जमशेदपुर में हिन्दुस्तान ने इतिहास रचा, दैनिक जागरण को पछाड़ा

E-mail Print PDF

झारखंड की औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर में हिन्दुस्तान ने इतिहास रच दिया है। इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस क्यू-4-2010) की रिपोर्ट में इस अखबार को दूसरे बड़े अखबार का ताज मिला है। इस संबंध में समाचार पत्र में प्रमुखता से खबर छपी है। खबर में यह बताया गया है कि हिन्दुस्तान ने यह ताज अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी दैनिक जागरण से छीना है।

यह बेहतर संपादकीय टीम के कौशल का ही नतीजा है कि कभी निचले पायदान पर रहे इस अखबार को टाटा में पाठकों ने सिर आंखों पर बिठाया है। इसका पूरा श्रेय संपादकीय टीम को विशेष रूप से दिया जा रहा है। दरअसल, हिन्दुस्तान ने लांचिंग के आठ वर्ष पूरे होने के दौरान छह संपादक बदल डाले, लेकिन अखबारों की लड़ाई में वह आखिरी पायदान से उपर नहीं उठ सका। बताया जा रहा है कि सातवें संपादक के रूप में  यहां ज्वाइन किए गीतेश्वर ने जो मजबूत संपादकीय टीम बनाई और उसमें जीत का जज्बा भरा, यह श्रेय उसी टीम के समर्पण और निष्ठापूर्ण काम को जा रहा है। इससे पहले शहर में संपादकीय टीम की छवि बिगड़ी हुई थी। साल भर में उसमें आमूलचूल परिवर्तन हुआ है।

हिन्दुस्तान ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर बुद्धिजीवियों के बीच चर्चा कराकर उसके समाधान प्रस्तुत करने की अनोखी परंपरा कायम की है। अन्य अखबार भी इसका अनुसरण कर रहे हैं। हालांकि हिन्दुस्तान के हायर मैनेजमेंट विशेष तौर पर प्रधान संपादक शशि शेखर और सीईओ अमित चोपड़ा ने जमशेदपुर को अपने कोर लिस्ट में शामिल किया था। अखबार का दूसरे नंबर पर आना उनके लिए भी कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। अब आनेवाले समय में धनबाद में भास्कर से लड़ाई  झारखंड में हिन्दुस्तान की दशा और दिशा तय करेगा।


AddThis