अन्ना हजारे के पास पहुंचिए... आईबीएन7 देखते रहिए...

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: रवीश कुमार का भाषण देना और गोपाल राय का आमरण अनशन में भागीदारी करना अच्छा लगा : कल अन्ना हजारे के पास मैं गया था. जंतर-मंतर. वहां मेला लगा है. जी, मेला. क्रांतिकारियों का मेला. आंदोलनकारियों का मेला. बदलावपरस्तों का मेला. बहुत दिनों बाद बहुत अच्छा लग रहा था. अचानक अचानक कोई न कोई मिल जा रहा था. चितरंजन सिंह, विपुल, अविनाश, संजय, नवीन, हरपाल, गोपाल राय.... न जाने कितने लोग.

अपने क्रांतिकारी नेता और साथी गोपाल राय भी अन्ना हजारे के साथ आमरण अनशन पर बैठे हैं.  अन्ना हजारे को मंच से बोलता देखा. रवीश कुमार का भाषण सुना. बहुत अच्छे. शाबास. बढ़िया. शानदार. जंतर-मंतर पहुंचे लोगों के दिलों को सुकून था, भरोसा जग रहा था. लगा- लोग अब जगने लगे हैं. कुछ न कुछ होकर रहेगा. रवीश ने सही कहा, ये अन्ना 70 साल के जवान और हम लोग 35-36 के बूढ़े. मेला स्थल पर लोग आ जा रहे थे. सबको भरोसा दिख रहा था अन्ना हजारे में. पर कई बुद्धिमानों-विद्वानों को शक था. और ये शक की बीमारी रखने वालों का कोई इलाज नहीं होता. रामदेव के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बारे में लोग मुझसे पूछते हैं तो मैं यही कहता हूं कि रामदेव ने दुस्साहस किया है कि राजनीतिज्ञों को चुनौती देकर, भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर और इसके लिए उन्हें सलाम किया जाना चाहिए, उनकी सराहना की जानी चाहिए. रामदेव चाहते तो आराम से धर्म और आध्यात्म की चाशनी में योगा को मिला-मिलाकर बेचते रहते और इसकी बेहद महंगी महंगी रोटियां खाया करते लेकिन उन्होंने लीक से हटकर काम किया और करप्शन को मुद्दा बनाकर नेताओं की नाराजगी मोल ली.

तो, हो सकता है कि हम रामदेव से दूसरे मुद्दों को लेकर सहमत न हों लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तो बिलकुल साथ हैं. उसी तरह अन्ना हजारे, किरन वेदी, अग्निवेश आदि के लोकपाल बिल वाले मुद्दे पर हम लोग साथ हैं. घनघोर सन्नाटे को तोड़ने वाली इन क्रांतिकारियों की ये पहल स्वागत योग्य है. अन्यथा तो अब तक यही माना जाता रहा है कि आंदोलन करने के लिए पेशेवर आंदोलनकारी होते हैं और बाकी लोग सिर्फ वोट डालने के लिए होते हैं. पर दुनिया में पिछले दिनों जिस तरह से सरकारें बदली हैं, न्यू मीडिया ने आंदोलन के नए फार्मेट्स के लिए जिस तरह से कैटालिस्ट का काम किया है, वो सब जानने बूझने के बाद लगता है कि अब कामरेडों और संघियों को भी अपने चाल-चलन-चेहरे को बदलने के बारे में सोचना चाहिए. नई पीढ़ी और नया दौर, ये दोनों मिल-मिलाकर कुछ नया तैयार कर रहे हैं जिसकी गंध-सुगंध इन पारंपरिक किस्म के पेशेवर आंदोलनकारियों के पास नहीं पहुंच पा रहा है या पहुंच भी पा रहा है तो अपनी जड़ बुद्धि चेतना के कारण उसका एहसास ये नहीं कर पा रहे हैं.

मैं अन्ना हजारे या किसी शख्स या किसी पार्टी को क्रांति का प्रतीक नहीं बता रहा बल्कि यह समझा रहा हूं कि आंदोलन तभी संभव हैं जब हम पीपल को कनेक्ट कर पाएं और पीपल को कनेक्ट करने के लिए उनके दिल व दिमाग को पकड़ना बदलना पड़ता है और इसके लिए पीपल से ज्यादा दूरदर्शी और ज्यादा समकालीन बनना पड़ता है. ये पीपल आज का यूथ है, वो चाहे गांव का हो या शहर का. गंवई यूथ की प्राब्लम्स अलग हो सकती हैं और शहरी की अलग, लेकिन दोनों की पीड़ा यही है कि सिस्टम ट्रांसपैरेंट नहीं है. कहा कुछ जाता है और होता कुछ है. ये जो हिप्पोक्रेसी है, उसी की आड़ में करप्शन और बेईमानी फलफूल रहा है. तो इस हिप्पोक्रेसी के खात्मे के लिए और भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जरूरी है कि सरकारी संस्थाओं पर सरकारी लोगों का नहीं बल्कि जनता के लोगों का कब्जा हो. लोकपाल बिल उसी की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह एक ऐसा बिल है जिसे जनता के लोगों ने तैयार किया और अगर ये पास हो गया तो ये पहला बिल होगा जिसे सरकार ने नहीं बल्कि जनता के लोगों ने तैयार किया और सरकार ने पास किया.

