न्‍यूज चैनलों पर नियंत्रण के लिए कानून की जरूरत : सुब्रत रॉय

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: लखनऊ में सहारा न्‍यज ब्‍यूरो का सम्‍मेलन आयेजित : मीडिया की देश और समाज निर्माण में महती भूमिका है, इसलिए उसे अपने व्यावसायिक हितों से ऊपर उठकर सोचना होगा और समाज के प्रति अपनी अहम जिम्मेदारी निभानी होगी. उसे इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि सही बात उसके पूरे परिप्रेक्ष्य में सही ढंग से रखी जाए और तिल का ताड़ बनाने से बचा जाए.

ये विचार सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता एवं चेयरमैन सहाराश्री सुब्रत राय सहारा ने बृहस्पतिवार को सहारा शहर में आयोजित सहारा न्यूज ब्यूरो के प्रेरणा सम्मेलन में व्यक्त किये. सहाराश्री ने कहा कि आज मीडिया में नकारात्मक खबरें छायी रहती हैं, इससे हम भावनात्मक रूप से संकुचित होते जाते हैं. जरूरत है सकारात्मकता को बढ़ावा देने की. सकारात्मक खबरों से हमारे भावनात्मक दायरे का विस्तार होता है. मीडिया को बेशक आलोचना का हक है लेकिन बेहतर होगा वह समालोचनात्मक दृष्टि अपनाए और अतिरिक्त नकारात्मकता से बचे. उन्होंने चिन्ता जतायी कि आज टीआरपी के लिए टीवी न्यूज चैनल कुछ भी कर रहे हैं, यह गलत है. इस पर नियंत्रण के लिए कड़े कानून बनाये जाने की जरूरत है.

सहाराश्री ने कहा कि मीडिया को देश व समाज के हित का ध्यान रखना चाहिए. उसे समाज की स्वस्थ और निरन्तर प्रगति का माध्यम बनना चाहिए. गड़बडि़यों व कमियों को मीडिया को जरूर उठाना चाहिए लेकिन सही समय पर. यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इससे देश के सम्मान पर आंच न आये. उन्होंने कहा कि मीडिया ही नहीं अस्पतालों और स्कूलों में भी व्यावसायिकता को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए.

मीडियाकर्मियों का आह्वान करते हुए सहाराश्री ने कहा कि देश में जो अच्छा हो रहा है, उसे भी सामने लाए. अपने कर्तव्यबोध का ध्यान रखकर ईमानदारी से लोगों को सही बातें समझायें. ईमानदारी से चलने पर परेशान हो सकते हैं लेकिन पराजित नहीं. इससे आपका आत्मबल बढ़ेगा. सहाराश्री ने कहा कि मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी की मजबूत नींव पर ज्ञान से परिपूर्ण व्यक्तित्व का भवन खड़ा करें.  इन दोनों के सम्मिश्रण से ही महान व सुन्दर व्यक्तित्व बनते हैं.

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उन्होंने कहा कि ज्ञान का अर्थ केवल सूचना नहीं है. दरअसल सूचना ज्ञान की पहली सीढ़ी है. सूचना पाने पर प्रश्न जगाएं और अपने विवेक व तर्क से उसके उत्तर ढूंढें. इस अभ्यास से ज्ञान बढ़ेगा और यही ज्ञान आगे बढ़ने में मदद करेगा. इसको स्पष्ट करते हुए सहाराश्री ने कहा कि चार प्रकार के ज्ञान प्राप्त कर लें तो जीवन बहुत सुंदर हो जाएगा. ये हैं जीवन पक्ष का ज्ञान, कर्म विषय का ज्ञान, कर्म स्थल का ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान. उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए सभी से अपील की कि जीवन में मजबूत पेड़ बनें न कि लकड़ी. मजबूत आधार वाला पेड़ हर आंधी तूफान के बाद फिर से पत्तों-फलों से लद जाता है और उसका जीवित अस्तित्व कायम रहता है जबकि कमजोर आधार वाला पेड़ जड़ से उखड़ जाता है और लकड़ी में तब्दील हो जाता है.

सहाराश्री ने जीवन पक्ष का ज्ञान देते हुए कहा कि अपने वर्तमान से संतुष्ट रहेंगे तो जीवन सुन्दर लगेगा. भौतिक पक्ष से ज्यादा अहमियत भावनात्मक पक्ष को देनी चाहिए. जीवन को सुन्दर बनाना है तो अपने भावनात्मक दायरे को बड़ा करना होगा. ये दायरा इतना बड़ा हो कि संस्था और देश भी इसमें समा जाए. इसके साथ ही दो फार्मूले जीवन में अपनाएंगे तो आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पायेगा. पहला फार्मूला यह है कि जब आपसे गलती हो तो आपके अन्दर इसका अहसास पैदा हो. अपनी गलतियों को स्वीकारें और उसे व्यक्त करें.  दूसरा फार्मूला बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशंसा करने से न चूकें. पीठ पीछे ही नहीं मुंह पर भी प्रशंसा करें. अगर आलोचना करेंगे तो लोग दूर भागेंगे. प्रशंसा करेंगे तो लोग आप से जुड़ेंगे. इससे आपका भावनात्मक दायरा और मजबूत होगा.

