चौहान की तिजोरी ने खरीद लिया अश्‍वनी कुमार का ईमान!

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नेताओं के बारे में कहा जाता है कि ये ईमान का सौदा करने में देर नहीं लगाते हैं, पर कम पत्रकार भी नहीं हैं। हम बात कर रहे हैं पंजाब केसरी के नेता टाइप संपादक अश्विनी चोपड़ा की। कहा जाता है कि जब तक जनाब खुदारी, ईमानदारी और राष्‍ट्रभक्ति के जुमलों से भरा संपादकीय न लिख लें, तब तक उनको रात का खाना हजम नहीं होता है। बात-बेबात शहीदों के परिवार से होने का दम भरते रहते हैं, लेकिन कलम का कोई खरीदार मिल जाए तो एक मिनट नहीं लगाते बिकने में। वे अभी ताजा-ताजा दिल्ली सरकार के लोक निर्माण मंत्री राजकुमार चौहान के हाथों बिके हैं।

जैसा सभी को मालूम है दिल्ली के लोकायुक्त ने चौहान को टैक्स चोरों की हिमायत का दोषी पाते हुए राष्‍ट्रपति से उनको बर्खास्त करने की सिफारिश की है। दिल्ली के सभी अखबार 25 फरवरी से इस मामले में पन्ने काले कर रहे हैं, लेकिन पंजाब केसरी घटनाक्रम से जुड़ी खबरों की पूरी तरह अनदेखी कर रहा है। 3 मार्च बृहस्पतिवार को दिल्ली के सभी हिन्दी और अंग्रेजी अखबारों ने पहले पन्ने तथा अंदर के पन्नों पर चौहान को लेकर सोनिया के घर पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की पेशी पर बड़ी-बड़ी खबरें दी है, लेकिन पंजाब केसरी ने एक भी शब्द लिखने की जहमत नहीं उठाई। यह दूसरी बार हुआ है। 25 फरवरी को लोकायुक्त की सिफारिश की खबर को सभी अखबारों ने पहले पन्ने पर छापा था, लेकिन पंजाब केसरी के संपादक तो मोल-भाव की तराजू में अपना जमीर तुलवा चुके थे।

इस पूरे मामले में पंजाब केसरी दिल्ली के पत्रकारों का बुरा हाल हो रहा है। जब मालिक ही बिक जाए तो हमारी क्या औकात। जी हां पंजाब केसरी दिल्ली के पत्रकार आजकल कुछ इसी तरह की बातें कहकर अन्य अखबारों के साथी पत्रकारों से पीछा छुड़ा रहे हैं। कहते हैं कि जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो चारा का क्या होगा। पहले कहा जाता था कि पंजाब केसरी के किसी संवाददाता को एक गांधी छाप नोट दो और 2-3 कॉलम की खबर छपवा लो, पर आजकल यहां मामला बदल गया है। अब यह काम संपादक अश्विनी कुमार चोपड़ा यानी मिन्ना साहब ने संभाल लिया है। चर्चा है कि दिल्ली सरकार के लोक निर्माण मंत्री राजकुमार चौहान के साथ अपनी कलम का सौदा कर मिन्ना जी ने बड़ा हाथ मारा है।

10 वीं क्लास तक पढे़ चौहान को मिन्ना ने समझाया है कि जब तक पंजाब केसरी में खबर नहीं छपेगी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तुम्हारा इस्तीफा लेने की हिमाकत नहीं कर सकेंगी। कम पढ़े लिखे चौहान को भी यह बात समझ में आ गई और कर बैठे मिन्ना से सौदा। अब चौहान को कौन समझाए कि अगर कबूतर आखें बंद कर ले तो बिल्ली उसकी जान थोड़े ही बख्शती है। भैया अगर तुम्हारी कुर्सी पिछवाड़े से खिसकनी होगी तो पंजाब केसरी की क्या औकात है। वैसे भी दिल्ली में पंजाब केसरी अब नाई की दुकानों पर भी नहीं पढ़ा जाता है और दिल्ली के तमाम अखबार तो खबर छाप कर कॉमनवेल्थ खेलों के भ्रष्टाचारी मंत्री चौहान की पोल-पट्टी खोल-बता ही रहे हैं कि चौहान कैसे टिवोली रिसोर्ट के टैक्स चोर मालिक की मदद में वैट कमिश्नर से भिड़ गए थे।

वैसे कुछ दिन पहले दैनिक जागरण ने खबर दी थी कि चौहान की तरफदारी के लिए एक जमाने में सलमान खान की हीरोइन रह चुकी तथा फिलहाल कांग्रेस की नेता बनने के जुगाड़ में लगी एक अभिनेत्री ने कांग्रेस के कई आला नेताओं के यहां भागदौड़ की थी। बताया जाता है कि हिन्दी फिल्मों में असफल रहने के बाद भोजपुरी फिल्मों में काम कर चुकी इस अभिनेत्री के साथ मिन्ना साहब की भी गहरी छनती है। अब सारी बातें बताने की नहीं होती ....कुछ आप लोग भी दिमाग के घोडे दौड़ा लो।

अशोक शर्मा

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