पत्रिका समूह राजस्थान के कई शहरों में रियायती दर पर मिले जमीनों को लौटाए

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: गुलाब कोठारी की टिप्पणी के खिलाफ जयपुर प्रेस क्लब में हुई बैठक : जयपुर : राजस्थान पत्रिका में आज के अंक में मुख्य पेज पर प्रकाशित अग्रलेख में पत्रकारिता को लेकर की गई टिप्पणी से प्रदेश भर के पत्रकारों में आक्रोश है. इस टिप्पणी को लेकर बुधवार को विभिन्न पत्रकार संगठनों की प्रेस क्लब में एक बैठक हुई. बैठक में विभिन्न पत्रकारों ने राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित लेख पर ऐतराज किया.

उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी को प्रकाशित करने से पहले राजस्थान पत्रिका प्रबंधन अपने गिरेबां में झांकता. अगर पत्रिका प्रबंधन राज्य सरकार की ओर से पत्रकारों को दी गई सुविधाओं को भ्रष्टाचार की श्रेणी में मानता है तो उसे अब तक मिली सभी सुविधाओं को छोड़ देना चाहिए. सरकार की ओर से राजस्थान पत्रिका को सभी शहरों में रियायती दरों पर मिली जमीनों को वापस लौटाना चाहिए इसके साथी ही सरकारी विज्ञापनों का मोह भी त्यागना चाहिए.

पत्रकारों ने कहा कि पत्रिका प्रबंधन को चाहिए कि पत्रकार समूह के विभिन्न समाचार पत्रों में काम कर रहे पत्रकारों को मिली सुविधाओं को वापस करें जिनमें पत्रकार कॉलोनी में मिले भूखंड भी शामिल है. इसके साथ ही जयपुर में जेएलएन मार्ग स्थित कुलिश स्मृति वन का नाम भी बदलवाने की कार्यवाही करें.

बैठक में पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह राठौड़, महासचिव नीरज मेहरा, राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष ईशमधु तलवार, महासचिव हरीश गुप्ता, राजस्थान पत्रकार परिषद के अध्यक्ष एलएल शर्मा, महासचिव राजेंद्र गुप्ता, लघु व मध्यम समाचार फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष बीएम शर्मा, राजस्थान स्माल एंड मिडियम न्यूज पेपर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक भटनागर, राजस्थान पत्रकार संघ के पदाधिकारियों के अलावा कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे. प्रेस विज्ञप्ति


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Comments (25)Add Comment
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written by Scribe, March 07, 2011
@Harish : These people as chief advisors !!? You must be joking ! Its like Ashish Nehra teaching Sachin Tendulkar how to bat. Remember when these people were in liquid form, GK was in uniform !!!
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written by B4M, March 07, 2011
भगवान बनने की राह पर हैं गुलाब कोठारी

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी खुद को भगवान से कम नहीं समझते। या फिर, उनके इनहाउस चमचों की फौज उन्हें भगवान बनाने पर तुली हुई है। हालांकि इसका सीधा-सीधा नुकसान स्वयं गुलाब कोठारी और उनसे भी ज्यादा राजस्थान पत्रिका को हो रहा है। यह अलग बात है कि स्वयं कोठारी इस बात से अनभिज्ञ हैं। हो सकता है, वे इससे अनभिज्ञ बने रहना चाहते हैं।

अपने ही अखबार में अपने लंबे-चौड़े प्रवचन और बोरिंग आलेख छपवाना गुलाबजी का शुरू से शौक रहा है। यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी है। अपने पिता कर्पूरचंद्र कुलिश (जिन्होंने राजस्थान पत्रिका समूह की नींव रखी। इसे फैलाया और आज यह पहचान दी) की मृत्यु के बाद कोठारी ने उन्हें भी भगवान का दर्जा देने के लिए पूरे एक वर्ष तक खुद और अन्य लोगों द्वारा कुलिशजी को महिमामंडित करने वाले भरपूर लेख छापे थे। इसके बाद खुद छपना शुरू हो गए। कोठारी देश के जिस किसी हिस्से में किसी भी कार्यक्रम में हों, उसकी फोटो सहित खबर पत्रिका के हर संस्करण में प्रमुखता से छपती ही है। इसके अलावा आए दिन छपने वाले उनके अग्रलेख (कहा जाता है कि ये वे खुद नहीं लिखते) ऐसे होते हैं, मानो उन्होंने जो लिखा है, उसे लोग वेद वाक्य की तरह स्वीकार करेंगे। गुलाबजी के इसी अतिरेकपूर्ण कवरेज और आलेखों की वजह से अब लोगों को अपच होने लगा है। दूसरी ओर, पत्रिका के भीतर बैठे चाटुकार उन्हें चने के झाड़ पर चढ़ाए रखने के लिए उन्हें अधिकाधिक ऐसे कर्म करने को उकसाते रहते हैं।

