आर्यन टीवी को पुलिस तांडव का सच पेश करने के लिए बधाई

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बिहार की राजधानी पटना के प्रतिष्ठित नागरिकों ने आज उस नाला रोड की सड़क पर धिक्कार मार्च किया, जिस नाला रोड पर ५ दिन पहले पटना पुलिस ने नागरिकों पर बेरहमी से लाठी बरसाई थी. मै पत्रकार गुंजन जी और आर्यन टीवी को सलाम करता हूँ, जिन्‍होंने १६ अगस्त को पुलिस तांडव का असली सत्य आधे घंटे के अपने विशेष कार्यक्रम में उजागर किया है.

मैं इस नागरिक मार्च की तस्वीर इसलिए आपके सामने पेश कर रहा हूँ कि आप इन्हें ठीक से पहचानने की कोशिश करेंगे, इन में किनका चेहरा उपद्रवियों से मिलता-जुलता है. इन में जानेमाने इतिहासकार, नामचीन बुद्धिजीवी, चर्चित रंगकर्मी और मानवाधिकारवादी-प्रतिशील-वामपंथी शामिल हैं. नामचीन नागरिकों ने १२ अगस्त के लाठीचार्ज के बाद तत्काल भगत सिंह चौक से रेडियो स्टेशन तक नागरिक मार्च किया था. पटना के सबसे बड़े हिंदी दैनिक हिंदुस्तान ने १४ मार्च को नागरिक मार्च की तस्वीर लगाई थी और खबर में इन नागरिकों को उपद्रवियों की तरह पेश किया था. अगर हिंदुस्तान पटना संस्करण के संपादक अक्कू श्रीवास्तव इस पुलिस पक्षधरीय पत्रकारिता को पत्रकारिता कहने के लिए तैयार हैं तो हमें कुछ नहीं कहना ...?

कामरेड पत्रकार श्रीकांत जी आप पापी पेट की दुहाई मत दीजिये. अगर आप हिरासत में कामरेड साथियों के सीने को बूट से रौंदने वाले डीएसपी रामाकांत प्रसाद के बचाव की पत्रकारिता को जन पत्रकारिता कह रहे हैं तो जीवन में कृपा कर अपने साथ प्रभाष जोशी का नाम आप नहीं जोड़ेंगे.  सुरेन्द्र किशोर जी जनांदोलन और मीडिया पर आलेख लिखते हुए आप यह नहीं सोच पाते हैं कि बिहार कि मीडिया सत्ता परस्त होने के अभ्यास में जितनी जन विरोधी हो रही है, उस में आपका अपना पसीना कितना है ...? आदरणीय प्रभाष जोशी अगर आज आप जिंदा होते तो बिहार की जन विरोधी मीडिया के नाक में नकेल डालने के लिए हमारे साथ पटना की धरती पर खड़े होते. गुरुदेव मैं आपके आशीष से पुरस्कार, कुर्सी प्राप्त करनेवाले आपके नामचीन शिष्य पत्रकारों से कहने का दुस्साहस कर रहा हूँ कि वे अपने कर्मों से बिहार की पत्रकारिता को ना शरमाएँ.

लेखक पुष्पराज सोशल एक्टिविस्ट हैं.


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