व्‍यावसायिकता में गुम होते राष्‍ट्रबोध को पत्रकार ही बचा पाएंगे

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: भोपाल में पत्रकारों का दो दिवसीय सम्‍मेलन आयोजित : वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा आयोजित नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन गत चौबीस एवं पच्‍चीस अगस्त को रवीन्द्र भवन भोपाल में सम्पन्न हुआ। ''पत्रकारिता में राष्ट्रबोध और स्वातंत्रय वीर सावरकर''  विषय पर केन्द्रित इस सम्मेलन में पत्रकारिता में राष्ट्रबोध के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पत्रकारिता के उच्‍चतम मापदण्डों का पुनर्स्‍मरण तो किया ही गया साथ ही इन दिनों ''राष्ट्रबोध'' से महती उस पत्रकारिता की चर्चा भी की गई जो व्यावसायिकता की होड़ में अपने आदर्शों और सिद्घान्तों को खोती जा रही है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के जाजल्यमवान नक्षत्र स्वातंत्रय वीर सावरकर के अवदान के माध्यम से इस अधिवेशन में वक्ताओं ने पत्रकारिता और आत्म बलिदान के रिश्तों के पारिभाषित करने और इस माध्यम से राष्ट्रीयता के तत्व की पुनर्प्रतिष्ठा की बात भी कही। अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क एवं संस्कृति मंत्री, लक्ष्मीकान्त शर्मा ने सरकार और पत्रकार जगत के अर्न्तसम्बन्धों की चर्चा की और इन्हें अन्योन्याश्रित बताते हुए पत्रकारिता के उत्थान को सरकार के प्राथमिक दायित्वों में से एक बताया। श्री शर्मा ने अधिवेशन के लिए विषय चयन की प्रशंसा करते हुए आयोजकों को बधाई दी कि वे स्वातंत्रय वीर सावरकर के बलिदान के माध्यम से पत्रकारिता में राष्ट्रबोध के अलख को जगाना चाहते हैं वो आज की सबसे अहम जरूरत है। श्री शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में पत्रकारिता के महत्व को स्वीकार करने और विकास की रीति नीति तय करते समय पत्रकार जगत के सुझावों को महत्व देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि अधिवेशन में पत्रकार जगत की समस्याओं पर चिंतन-मनन के बाद जो एक निष्कर्ष पत्र बनेगा उस पर माननीय मुख्यमंत्री जी से विचार विमर्श कर अनुकूल निर्णय लिये जाएंगे।

इस सत्र में नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस के कायर्कारी अध्यक्ष श्री प्रेमशंकर अवस्थी ने इस अधिवेशन को पत्रकारिता के क्षेत्र में उपस्थित मूल्यों के संकट की स्थिति में स्वतंत्रता संग्राम के समय की स्थितियों से प्रेरणा प्राप्त कर समाधान की ओर बढ़ना बताया। उन्होंने अपने प्रभावी संबोधन में अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के अवदान की चर्चा करते हुए कहा कि व्यावसायिकता की आँधी में गुम होते राष्ट्रबोध को पत्रकार ही बचा पाएंगे। प्रेमशंकर जी ने सत्ता से साथ पाने के लिए लालायित पत्रकारों को आडे़ हाथों लेते हुए यह स्पष्ट किया कि ''प्रेस नोट''  के सहारे पत्रकारिता लम्बे समय तक नहीं चलती है। उद्घाटन सत्र में ही वरिष्ठ पत्रकार और मध्य प्रदेश राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने आजादी की लड़ाई में स्वातंत्रय वीर दामोदर विनायक सावरकर के अवदान का पुण्य स्मरण करते हुए बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के उक्त दौर में पत्रकारिता, राष्ट्र बोध का ही पर्याय थी और उस राष्ट्र बोध में ही जन-जन में स्वतंत्रता की ललक पैदा की थी।

अधिवेशन सत्र की अध्यक्षता दैनिक नई दुनिया, भोपाल के संपादक ओमप्रकाश मेहता ने की और मध्य प्रदेश गौसम्वर्धन बोर्ड के अध्यक्ष शिव चौबे इस सत्र में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। यूनियन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने अतिथियों का स्वागत भाषण पढ़ा और महासचिव महेन्द्र सिंह पंवार ने संगठन की भावी रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशि तिवारी ने किया और अतिथियों के प्रति आभार आदित्य नारायण उपाध्याय ने व्यक्त किया।

राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसर सत्र में सुदूर अंचल से आये पत्रकारों ने अपनी बातें कहीं। मध्य प्रदेश गौपालन बोर्ड के अध्यक्ष शिव चौबे और रमेश शर्मा इस सत्र में विशेष अतिथि थे। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राधावल्लभ शारदा ने की। कार्यक्रम का संचालन सलिल मालवीय ने किया। इस सत्र में पत्रकारों ने आंचलिक स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकारों की समाचार संकलन में आने वाले दिक्कतों, विभिन्न बाहुबलियों के खिलाफ खबरें छापने पर आशंकित खतरों, पत्रकारों को पुलिस द्वारा परेशान करने और अधिमान्यता व अन्य सुविधाओं के बारे मे भी खुलकर और विस्तृत चर्चा की। इस खुले अधिवेशन में छोटे एवं मध्यम समाचार पत्रों और उनके मालिकों, सम्पादकों एवं पत्रकारों के आर्थिक संरक्षण और तदनुरूप विज्ञापन नीति की भी चर्चा की।

