजीत सिंह ने फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। वरीय समाचार संपादक मनोरंजन सिंह, संदीप कमल, घनश्याम श्रीवास्तव, डीएनई यशोनाथ झा, ब्यूरो रिपोर्टर अजय शर्मा, नीरज सिन्हा समेत सभी साथी मौजूद थे।

विदाई

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