पत्रकारों को मुहैया कराई जाएगी संसद की कार्यवाही की रिपोर्ट

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‘‘केंद्र सरकार संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही की रिपोर्ट प्रतिदिन मीडिया को रीलीज करने पर विचार कर रही है ताकि मीडिया संसद की कार्यवाही को बेहतर तरीके से प्रकाशित या प्रसारित कर सके।’’ यह बात राज्यसभा के उप-सभापति के.रहमान खान ने दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की वार्षिक स्मारिका के विमोचन के अवसर पर कही।

इस अवसर पर राज्यसभा के उप सभापति के. रहमान खान ने पत्रकारिता में आई गिरावट पर गंभीर चिंता भी व्यक्त की है। उन्होंने कहा, ‘‘हम गंभीर पत्रकारिता के बारे में बात करें या सूचनात्मक पत्रकारिता की बात करें, आज की पत्रकारिता में इन दोनों का कोई प्रचलन नहीं है।’’

‘नए युग की पत्रकारिता’ विषय पर दिल्ली पत्रकार संघ (डीजेए) की वार्षिक स्मारिका का विमोचन करते हुए रहमान खान ने कहा, ‘पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है इसलिए उन्हें समाज में जिम्मेदार भूमिका निभाने की जरूरत हैं। वे पाठकों के दिमाग और मन को अपनी रचनात्मक खबरों से एक दिशा दे सकते है इसलिए उन्हें समझदारी से कार्य करना चाहिए और समाज में रचनात्मक योगदान देना चाहिए।

श्री खान ने कहा, ‘संसद में होने वाले हंगामों को चैनल सनसनीखेज बना रहे हैं जो समाज को नुकसान पहुँचाने से ज्यादा और कुछ भी नहीं है। होने वाले हंगामों को सनसनीखेज बनाने से ज्यादा अच्छा है कि वह कार्यवाहियों को भी समाज के समक्ष उजागर करे। उन्होंने कहा कि विधायिकाओं के साथ ही साथ मीडिया को देश में विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्त्व को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।

स्मारिका का विमोचन श्री रहमान ने अपने आवास 28, अकबर रोड पर ही एक समारोह में किया। अवसर पर नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के राष्ट्रीय महासचिव श्री रासबिहारी और दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अनूप भटनागर, उषा पहवा, प्रमोद कुमार सैनी, अशोक प्रियदर्शी, ख़ालिद अनवर, जमुना राम कुंदन और स्मारिका के सम्पादक प्रवीण कुमार सिंह समेत अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

राज्य सभा के उप सभापति के रूप में अपने अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘आज कोई भी समाचार पत्र सदन में हो रही उपयोगी बहस को उचित कवरेज नहीं देता है। इसके बजाय, समाचार पत्र आज बाजार पर आधारित हो गये हैं और आम जनता के लिए गैर-उपयोगी लेख लिख रहे हैं।’

पहले के दौर से आज के पत्रकारिता का परस्पर तुलना करते हुए उन्होंने कहा, ‘इससे पहले, मीडिया बहस को गम्भीरता से कवर किया करता था लेकिन सदन की सरकारी एजेंसियों के अलावा आज मीडिया के किसी भी भाग में विचार विमर्श देखना मुश्किल हो गया है।

इस अवसर पर नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के राष्ट्रीय महासचिव श्री रासबिहारी ने इस अवसर पर स्मारिका ‘जर्नलिज्म ऑफ न्यू इरा’ को इंगित करते हुए कहा कि समाज के बदलते स्वरूप और तकनीक के सामंजस्य के फलस्वरूप समाज के समस्याओं के निराकरण में समय-समय पर परिवर्तन होते रहे हैं और यही परिवर्तन हमारे समाज की गतिशीलता का भी परिचायक है। पत्रकारों की सामाजिक जिम्मेदारी की बात को लेकर उन्होंने श्री रहमान जी का समर्थन करते हुए कहा कि साथ मिलकर चलने की सोच से ही समाज की जड़ता को उखाड़ कर फेंका जा सकता है।

मनोज वर्मा ने दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि यह एसोसिएशन पत्रकार बंधुओं और समाज के सहायतार्थ पिछले कई दशकों से क्रियाशील है और भविष्य में भी अपनी भूमिका को महत्त्वपूर्ण बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है। स्मारिका के विमोच कार्यक्रम को सफल बनाने के उन्होंने उपस्थित सभी गणमान्य लोगों और वरिष्ठ पत्रकारों को धन्यवाद दिया। प्रेस विज्ञप्ति


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