ज्यादा बहस के मूड में नहीं हूं. दो चार साफ साफ बातें कहना चाह रहा था. एक तो ये कि अगर आप दिल्ली या आसपास के शहरों में रहते हैं तो आपको जंतर मंतर कुछ एक घंटों के लिए जरूर जाना चाहिए. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं और ऐसा न करने के कारण आपकी आत्मा या आपकी जमीर आपको नहीं धिक्कारती है तो फिर आपसे कोई बात करना बेकार है लेकिन अगर आप वाकई चाहते हैं कि देश अच्छे रास्ते पर जाए और जनता का भला हो तो आपको जेनुइन आंदोलनों को सपोर्ट करना आना चाहिए और इन आंदोलन को सपोर्ट करने के लिए अपनी फिजिकल प्रजेंस की गारंटी करनी चाहिए.

इसी कारण मैं कल निजी तौर पर वहां पहुंचा और अपने साथ तीन-चार लोगों को भी ले गया था. टीवी चैनलों और अखबारों को दिल से धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने बहुत लंबे समय बाद किसी आंदोलन को इतने दिल से कवरेज दिया है. आप लोग आईबीएन7 को खासकर देखिए जिस पर अन्ना हजारे, लोकपाल बिल व करप्शन के मुद्दे को बार-बार हाईलाइट किया जा रहा है. यह चैनल देश के कई शहरों में चल रहे आंदोलनों का लाइव कवरेज कर रहा है. भोपाल, मुंबई, दिल्ली समेत कई शहरों में लोकपाल बिल और अन्ना हजारे के सपोर्ट में चल रहे आंदोलन की कवरेज इसके रिपोर्टर बार-बार दिखा रहे हैं. यह बढ़िया है. इस चैनल ने यहां तक कह दिया है कि जंतर मंतर तहरीर चौक बनता जा रहा है. बहुत सुंदर. कुछ लोग कह रहे हैं कि सोनिया जल्द ही लोकपाल वाली मांग मानकर पूरे आंदोलन को टांय टांय फिस्स कर देगी. तो क्या. कर दे. लेकिन यह तो पता चल गया न कि इस देश में लोगों में आंदोलन करने का दमखम बाकी है. बस, नेतृत्व ईमानदार और संजीदा होना चाहिए और खुल दिल दिमाग वाला होना चाहिए.

सरकारें ऐसे ही आंदोलनों से मांगें मानती रहें तो फिर समस्या किस बात की है. जंतर मंतर पर थोक के भाव ओवी वैन देखकर दिल को सुकून मिल रहा था. नीचे आपको जंतर मंतर की कुछ तस्वीरें, आईबीएन7 चैनल पर चल रहे समाचार की कुछ तस्वीरें, रवीश के भाषण आदि को दे रहे हैं. आनंद लीजिए और जंतर-मंतर भी पहुंचिए. रवीश कुमार और गोपाल राय जैसों के इस आंदोलन में शामिल हो जाने से मैं भी खुद को इस आंदोलन से बुरी तरह कनेक्ट पा रहा हूं. रवीश कुमार ने अन्ना हजारे के साथ मंच से जनता को कल संबोधित किया. गोपाल राय आमरण अनशन करने वालों की टीम में शामिल हैं. रवीश कुमार समकालीन मीडिया के सरोकारी, संवेनशील और मुखर जर्नलिस्ट हैं, देसज हैं और भावों की अभिव्यक्ति के धनी आदमी हैं. उनके ढेर सारे प्रशंसक हैं और मैं भी हूं.

गोपाल राय और मैं करीब-करीब एक साथ भाकपा माले के होलटाइमर बने थे. पर माले वाले गोपाल राय की त्वरा झेल न पाए और खुद को गोपाल राय से अलग कर लिया. गोपाल जी नहीं माने. गुंडों और डंडों टाइप लोगों से लखनऊ में भिड़ते लड़ते रहे, उसी प्रक्रिया में उन्हें गोली मारी गई. मरते मरते बचे और जब चार वर्ष पहले जीते-जीते जी गए तो फिर से आंदोलनकारी बन गए. तबसे वे विभिन्न मसलों पर इतनी बार आमरण अनशन कर चुके हैं कि उनके शरीर में सिर्फ अनशन अनशन सा रह गया है, चनन मनन खन खनन तो कतई न बचा होगा. ऐसा मैं महसूस करता हूं. उन्हें मैं अपना नेता मानता हूं. तो मेरे ये दो अजीज लोग इस आंदोलन में शामिल हैं तो फिर ये आंदोलन अपना है. और, यकीन मानिए, ऐसे ही किसी बहाने से आप भी इस आंदोलन को अपना बना लें, तो गजब हो जाएगा. कोई और बहाना नहीं तो यही बहाना कि जब सत्तर साल के अन्ना मंच से कहते हैं कि हार्ट अटैक से नहीं, आंदोलन करके मरूंगा और यह भी कि दिल दिया है जान भी दूंगा... तो हमारे आप जैसे नौजवानों को अपनी जवानी पर वाकई शर्म आनी चाहिए... क्योंकि.. वो जवानी जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी न हो...