यही कारण है कि गुलाबजी ने पिछले दिसंबर में भोपाल में हुए किसान आंदोलन में पहुंचकर उसे शांत करने का श्रेय खुद लिया। शर्मनाक अंदाज में पूरा एक पेज गुलाबजी की माला पहनते हुए फोटो का तो छपा ही, फ्रंट पेज पर भी 'आप तो हमारे भगवान हैं' शीर्षक से खबर और फोटो भी छपी। राजस्थान में गुर्जर आंदोलन के दौरान वे आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे और पत्रिका में खबर छपी 'जीनियस हैं गुलाब कोठारी : कर्नल बैंसला'। इस तरह की कुछ बचपने और कुछ मूर्खतापूर्ण हरकतों से अब लोग उकताने भी लगे हैं। पत्रिका समूह के लोग भी अंदर ही अंदर ये कहते मिल जाते हैं, कि गुलाबजी अपने हाथों इतने बड़े अपने ही अखबार का सत्यानाश करने पर तुले हुए हैं लेकिन चमचों की फौज उन्हें सही -गलत का फर्क कभी नहीं बताती।

हाल ही पत्रकारों को निशाना बनाते हुए पत्रिका में छपा गुलाबजी का लेख भी संभवत: उन्होंने छपने से पहले खुद पढ़ा ही न हो, क्योंकि लिखने वाला तो कोई और होता है। आमतौर पर जब अखबारों के बारे में चर्चा चलती है तो लोगों के मुंह से एक ही बात निकलती है, ये गुलाब कोठारी तो भगवान बनने चल पड़ा है। इस लेख का उद्देश्य यही है कि गुलाब कोठारी को भगवान सद्बुद्धि दें और पत्रिका जैसे सम्मानित अखबार को बर्बाद होने से बचाएं।
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written by Harish Sharma, March 06, 2011
@scribe Well leave it , I know who takes the decisions...... The new generation of Nihar Kothari et. al knows nothing about journalism.
These guys (Bhuvnesh jain Govind Chaturvedi,H.P.Tiwari and Mr Kalia etc) are among the chief advisors of the company. They are not mere rubber stamps.
Mr.Bhuvnesh Jain and Mr.Govind Chaturvedi didn't raise any objection on " Dhristh bhi Bhrastha bhi", why? For sake of the job? What a shame...
Leave alone the property accumulated by them,we are not idiots,we know what's going on...
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written by Scribe, March 06, 2011
@ Harish : It's a misconception that Bhuvnesh Jain, Govind Chaturvedi and Rajiv Tiwari can take decisions on their own. Why these three, even HP Tiwari and Arvind Kalia cannot do that. All of them merely follow the directions of the management. Don't forget, at the end of the day they are mere employees and blaming them for decisions taken by the management is, in my opinion, not correct. They are simply protecting their jobs. I'am not advocating their cause, just stating a hard fact !!!
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written by Harish Sharma, March 04, 2011
@ scribe भुवनेश जैन अगर इतने ही अच्छे इंसान है तो इतनी प्रोपर्टी कहाँ से आई इसका हिसाब दे ? Damage claim करके millionaire बनने के सपने मत देखिये. द्रौपदी के अपमान के साक्षी सभी लोग सजा के पात्र थे , उसी तरह गुलाब कोठारी और भुवनेश जैन ही क्यूँ ,गोविन्द चतुर्वेदी और राजीव तिवारी भी हिसाब दे ?
सब पत्रकारों के शोषण के साक्षी है.
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written by kisi se naa kehna, March 04, 2011
संयोगिता जी की कविता शायद "गुलाब जी" के आस पास के काँटों को अधिक नुकीला कर दे या जिन पत्रकारों ने अपने अपने विचार दिए है तो इसका परिणाम "भड़ास" को पत्रिका संस्थान में प्रतिबंधित कर के किया जाना संभव ही था.जब गुलाब कोठारी अपनी अभिव्यक्ति स्वतंत्र मानते है तो फिर ये नाटक क्यों?वैसे भी पत्रिका के सम्पादकीय पर वाल्टेयर की उक्ति सदा स्थान पाती है:" हो सकता है की में आपके विचारों से सहमत ना हो पाऊ,पर विचार अभिव्यक्ति की आपकी स्वतंत्रता की रक्षा अवस्य करूँगा" तो क्या गुलाब जी का दिमाग इतना संकीर्ण है की वो अपने विरोध में हलकी सी बोछार सहन नहीं कर पाए? गुलाब जी आप वेड मर्मज्ञ है किन्तु वेदों के विपरीत जा रहे है? आपके संस्थान कर्मचारी हित की बात करते है लेकिन उस दिन को याद करें जब आप ही के कर्मचारियों ने हड़ताल की थी अपने अधिकारों के लिए तो आप मालिकों ने किस बेदर्दी से उन्हें "कुचला" था.भास्कर समूह के राजस्थान आगमन पर भी आपने किस तरह रोड़े अटकाए थे..क्या यही हैं आपकी स्वतंत्रता की रक्षा और वेड मर्मग्य पत्र्र्कार होने का सच...शर्म..शर्म
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written by baal brahmchaari, March 04, 2011
jee han..kothari ji ye bhi apne karchariyon
(patrkaron) se kahe ki press confrences me milne waale gift wo chhupaa kar kyu ghar le jaate hai.is baat ka pramaan shahar ke har patrkaar hai.
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written by Scribe, March 04, 2011
Why drag Bhuvnesh Jain into it ? Taking out your ire on someone who is merely an employee like others, is unwarranted, uncalled for and unjustified. Torts law is weak in our country otherwise Bhuvnesh Jain would be a millionaire by claiming damages alone !!!
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written by kulish, March 04, 2011
lagta hai gulab kothari ab 60 saal ke hua hain.
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written by SANYOGITA, March 04, 2011
JO THA KABHI GULAB...
AAJ KAR RAHA PRALAP...
VIGYAPAN,ZAMEENE SAB BATOR LI
PHIR KYO KAR RAHA HAI VILAP...

