ट्रिब्‍यून प्रबंधन ने छह कर्मचारियों को दिया नोटिस

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ट्रिब्‍यून में मामला अभी शांत नहीं हुआ है. प्रबंधन ने मैनेजर कर्नल काहलो से दुर्व्‍यहार करने वाले छह और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. इन लोगों से पूछा गया है कि क्‍यों न आपलोगों को खराब व्‍यवहार के चलते निलंबित कर दिया जाय. खबर है कि प्रबंधन अभी और कई लोगों को नोटिस दे सकता है. निलंबित हुए लोग भी प्रबंधन से टक्‍कर लेने की कोशिशों में लग गए हैं.

आज जिन छह लोगों को नोटिस जारी किया गया है, इन पर आरोप है कि ये लोग भी कर्नल काहलो से बदतमीजी की थी. प्रबंधन कार्यालय में लगे सीसी टीवी कमरे की फुटेज देखकर पहचान कर रहा है. बताया जाता है कि कुछ लोगों ने सीसी टीवी पर कपड़ा डालकर उसकी रिकार्डिंग रोक दी थी, परन्‍तु उसके पहले का पूरा रिकार्ड प्रबंधन के पास मौजूद है. इसके बाद ही प्रबंधन ने यह चार्जशीट यानी नोटिस दिया है.

जिनलोगों को नोटिस दिया गया है उनके नाम हैं - अजय गुप्‍ता, घनश्‍याम पाण्‍डेय, आशुतोष कुमार, कमल कुमार, अमरजीत सिंह और रामकिशन. सूत्रों का कहना है कि फुटेज में शामिल कुछ और लोगों को नोटिस दिया जा सकता है. प्रबंधन सभी को चिन्हित करने की कोशिश कर रहा है. यानी निकट भविष्‍य में कुछ और लोग ट्रिब्‍यून से बाहर किए जा सकते हैं. खबर है कि साथ में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने भी प्रबंधन को दुर्व्‍यवहार करने वाले अपने साथियों के नाम बताए हैं.

दूसरी तरफ निलंबित कर्मचारी भी पूरी तरह कम कस चुके हैं. कर्मचारियों का एक दल इस मामले में हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिला. उन्‍हें सारी बात बताई. पर सीएम हुड्डा ने इसे ट्रिब्‍यून का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार का हस्‍तक्षेप करने से इनकार कर दिया. उन्‍होंने कहा कि यह सरकारी मसला नहीं बल्कि ट्रस्‍ट का मामला है, इसे वहीं सुलझाया जा सकता है. यह सरकार का नहीं बल्कि कानून-व्‍यवस्‍था का मामला है.

कर्मचारी पंजाब के मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी मुलाकात की. बादल से इनलोगों की मुलाकात राजीव कपलिस के रिश्‍तेदार और सरकारी मैगजीन के एडिटर इन चीफ एएस पराशर के मार्फत हुई. बताया जा रहा है कि पराशर भी ट्रिब्‍यून में काम कर चुके हैं. प्रकाश सिंह बादल ने सीधे तो कुछ नहीं कहा लेकिन उन्‍होंने इस मामले को देखने का आश्‍वासन जरूर दिया है. जिससे इन लोगों में उम्‍मीद जगी है.

निलंबित कर्मचारियों के समक्ष सबसे बड़ी दिक्‍कत समर्थन की आ रही है. ट्रिब्‍यून के ज्‍यादातर कर्मचारी इनका समर्थन करने से कतरा रहे हैं. अभी तक राज्‍य की दूसरी प्रेस यूनियन या कर्मचारी यूनियनों ने इनके पक्ष में एकता नहीं दिखाया है. किसी भी संस्‍था या पत्रकार ने इन निलंबित कर्मचारियों के पक्ष में बयान जारी नहीं किया है, जिससे इन लोगों के सामने परेशानी बढ़ गई है. दूसरी तरफ प्रबंधन इन लोगों की एकता तोड़ने की कोशिश कर रहा है.


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