किसी में कमी निकालना बहुत आसान है और यह आसान काम ज्यादातर सामान्य लोग करते रहते हैं. और बड़ा मुश्किल भी होता है अपने समकालीन समय व समाज के अच्छे  लोगों व अच्छे कामों को पहचान पाना और उन्हें उनका उचित सम्मान व मान दे पाना क्योंकि तात्कालिकता और समकालीनता का जो चश्मा होता है उसमें कोई किसी को बड़ा नहीं दिखता. हर कोई एक दूसरे को बौना ही नजर आता है क्योंकि दृष्टि व सोच ऐसी बना दी गई है या कह लीजिए कि चश्मा ही ये ऐसा बाजार में है कि सिर्फ एकल ब्रांड है और यही हर कोई लगाता है. अगर आज के दिनों में कोई कबीर भी होता तो हम उसे चिरकुट कह देते क्योंकि कबीर हम लोगों के समय में होते तो उन्हें भी समकालीनता व तात्कालिकता के चश्मे से देखते. जो अपने समय की तात्कालिकता के आग्रहों-दुराग्रहों को समझते हुए दूर तलक देख पाते होंगे वे ही सही तौर पर जान पाते होंगे कि इन दिनों कहां ठीक और कहां खराब, क्या ठीक और क्या खराब चल रहा है. मैं देख रहा हूं, सुन रहा हूं कि बहुत सारे लोग किरन बेदी और अग्निवेश को गरिया रहे हैं. इनकी कमियां बता रहे हैं. सवाल ये नहीं है. मसला ये है कि हम सिर्फ घर में लेटकर बकचोदी करने के आदी हैं या सड़क पर निकल कर जिंदाबाद-मुर्दाबाद करने में भी यकीन रखते हैं. अगर नहीं रखते तो फिर हमारी बकचोदियों का भी कोई मतलब नहीं है.

खैर, कहानी लंबी होती जा रही है. आखिर में ये ही कहूंगा...

जंतर मंतर पहुंचिए अन्यथा खुद को पंचर फच्चर मान लीजिए... इसके अलावा कोई तर्क-कुतर्क न चलेगा, इसके बीच में कुछ न चलेगा साथी. आज शाम या रात में मैं भी जंतर-मंतर पहुंचूंगा, खटोला अब वहीं बिछेगा.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

आईबीएन7 ने अन्ना हजारे के आमरण अनशन और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को बतौर कंपेन प्रसारित करना शुरू कर दिया है और इसके लिए आईबीएन7 की टीम तारीफ की हकदार है.

आईबीएन7 पर जंतर-मंतर से रिपोर्टर लाइव करते हुए

आईबीएन7 अन्ना हजारे अनशन के मुद्दे पर कई जगहों से लाइव कर रहा है, कुल छह फ्रेम से इसे देख सकते हैं.

कल रात में आईबीएन7 पर एजेंडा प्रोग्राम में अरविंद केजरीवाल और प्रकाश जावड़ेकर से अन्ना के आंदोलन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बात करते आशुतोष.

रवीश कुमार ने जंतर-मंतर पर अन्ना के मंच से दिल छूने वाला भाषण दिया.

जंतर-मंतर पर लगे मेले का एक कोना

जंतर-मंतर पर सभा को संबोधित करते बाबा हरदेव

कल जंतर मंतर पर दर्जनों चैनल वाले लाइव करने में जुटे रहे.

घूसखोरों भारत छोड़ो का नारा काफी लोकप्रिय हो रहा है आजकल.

जंतर मंतर पर अन्ना के साथ आमरण अनशन में शामिल होने वाले गोपाल राय. (सबसे बाएं)

बाबू चितंरजन सिंह, पीयूसीएल वाले, गमछा से सिर ढके, भी मौके पर मिले.

एक बुजुर्ग कुछ इस अंदाज में अपनी सचल दुकान लिए टहल रहे थे मेले में.

एक सज्जन वानर सेना के बैनर तले किसी धरने में कई घंटे तक अकेले ही बोलते रहे, अंततः उनका गला ध्वस्त हो गया.

जंतर-मंतर पर लगे मेले-मजमे का मजा लेने के बाद मैं थकान मिटाने इंडिया गेट पर पहुंच गया और वहां बोट चलाने का सुख उठाया. क्या मजा आए जब आंदोलन में लोगों को मजा आने लगे... !!

रवीश कुमार के भाषण को सुनने के लिए क्लिक करें... 70 साल का जवान


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