'समागम' को मिला शोध पत्रिका का दर्जा

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भोपाल। विगत दस सालों से निरंतर प्रकाशित हो रही मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम अब मीडिया और सिनेमा की शोध पत्रिका के रूप में प्रकाशित होगा। समागम का पंजीयन शोध पत्रिका के रूप में हो चुका है। मार्च 2011 का अंक शोध पत्रिका के रूप में आया है। समागम के इस नये अंक में पांच अलग अलग शोध पत्रों का प्रकाशन किया गया है। मीडिया और सिनेमा शोध पत्रिका के रूप में प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका संभवतः अपनी तरह की इकलौती पत्रिका है।

इस आशय की जानकारी समागम के सम्पादक मनोज कुमार ने दी। पत्रिका समागम के बारे में वे बताते हैं कि मीडिया में शोध और अनुसंधान खूब हो रहे हैं किन्तु इन पर शोध पत्रिकाओं की कमी है। कोशिश होगी कि समूची दुनिया में हो रहे शोध अनुसंधान को प्रकाशित किया जाए ताकि पत्रकारिता की नयी पीढ़ी को इससे लाभ हो सके।

शोध पत्रिका समागम का मार्च 2011 का अंक मीडिया कैनवास पर महिलाओं पर केन्द्रित है। पत्रिका का पूर्व का हर अंक किसी खास मुद्दे को केन्द्र में रखकर प्रकाशित किया गया है। मीडिया पर गंभीर किस्म की सामग्री को पत्रिका में प्रकाशित किया जा रहा है। इस पत्रिका का टारगेट आडियेंस पत्रकारिता के विद्यार्थी एवं स्कॉलर हैं। सम्पादक का यह भी  कहना है कि पत्रिका में मीडिया एवं सिनेमा पर हो रहे शोध को प्रमुखता दी जाएगी, किन्तु दूसरे विषयों पर हो रहे प्रामाणिक एवं सारगर्भित शोधपरक प्रकाशन सामग्री के लिये भी पत्रिका में स्वागत है।

अप्रैल का महीना पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, माधवराव सप्रे एवं राजेन्द्र माथुर के नाम है। ये लोग अपने समय के चर्चित सम्पादक रहे हैं किन्तु आज के दौर में सम्पादक की स्थिति नहीं के बराबर है। सम्पादक का स्थान मैनेजर ने ले लिया है। आज के दौर के इस सामयिक विषय पर समागम का केन्द्रीय सब्जेक्ट होगा। प्रेस विज्ञप्ति


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