''पत्रिका, जबलपुर ने सर झुकने से बचा लिया''

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यशवंत जी नमस्कार. पत्रिका का विरोध अपनी जगह है पर शुक्रवार को पत्रिका ने जबलपुर में इतिहास रच दिया. जहाँ सब अख़बारों ने पैसे लेकर कांग्रेस विधायक के काले कारनामे नहीं छापे या छोटा छापा, उसमें भी विधायक और उसके भाई का नाम नहीं छापा. वहीं पत्रिका के संपादक ने एक बार में ही पूरी काली कहानी लिख दी.

जबलपुर के हर आम आदमी की जुबान पर सिर्फ एक ही बात निकल रही थी कि पत्रिका ने अब तक किसी को नहीं छोड़ा चाहे दादा हो या दबंग विधायक या फिर मेडिकल सेक्स स्कैंडल, किसी भी चीज में पीछे नहीं रहा है पत्रिका.

भास्कर जो सबसे आगे बना रहने का दावा करता है असल में विज्ञप्तियों को छापकर काम चलाता है. उसके फोटोग्राफर हों या रिपोर्टर, बस अपनी दुकान चलाने से मतलब रखते हैं. हम गर्व से सीना ऊँचा करके कह सकते हैं कि पत्रिका जबलपुर ने सर झुकने से बचा लिया. हम भले ही अलग अलग प्रेस में काम करते हों पर ख़बरों में दम सिद्धार्थ भट्ट जी के कारण है और वहां के लोग काम पर ध्यान देते है.

हकीक़त जानने के लिए जरूर पढ़े-

http://epaper.patrika.com/final/english.php?edition=Jabalpur

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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