'दर्शकों-पाठकों पर अपनी पसंद थोप रहा है मीडिया'

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दिल्ली के रामजस कॉलेज में बीते दिनों 'मीडिया और जनतंत्र' विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ पत्रकार और सकाल ग्रुप के टीवी चैनल साम मराठी से जुड़े उमेश चतुर्वेदी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोसने से काम नहीं चलने वाला। जनतंत्र को सही तरीके से चलाने वाली संस्थाओं का भी लोकतांत्रिक होना जरूरी है। कांग्रेस के 50 वर्ष के इतिहास में सिर्फ सीताराम केसरी चुने हुए अध्यक्ष रहे। क्षेत्रीय पार्टियों में अध्यक्ष चुनने की खानापूरी की जाती है। इन बातों की चर्चा लोकतंत्र का चौथा पाया होने का दावा करने वाले अखबारों में नहीं होती। पर हर बात के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को दोषी ठहराया जाता है। दूरदर्शन के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि चैनल चलाना पूंजी का खेल है। इसे टीआरपी ही नियंत्रित कर रही है तो उससे बचना मुश्किल है।

उन्होंने दर्शकों से ही सवाल उछाला कि वे सांप-छछूंदर वाले कार्यक्रम देखते ही क्यों हैं। अगर आप ना देखें तो टीआरपी आएगी ही क्यों। सामाजिक कार्यकर्ता और वैज्ञानिक गौहर रजा का कहना था कि मीडिया दर्शकों की पसंद के नाम पर अपनी पसंद थोप रहा है और यह सब आम आदमी को सुविधाओं और सूचनाओं से वंचित रखने का षडयंत्र है। उन्होंने कहा कि आज भी कृषि दर्शन को सबसे ज्यादा लोग देखते हैं। इससे साफ है कि लोग अच्छी चीजें पसंद करते हैं। सेमिनार का संचालन रामजस कॉलेज की अंग्रेजी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका गागली मित्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के प्राध्यापक तनवीर अहमद ने किया। पूरे सेमिनार के दौरान छात्रों से हाल खचाखच भरा रहा। बाद में छात्रों ने वक्ताओं से जमकर सवाल-जवाब भी किए।

 


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