गांडीव प्रबंधन और कर्मचारियों में किचकिच जारी

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: मंगलवार को फिर होंगे दोनों पक्ष आमने-सामने : वाराणसी से प्रकाशित सांध्य दैनिक गांडीव के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच जिच जारी है। शनिवार को कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। गांडीव प्रबंधन ने बताया कि अखबार का ग्रेड सात से आठ हो गया है, इससे जाहिर है कि उसके पास राजस्व कम होता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि गांडीव का पिछला जो ग्रेड था उसका बेसिक ग्रेड आठ में जाने के बावजूद बना रहना चाहिए फिर कतिपय कर्मचारियों की सैलरी एक से लेकर डेढ़ हजार रुपये कम कैसे हो जा रही है।

उनका कहना है कि जब अखबारों का ग्रेड बदलता है तो फिटमेंट की शर्तों को परख लेना चाहिए। सैलरी कम होने का तो सवाल ही नहीं है। कतिपय कर्मचारी नौकरी की पूरे समय तक गारंटी चाहते हैं। प्रबंधन का मूड देखकर तो ऐसा ही लग रहा है वह कर्मचारियों की नौकरी की गारंटी देने के मूड में नहीं है। अगर किसी दबाव में उसने लिखकर ऐसा दे भी दिया तो अगले दो-तीन माह में ही समझौता निरस्त करके सबसे पहले नेता टाइप कर्मचारियों को निकाल बाहर करने के मूड में है। इस जिच के चलते ही कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हो पा रहा है।

शनिवार को समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अजय मुखर्जी, काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश गुप्त पप्पू आदि की मौजूदगी में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच समझौता वार्ता शुरू हुई। अंतरिम सन 2008 से कर्मचारी मांग रहे हैं जबकि काफी मेहनत मशक्कत के बाद प्रबंधन नवंबर 2010 से इसे देने को राजी हो रहा है। जिच का दूसरा और बड़ा कारण यह भी है। कर्मचारी नेता अजय मुखर्जी से एक बार तो संपादक राजीव अरोड़ा की भिड़ंत भी हो गयी। कई लोगों ने पहली बार राजीव अरोड़ा को ऊंचे स्वर में बात करते सुना। उन्हें टोका भी।

दरअसल जो सेलरी स्ट्रक्चर गांडीव के प्रबंधन ने कर्मचारी नेताओं को दिखाई उसमें तमाम गड़बड़ियां थीं जिन्हें स्वीकार करना किसी के लिए भी संभव नहीं है। इसे लेकर कर्मचारी नेताओं और प्रबंधन के बीच काफी किचकिच हुई। तय हुआ कि अब आगामी मंगलवार को पुनः समझौता बातचीत होगी। कर्मचारियों को भय है कि एक बार समझौते पर कर्मचारी-प्रबंधन दस्तखत हो गया तो कई नेता टाइप कर्मचारियों की छुट्टी होनी तय है। इस नाते कर्मचारी भी काफी फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं। साभार : पूर्वांचलदीप


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