...HUM PATRAKARON KI DUNAIYA ME
MALIK BAN KAR AAYE TUM...
SATTA KI THALI ME TUMNE KHAYA
AB PATRAKAR KI ROTI PER HALLA MACHAYA

TAB KYO NAHI APNA DHARM NIBHAYA
JAB JALMAHAL,SUKHAM PER TUMNE JI LALCHAYA...

BUS UPDESH DETE RAHE HO ZINDAGI BHAR
KAHA HAI WO PATRAKARON KA " MILAP"

JO THA KABHI EK GULAB
AAJ KAR RAHA PRALAP...!!
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written by SANYOGITA, March 04, 2011
JO THA KABHI GULAB...
AAJ KAR RAHA PRALAP...
VIGYAPAN,ZAMEENE SAB BATOR LI
PHIR KYO KAR RAHA HAI VILAP...

...HUM PATRAKARON KI DUNAIYA ME
MALIK BAN KAR AAYE TUM...
SATTA KI THALI ME TUMNE KHAYA
AB PATRAKAR KI ROTI PER HALLA MACHAYA

TAB KYO NAHI APNA DHARM NIBHAYA
JAB JALMAHAL,SUKHAM PER TUMNE JI LALCHAYA...

BUS UPDESH DETE RAHE HO ZINDAGI BHAR
KAHA HAI WO PATRAKARON KA " MILAP"

