बाइस साथियों की शहादत के बाद भी नहीं झुके पत्रकार, स्‍वतंत्रता दिवस मनाया

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गुवाहाटी। आमतौर पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर सूनी रहने वाली गुवाहाटी की सड़कों पर इस बार बंदे मातरम और भारतमाता की जय के स्वर गुंजते दिखे। ऐसा करने का साहस दिखाया गुवाहाटी के पत्रकारों ने। उगवादियों की स्वतंत्रता दिवस बहिष्कार और तमाम धमकियों को दरकिनार कर असम के पत्रकारों ने ६५वां स्वतंत्रा दिवस मनाया।

गुवाहाटी प्रेस क्लब में राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई और बाद में पत्रकारों और वरिष्ठ नागरिकों ने नगर में रैली निकाली। सैकड़ों पत्रकारों की मौजूदगी में गुवाहाटी प्रेस क्लब के सचिव नव ठाकुरिया तथा वरिष्ठ पत्रकार रणेन गोस्वामी ने झंडोतोलन किया। इस मौके पर देश की स्वतंत्रता के लिए कुर्बानी देने वाले वीर शहीदों को याद करते हुए रणेन गोस्वामी ने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि उल्फा या अन्य उगवादियों के कहने पर हम अपनी आजादी का जस्न न मनाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई दूसरे देश में बैठ कर हमें आजादी मनाने से रोकने की कोशिश करता है तो उसका कड़ा जवाब देना चाहिए।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए नव ठाकुरिया ने कहा कि उल्फा की धमकियों को दरकिनार कर गुवाहाटी प्रेस क्लब वर्ष १९९८ से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडोतोलन के साथ आजादी की जस्न मनाने के लिए इस मौके पर कई कार्यक्रमों का आयोजन करते आया है। उन्होंने बताया कि उल्फा के निशाने पर हमेशा राज्य के पत्रकार रहे हैं, कम से कम २२ पत्रकार उगवाद की भेंट चढ़ चुके हैं लेकिन पत्रकारों की बिरादरी ने कभी इनके सामने झुकने का काम नहीं किया। ध्वजारोहन के मौके पर जानेमाने पत्रकार अजीत पटवारी, रुपम बरुवा और  डीएन सिंह के साथ जानेमाने समाजिक कार्यकर्त्ता धीरेन बरुवा और पूर्व विधायक तथा समाजसेवी अजय दत्त मौजूद थे।

गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.


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