पच्‍चीस अगस्त को स्वराज भवन, भोपाल में नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन हुआ। नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आर.आर. गोस्वामी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रेमशंकर अवस्थी, सेकेट्री जनरल, राधावल्लभ शारदा की उपस्थिति और मध्य प्रदेश गौसम्वर्धन बोर्ड के अध्यक्ष शिव चौबे के विशेष आतिथ्य में सम्पन्न हुआ इस राष्ट्रीय अधिवेशन में पूरे देश की प्रांतीय इकाईयों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस की इस राष्ट्रीय बैठक में पत्रकारों के कल्याण पर विचार कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जिसे ''भोपाल घोषणा पत्र''  का नाम दिया गया। दो दिवसीय इस आयोजन में बड़ी संख्या में अन्य प्रातों से पत्रकारों ने भाग लिया। शिव चौबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस अधिवेशन में विचारों का मंथन हुआ और अमृत निकला, राष्ट्रबोध और सावरकर के राष्ट्र ऋण की याद दिलाई।

उन्होंने बताया कि मानव तीन ऋण लेकर पैदा होता है। उन्होंने आगे कहा राजनीति में सेवाभाव होना जरूरी है और साथ ही साथ कथनी और करनी में भी अन्तर होना चाहिए। उन्होंने सरकार की योजना बताने के साथ-साथ ग्रामीण पत्रकारों की पीड़ा मैं समझता हूं भी कहा। मीडिया की भी उन्होंने प्रशंसा की और कहा कि मीडिया ने जो भूमिका आपातकाल में निभाई थी वह आज निभा रहा है,  हमारा दर्द व्यक्त कर रहा है। वर्किंग जर्नलिस्टस यूनियन द्वारा आयोजित पत्रकारों के इस सम्मेलन में जहां आप देश के विभिन्न भागों से आये वहां म.प्र. के ग्रामीण अंचलों से आये विभिन्न पत्रकारों की भी भागीदारी रही है। मध्‍य प्रदेश में पत्रकारों में वैसे तो कई आयोजन होते हैं राष्ट्रीय एवं प्रांतीय। इस आयोजन में पत्रकारों को विचार के लिये जो विषय रखा गया राष्ट्रबोध और पत्रकारिता। इसका सीधा अर्थ है पत्रकारों को सबसे पहले देश के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि मैं भी एक पत्रकार रहा हूं और इसी राजधानी में इंदौर से प्रकाशित स्वदेश का संवाददाता रहा हूं। ग्रामीण अंचल का होने के कारण ग्रामीण पत्रकारों के दुख दर्द को अच्‍छे से समझता हूं।

हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने पत्रकारों के लिये विशेष ध्यान दिया है और इस काम के लिये उन्होंने अपने सहयोगी माननीय लक्ष्मीकान्त जी को ये दायित्व दे रखा है। जिस तरह से लक्ष्मीकान्त को पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखने का दायित्व दिया। उसी तरह वर्किंग जर्नलिस्ट प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा जी मेरे पास पत्रकारों के स्वास्थ्य हेतु आर्थिक सहायता एवं उनके उत्पीड़न के प्रसंग लाते हैं। जिन्हें मैं माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास प्रस्तुत करता हूं और उनके निर्देशानुसार उन प्रकरणों पर उचित कार्यवाही हेतु भेजता हूं। म.प्र. में कई संगठन हैं और उनके कई नेता हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पत्रकारों को सम्बोधित करने ले जाते हैं,  ऐसे नेता जो निस्वार्थ भाव से अपने साथियों की मदद करते हैं। यदि ऐसे गुण सभी में आ जाये तो समाज की अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को लाभ मिलेगा। मैं आप सभी का स्वागत करता हूं अभिनन्दन करता हूं।

इस अधिवेशन में आर.आर.गोस्वामी, अहमदाबाद (गुजरात), प्रेम शंकर अवस्थी, फतेहपुर (उत्तरप्रदेश),  विनोद कुमार पांचाल, पानीपत (हरियाणा),  लीलाधर शर्मा, फाजिल्का (पंजाब),  योगराज भाटिया, भिलाई (छत्तीसगढ), शिवकुमार शर्मा (नई दिल्ली),  निशांतभाई, नागपुर (महाराष्ट्र),  देवेंन्द्र शर्मा, मैनपुरी (उत्तरप्रदेश), राज गोस्वामी, बिलासपुर (छत्तीसगढ),  अनिल च्‍यानी, कटहेडा, फाजिल्का (पंजाब),  एम.कृष्ण कुमार, हैदराबाद, (आंध्र प्रदेश),  निर्मल यादव, फतेहपुर ( उत्तरप्रदेश ),  शाम कामरा, पानीपत (हरियाणा), महेश कुमार तिवारी, बिलासपुर (छत्तीसगढ), अशोक चुघ, समालखा, पानीपत (हरियाणा),  कु.भावना बिष्‍ट, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश), एस बाबू, आर आर बाबू, ए.एस.एगाबंरम, के.रधिनबेवल, हरिराम चौरसिया, राजेशकुमार, अनुपमादास, एम एम उपाध्याय, अमिताभ मिश्रा, अशोक नेहरू, अरूण जैन, महेन्द्र पंवार, सलिल मालवीय, अरूण वंछोर, डॉ.शशि तिवारी, गुरुशरण शर्मा, राम मेहरा, पवन शर्मा, आई आर कनन, सुरेन्द्र साहू, कृष्णकुमार एवं म.प्र.के विभिन्न अचंलों से आए पत्रकार शामिल थे। प्रेस रिलीज


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