JO THA KABHI EK GULAB
AAJ KAR RAHA PRALAP...!!
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written by vd, March 03, 2011
gulab ji...jis thali main khate hai, usme ched nahi karte. aapni patrakar kom ko apmanit kiya hai...issse pehle apne gireban main jank kar dekhe. kulish ji ke bad kaise aapne patrika par hak jamaya aur kaise sarkar se vasuli ki kissi se chupa hua nahi hai. aapke akhbar ke jodpur ke sampadak daulat singh ji ko to CM ne sare aam balsamand resort main badnaam kar aukat dikhadi thi...ab aap kaunsi netikta ki baat kar rahe ho?
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written by raju, March 03, 2011
gulab kothari ne sach likha to sabko mirchi lag gayi, ab vo apki najar me pagla gaya hai, kya vastav me press chotha stambh hai, kisne banaya isko chotha stambh, galiyo me nikalne wale akhbar chhapte chahe 100 hi ho unki circulation dikhai jati hai 1 lac, kya ye chori nahi, patrakar ka kam chor ki chori ujagar karna hai, chori karna nahi, sachhai sawikar karo bhaiyo
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written by sanyogitakumari, March 03, 2011
JO THA KABHI GULAB...
AAJ KAR RAHA PRALAP...
VIGYAPAN,ZAMEENE SAB BATOR LI
PHIR KYO KAR RAHA HAI VILAP...

HUM PATRAKARON KI DUNAIYA ME
MALIK BAN KAR AAYE TUM...
SATTA KI THALI ME TUMNE KHAYA
AB PATRAKAR KI ROTI PER HALLA MACHAYA

TAB KYO NAHI APNA DHARM NIBHAYA
JAB JALMAHAL,SUKHAM PER TUMNE JI LALCHAYA...

BUS UPDESH DETE RAHE HO ZINDAGI BHAR
KAHA HAI WO PATRAKARON KA " MILAP"

JO THA KABHI EK GULAB
AAJ KAR RAHA PRALAP...!!
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written by sanyogitakumari, March 03, 2011
JO THA KABHI GULAB...
AAJ KAR RAHA PRALAP...
VIGYAPAN,ZAMEENE SAB BATOR LI
PHIR KYO KAR RAHA HAI VILAP...

HUM PATRAKARON KI DUNAIYA ME
MALIK BAN KAR AAYE TUM...
SATTA KI THALI ME TUMNE KHAYA
AB PATRAKAR KI ROTI PER HALLA MACHAYA

TAB KYO NAHI APNA DHARM NIBHAYA
JAB JALMAHAL,SUKHAM PER TUMNE JI LALCHAYA...

BUS UPDESH DETE RAHE HO ZINDAGI BHAR
KAHA HAI WO PATRAKARON KA " MILAP"

JO THA KABHI EK GULAB
AAJ KAR RAHA PRALAP...!!
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written by sanyogitakumari, March 03, 2011
JO THA KABHI GULAB...
AAJ KAR RAHA PRALAP...
VIGYAPAN,ZAMEENE SAB BATOR LI
PHIR KYO KAR RAHA HAI VILAP...

HUM PATRAKARON KI DUNAIYA ME
MALIK BAN KAR AAYE TUM...
SATTA KI THALI ME TUMNE KHAYA
AB PATRAKAR KI ROTI PER HALLA MACHAYA

TAB KYO NAHI APNA DHARM NIBHAYA
JAB JALMAHAL,SUKHAM PER TUMNE JI LALCHAYA...

BUS UPDESH DETE RAHE HO ZINDAGI BHAR
KAHA HAI WO PATRAKARON KA " MILAP"

JO THA KABHI EK GULAB
AAJ KAR RAHA PRALAP...!!
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written by Subhashchander Gupta, March 03, 2011
ye pagal ho gaya yaar.......
Khoob Bhaalooooooo
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written by mukesh sundesha, March 03, 2011
क्या यह नोटंकी भाजपा शाशन में राज्य सभा में जाने की तो नहीं है ?
आदरणीय गुलाब जी कोठारी
आपके, एक लेख से पुरे राजस्थान में ही नहीं अन्य प्रदेशों में आपका असली चेहरा बेनकाब हो गया है ..यह सर्व विधित है की राजस्थान में भाजपा शाशन में सभी अखबारों को दर किनार कर आपने जो जमीनों और विज्ञापनों में अरबो रूपए की खुली लुट मचाई थी वो लुट रूपी मलाई कोंग्रेश शाशन में अब आपको मिल नहीं रही है ? इससे बोखलाकर आप अपना आप खो बेठे है इसलिए अब आप उल जलूल बाते कर अपने दिमाग को विखरथ कर बेटे है ...आप अगर सोचते है की ऐसी बयांनबाजी कर यदि आप राज्य सभा में जाने के सपने देख रहे है तो आप यह नाकाम कोशिश करने का सपना निकल दे ..........क्या यह बात आप नहीं जानते की केशरगढ़ जैसी करोडो की जमीन आपने जनता पार्टी के शाशन में कोडियो के भाव नहीं हथयाई.......आप आज मीडिया में आदर्श्ता की बात करते हो जब आपका मतलब शिद्ध नहीं हो रहा है
और एक बात खास.............
आपने, आपके लेख में जो अख़बार वालो को जो भिखारी शब्द कहकर ओची मानशिकता का परिचय दिया है वो तो आपके इस लेख से मालूम होता है की सबसे बड़ा भिखारी कोन है और वो क्या चाहता है ?
हम अख़बार वाले तो आज भी जैसे तैसे भी अपना ईमान जिन्दा रख रहे है पर आप अपने गिरेबान में जाके ...........और रही बात आपके सपने की तो हम अखबार वालो की इस लेख के बाद बदुआ है आपके सपने परम पिता परमेश्वर कभी साकार नहीं करे और रही बात मन में राज्य सभा में जाने की तो वो कभी पूरी नहीं होगी .........
मुकेश सुन्देशा
प्रकाशक
दैनिक समाचार पत्र , राजस्थान
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written by gopal, March 03, 2011
is ko kahaty hi chu-----yapa
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written by govind goyal, March 03, 2011
reaction nahi action hona chahiye.
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written by govind goyal, March 03, 2011
reaction nahi action bhee hona chahiye.
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written by r.k. singh, March 03, 2011

नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज पर जाने की कहावत को अब गुलाब कोठारी चरितार्थ कर रहे हैं। साइकिल पर घूम-घूमकर अखबार बांटने वाले कर्पूरचन्द्र कुलिश अचानक मीडिया मुगल कैसे बन गए, यह किसी से छिपा नहीं है। राजस्थान पत्रिका का जेएलएन मार्ग स्थित मुख्यालय केसरगढ़ इन्होंने किस तरह हथियाया है, आमेर रोड पर जलमहल की पाल पर बने पार्क के साथ ही झालाना स्थित कार्यालय के नजदीक करीब तीन बीघा के प्लॉट पर किस तरह कब्जा किए हुए हैं, यह आम जन को मालूम है, तो फिर कोठारी साहब किस भ्रष्टता और धृष्टता की बात करते हैं। बात रही पैसे लेकर खबरें छापने की, तो पूछिए अपने भुवनेश जैन से कि जगतपुरा में तीन करोड़ रुपए का मकान उसने कैसे खरीद लिया, अपनी बेटी को आईसीजी में फ्री कैसे पढ़वा रहा है। सामाजिक सरोकारों का दंभ भरने वाले पत्रिका समूह में एक आम आदमी अपनी खबर लगवाने के लिए किस तरह घूसखोरी का शिकार हो रहा है, क्या उसके प्रति कोठारी साहब ने अपनी आंखों पर पट्टी बंधवा रखी है। बातें करते हैं भ्रष्टता की। रात दिन अपनी जान जोखिम और घर-परिवार से दूर रहकर अपने पेशे के प्रति ईमानदारी बरतने वाले पत्रकारों को वेतन आयोग के जरिए सैलेरी बढ़ाने की बात आ रही है, तो कोठारीजी उन्हें बेईमान, भ्रष्ट, सरकारी सुविधाओं का अनुचित लाभ लेने वाले और संस्थान के प्रति गद्दार जैसी गालियां देने में लगे हैं। तो आखिर आप बताएं कि इतने सालों में खुद कोठारी परिवार ने किया क्या है, जो दूसरों पर कीचड़ उछाल रहे हों। कोठारी साहब हर सप्ताह सारगर्भित लेखों के जरिए नई पीढ़ी को उपदेश देने से अच्छा है कि अपने गिरेबां में झांकें और दूसरों पर पत्थर नहीं फेंके, क्योंकि आपका घर भी शीशे का ही बना है।

- आर.के. सिंह, जयपुर वाणी
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written by Sachin, March 02, 2011
ulta choor kotwaal ko dante.
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written by Sachin, March 02, 2011
ulta choor kotwaal ko dante. kothari ji doosro par oongle utha ne se pahle apne girebaan me bhi dekh lo, tum bhi koi doodh ke dhoole nahi ho. saala aaya he doosro ko bhrash batane wala, kameena tune rajasthan me kya kiya apne reportero ke saath kuch pata he ?
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written by sanyogitakumari, March 02, 2011
YE GULAB PAGLA GAYA HAI

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