हिन्दुस्तान का यह कैसा स्टिंग?

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हिन्दुस्तान, आगरा ने अपने 16 मार्च के अंक में हिन्दुस्तान स्टिंग लोगो लगाते हुए पेज-एक पर एक खबर छापी है। इसका शीर्षक है- बिक रही हैं बोर्ड की कॉपियां। स्टिंग है तो जाहिर है कि बाईलाइन खबर होनी चाहिए सो नासिर हुसैन का नाम दिया गया है। मिढ़ाकुर पेट्रोल पंप के पास कॉपियां बेचने आए एक कर्मचारी का फोटो भी है। यह खबर अपने आप में बड़ा धमाका है।

परन्‍तु 16 मार्च के अन्य अखबारों पर नजर डालें तो यह खबर आगरा के सभी अखबारों में है। दैनिक जागरण ने यही खबर पेज-तीन पर टॉप स्टोरी के रूप में छापी है। इसका शीर्षक है- चौराहे पर बिक रही थीं बोर्ड कॉपियां। बीट लाइन के रूप में जागरण संवाददाता लिखा हुआ है। अमर उजाला में भी यह खबर है लेकिन प्लेसमेंट ठीक से नहीं किया गया है। आगरा के अन्य अखबारों में भी यह खबर खूब हाईलाइट की गई है।

यहां सवाल यह है कि हिन्दुस्तान से आखिर किस तरह का स्टिंग किया था, जो आगरा के सभी अखबार वालों को पता चला गया और सबने खबर जस की तस प्रसारित कर दी। यह खबर आगरा के लोकल न्यूज चैनलों ने भी दिखाई। बेशर्मी की हद तो ये है कि 17 मार्च के अंक में हिन्दुस्तान ने अपने स्टिंग का असर भी दिखा दिया। कम से कम अगले दिन तो हिन्दुस्तान को सावधान हो जाना चाहिए था।

हिन्दुस्तान स्टिंग करने वाले रिपोर्टर अब सफाई देते फिर रहे हैं कि किसी डेस्क वाले ने या साथी रिपोर्टर ने खबर लीक कर दी। अगर ऐसा है तो बड़ी गंभीर बात है। तो क्या हिन्दुस्तान में लोग दूसरे अखबारों के लिए भी काम कर रहे हैं। सवाल ये है कि कोई बताता भी तो किसी एक अखबार को। सारे अखबारों के लिए खबर बता पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है।

जानकारों का कहना है कि रिपोर्टर अपने बचाव के लिए डेस्क वालों के सिर पर घड़ा फोड़ रहा है। हिन्दुस्तान आगरा का बिगड़ा हुआ ढांचा है। इसे सुधारने में समय लगेगा। नए संपादक केके उपाध्याय से कुछ आशा है कि हिन्दुस्तान आगरा के बिगड़ैल लोगों पर लगाम लगा सकेंगे।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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