उन्होंने कहा कि जब मैंने संस्था शुरू की तो संघर्ष के दिन थे तब भी मैं सुख, शांति और संतुष्टि पाता था और आज भी सुख-शांति-संतुष्टि से ओतप्रोत हूं. इसकी वजह केवल यही है कि मैं वर्तमान से संतुष्ट रहता हूं. उन्होंने कहा कि स्वप्रोत्साहन पैदा करें. अन्दर से आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति उत्पन्न करें, सच मानिये आप अपने सभी लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे. सहाराश्री ने जीवन की सच्चाई से साक्षात्कार कराते हुए कहा कि हम जो भी करते हैं, अपने लिए करते हैं. अपने सुरक्षा बोध को पूर्ण करने के लिए करते हैं और संतुष्टि पाते हैं.

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ऑडीटोरियम में उपस्थित देशभर के लगभग ढाई हजार मीडियाकर्मियों से उन्होंने कहा कि दुनिया से नहीं खुद से डरें. ऐसा कुछ भी नहीं करें, जिससे मन में ग्लानि पैदा हो क्योंकि इसका बोझ ढोना मुश्किल होता है. सहारा इण्डिया मीडिया के एडिटर एवं न्यूज डायरेक्टर  उपेन्द्र राय ने कहा कि सहाराश्री की प्रेरणा हमारी दृष्टि का विस्तार करती है और हम जहां हैं वहां से आगे जाने की राह दिखाती है. सहाराश्री का कहना है कि देने वाला उपकार नहीं करता लेकिन पाने वाले को उपकृत महसूस करना चाहिए. हम सब उनके प्रति उपकृत महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि सहाराश्री का सपना है कि मीडिया समाज के आखिरी आदमी तक पहुंचे. हम उसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं.

प्रेरणा सम्मेलन में सहाराश्री ने सहारा न्यूज नेटवर्क की डायरेक्टरी का विमोचन किया. इस डायरेक्टरी में सहारा न्यूज नेटवर्क के 5500 मीडियाकर्मियों के नाम, मोबाइल नम्बर व ईमेल आईडी है, जिनसे कभी भी सम्पर्क किया जा सकता है. सम्मेलन में सीनियर एडवाइजर अनिल विक्रम सिंह, परिवार की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती ऋचा राय, राष्ट्रीय सहारा के समूह सम्पादक रणविजय सिंह, ऊर्दू रोजनामा के समूह सम्पादक अजीज बर्नी, सम्पादक एसएनबी व ऑल इण्डिया एडमिनिस्ट्रेटिव हेड विजय राय, जनरल मैनेजर रूबल दत्ता, एचआर हेड लोकेश शर्मा, एसआईटीवी के प्रशासनिक हेड सीबी सिंह, चीफ मैनेजर मार्केटिंग जीएन सिंह, चीफ मैनेजर पीएस सुराल, एसआईटीवी के नेशनल हेड रजनीकांत, यूपी उत्तराखण्ड चैनल के हेड राजेश कौशिक, एमपी-छत्तीसगढ़-एनसीआर चैनल के हेड मनोज शर्मा मनु, बिहार-झारखण्ड के हेड प्रबुद्ध राज, यूपी-उत्तराखण्ड मार्केटिंग हेड बबिता सिंह चौहान, राष्ट्रीय सहारा के गोरखपुर यूनिट हेड पीयूष बंका, स्थानीय सम्पादक मनोज तिवारी, विज्ञापन प्रबन्धक राजेन्द्र पाण्डेय, कानुपर यूनिट हेड रमेश अवस्थी, स्थानीय सम्पादक नवोदित, पटना यूनिट हेड मृदुल बाली, स्थानीय सम्पादक हरीश पाठक, बिहार उर्दू प्रशासनिक हेड खुर्शीद नैयर, देहरादून यूनिट हेड परविन्दर सिंह बहल, स्थानीय सम्पादक एलएन शीतल, विज्ञापन प्रबन्धक डीडी शर्मा, वाराणसी यूनिट हेड अमर सिंह, स्थानीय सम्पादक स्नेह रंजन, लखनऊ यूनिट व एसएनबी यूपी हेड राजेन्द्र द्विवेदी, स्थानीय सम्पादक दयाशंकर राय, विज्ञापन प्रबन्धक श्यामबिहारी गुप्त समेत अनेक वरिष्ठ कर्तव्ययोगी कार्यकर्ता शामिल हुए. सम्मेलन का संचालन हसन काजमी ने किया. साभार : सहारा


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