कटने लगा अमर उजाला के वरिष्‍ठ पत्रकारों का पीएफ

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अजयवाराणसी अमर उजाला से खबर आ रही है कि यहां के सीनियर रिपोर्टर/वरिष्ठ उप संपादकों सहित इनके ऊपर के सभी कर्मचारियों का पीएफ कटने लगा है। सुना जा रहा है कि दिसंबर 2010 से पीएफ की यह सुविधा दी जाने लगी है। कुछ साल पहले तक अमर उजाला अपने सीनियरों के पीएफ काटा करता था, पर इधर कुछ दिनों से इसे काटना बंद कर दिया था और इसकी जगह पीएफ एलाउंस दिया करता था।

वाराणसी पीएफ के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इस बाबत क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त शिशिर कांत झा ने साफ कहा था कि वे बीते दिनों पड़े पीएफ छापे (फिजिकल वेरिफिकेशन) के बाद ‘अमर उजाला’ के स्पष्टीकरण से कतई संतुष्ट नहीं हैं। श्री झा ने श्रमिक संगठनों के नेताओं को बीते दिनों बताया था कि बीते दिनों फिजिकल वेरिफिकेशन के तहत ‘अमर उजाला’ में छापा डाला गया था और पता चला कि सीनियर उप संपादक से ऊपर के लोगों का पीएफ नहीं काटा जा रहा है। अमर उजाला ने जो भी स्पष्टीकरण दिया उन्हें श्री झा ने अमान्य कर दिया और कहा कि मैं इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं। अमर उजाला का कहना था कि उनके सीनियर सब एडिटर लेवल के कर्मचारियों का पीएफ न काटकर उन्हें पीएफ एलाउंस भर दिया जाता है, क्योंकि नियमतः साढ़े छह हजार रुपये का मासिक वेतन पाने वालों का ही पीएफ काटने का विधान है। इस पर पीएफ आयुक्त ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है और सभी का पीएफ काटना ही होगा। आप मुझे संतुष्ट कीजिए।

ज्ञात हो कि बीते दिनों पीएफ कमिश्नर से मिलकर अखबार कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त पप्पू और समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के सचिव दादा अजय मुखर्जी ने अखबारों में पीएफ मामले में हो रहे शोषण को पुरजोर तरीके से उठाया था। इन लोगों ने मांग की थी कि सभी अखबारों के कर्मचारियों की जो सूचियां यूनियनों ने मुहैया कराईं हैं उनपर और संजीदगी और सूक्ष्मता से जांच कर आगे की कार्रवाई की जाय, ताकि एक भी कर्मचारी पीएफ पाने से वंचित न रह जाए। इसके बाद आधे दर्जन समाचार पत्र प्रतिष्ठानों पर पीएफ टीम ने छापे डाले थे और भारी गड़बड़ियां पकड़ी थीं। बाद में अमर उजाला ने बताया कि पीएफ एलाउंस दिया जाता है, जिसे पीएफ कार्यालय ने अमान्य कर दिया और कहा कि समाचार पत्र कर्मियों के हक में पीएफ काटना अनिवार्य है। पीएफ एलाउंस देने का कोई विधान नहीं है।

दादा अजय मुखर्जी ने बताया कि अमर उजाला ने पीएफ कार्यालय के दबाव में दिसंबर 2010 से पीएफ काटना शुरु कर दिया है। पीएफ कार्यालय ने अमर उजाला का गला नहीं छोड़ा है। उसने पीएफ बरेली आफिस को भी इस बाबत चिट्ठी दी है ताकि पता चले कि पीएफ कट रहा है या नहीं और कट भी रहा है तो कब से। वाराणसी अमर उजाला का पीएफ बरेली से कटता है। यही नहीं वाराणसी पीएफ कार्यालय ने कानपुर पीएफ कार्यालय को भी चिट्ठी भेज रखी है ताकि अमर उजाला कोई घालमेल न कर सके। वाराणसी पीएफ कार्यालय ने अब और कड़ा रूख अपनाते हुए कहा है कि जिस दिन से कर्मचारियों का पीएफ काटना बंद किया गया था उस दिन से पुनः पीएफ काटा जाए और पीएफ कार्यालय को संतुष्ट किया जाए। अमर उजाला प्रबंधन की नकेल कसने के लिए उसने दिनवार ब्योरा भी तलब किया है। इससे अमर उजाला प्रबंधन की हवा सरकने लगी है। अगर पूरे अमर उजाला ग्रुप में बीते कई सालों का पीएफ हजारों कर्मचारियों का काटना पड़ेगा तो बैंक लोन के बल पर तनख्वाह बांटने वाले अमर उजाला की तो उट्ठी बोल जाएगी, ऐसा श्रमिक सूत्र बता रहे हैं।

बनारस से अजय कृष्‍ण त्रिपाठी की‍ रिपोर्ट.


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