गुफ्तगू के शख्सियत में इस बार फज्ले हसनैन

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हसनैनइलाहाबाद से प्रकाशित हो रही त्रैमासिक पत्रिका ‘गुफ्तगू’ के ‘शख्सियत’ कालम में इस बार वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार फज्ले हसनैन के बारे में जानकारी दी गई है। इस कालम में पचास वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे पत्रकारों की जीवनी प्रकाशित की जा रही है, जिन्होंने दैनिक अखबारों में काम किया है। पिछले आठ वर्ष से प्रकाशित हो रही इस साहित्यिक पत्रिका ने शख्सियत नामक कालम की शुरुआत अपने दिसंबर 2010 अंक से की थी, इस अंक में नरेश मिश्र की जीवनी और उनका अनुभव प्रकाशित किया गया था।

पत्रिका के मार्च 2011 अंक में फजले हसनैन के बारे में प्रकाशित किया गया है। श्री हसनैन का जन्म सात दिसंबर 1946 को इलाहाबाद जनपद के लालगोपालगंज में हुआ था। 1973 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अंग्रेजी दैनिक नार्दन इंडिया पत्रिका से कैरियर की शुरूआत की। इसके अमृत प्रभात और स्वतंत्र भारत में काम किया। पत्रकारिता के साथ ही1974 से ही श्री हसनैन ने हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी में लेखन कार्य शुरू किया जो अब तक जारी है।

आपकी कहानियां, नाटक और व्यंग्य देश-विदेश की नामी गिरामी पत्र-पत्रिकाओं में स्थान पा चुकी हैं। 1982 में श्री हसनैन का पहला व्यंग्य संग्रह ‘रुसवा सरे बाजार’ उर्दू में प्रकाशित हुआ, जिसे उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी द्वारा पुरस्कृत किया गया। उर्दू में आपके तीन नाटक संग्रह ‘रोशनी और धूप’, ‘रेत के महल’ और ‘रात ढलती रही’ प्रकाशित हो चुके हैं। हास्य-व्यंग्य संग्रह ‘दू-बदू’ वर्ष 2001 में प्रकाशित हुआ।

गालिब पर लिखी गई आपकी किताब ‘गालिब एक नजर में’ को इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। आपके चार डाक्यूमेंट्री फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी है। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की उर्दू एकेडमी से पुरस्कृत फज्ले हसनैन को प्रतिष्ठित आल इंडिया मीर एकेडमी एवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।


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