इन्हें सिर्फ प्रिंटिंग प्रेस चलाने का रजिस्ट्रेशन मिले : प्रभाष जोशी

E-mail Print PDF

संबोधनचुनाव के दौरान पैसा लेकर उम्मीदवारों के हक में विज्ञापननुमा खबरें छापने के खिलाफ देश भर के जाने-माने संपादक प्रख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी की अगुवाई में शीघ्र ही अभियान चलाएंगे। संपादकों का प्रतिनिधिमंडल, मुख्य चुनाव आयुक्त एवं प्रेस परिषद के अध्यक्ष से भेंट करेगा। प्रभाष जोशी ने रविवार को हरियाणा के रोहतक शहर में लेखक एवं पत्रकार पवन कुमार बंसल की किताब 'खोजी पत्रकारिता क्यों और कैसे' के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल भारतीय प्रेस परिषद से मिलकर अनुरोध करेगा कि वह विज्ञापननुमा खबरों का अध्ययन कर सरकार से ऐसी खबरें छापने वाले अखबारों का रजिस्ट्रेशन रद करने और सिर्फ प्रिंटिंग प्रेस चलाने का रजिस्ट्रेशन देने का आग्रह करे।

उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मांग करेगा कि लोकसभा चुनाव के दौरान किसी विशेष क्षेत्र के उम्मीदवार के हक में छपी विज्ञापननुमा खबरों का खर्चा उसके चुनावी खर्चे में जोड़ा जाए। प्रभाष जोशी ने पवन कुमार बंसल को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे हालात में जब पत्रकारिता पर बाजारवाद हावी हो गया है और खोजी पत्रकारिता लुप्त होती जा रही है, पवन बंसल ने यह किताब लिखकर सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों चुनावों की जो कवरेज हुई है वो ज्यादातर पैसा देकर प्रायोजित की गई थी। जोशी का कहना था कि पत्रकारों का देश की आजादी में अहम योगदान रहा है लेकिन अब पत्रकारिता पर बाजारवाद हावी है जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। प्रभाष जोशी ने कहा कि अखबार मालिकों का नहीं बल्कि जनता का हथियार होता है जिसकी रक्षा देश के पाठकों को करनी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी को मिलकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को बाजारवाद से बचाने के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए। जोशी ने कहा कि संपादक का सम्मान इसलिए नहीं होता क्योंकि उसे मालिक ने संपादक का पद दिया है। उसका महत्व संपादकीय लेखों और अपने संवाददाता को लिखने की स्वतंत्रता देने से होता है। उन्होंने खेद प्रकट किया कि संपादकीय भी बाजारवाद का शिकार हो गया है। किताब की प्रशंसा करते हुए प्रभाष जोशी ने कहा कि पवन बंसल जैसे पत्रकार आने वाले दिनों में चिड़ियाघर में ही देखने को मिलेंगे।

बंसल ने कहा कि हरियाणा में जहां सदियों पूर्व भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था, अब भ्रष्ट नेताओं और भ्रष्ट अफसरों की मिलीभगत से लैंड माफिया, वाइन माफिया, और माइन माफिया में बदल गया है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने कहा कि समय के साथ पत्रकारिता का स्वरूप बदलता जा रहा है लेकिन इसके लिए पत्रकार दोषी नहीं बल्कि वो व्यवस्था है जिसमें अखबार के मालिकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इस पर गहन चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि लोगों का लोकतंत्र में मीडिया सहित सभी स्तंभों से विश्वास उठता जा रहा है। हरियाणा के उर्जा मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि वर्तमान दौर में पत्रकार को नाम मात्र का वेतन मिलता है। ऐसे में उन्हें विज्ञापनों के सहारे अपनी आजीविका चलानी पड़ती है। उन्होंने विज्ञापननुमा खबरों के प्रकाशन पर चिंता प्रकट की। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मास्टर हुकम सिंह ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पत्रकारों को सामाजिक मुद्दों पर कलम उठानी चाहिए।

शिक्षाविद् एवं हरियाणा प्रशासनिक सुधार आयोग के सदस्य डी.आर. चौधरी ने कहा कि विकास के मामले में शहर और गांव के बीच बढ़ रही विषमता का मुद्दा मीडिया को उठाना चाहिए। समाजसेविका एवं महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली मधु आनंद जिन्होंने हरियाणा के पुलिस अफसर एस.एस. राठौर के खिलाफ पंचकूला की रुचिका से छेड़छाड़ का मामला दर्ज करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी, का कहना था कि मीडिया को ऐसे मुद्दे प्रमुखता से उठाने चाहिए। लेखक पवन कुमार बंसल ने कहा कि हरियाणा में नेताओं और अफसरों ने मिलकर लूट मचा रखी है जिसका भंडाफोड़ करने के लिए खोजी पत्रकारिता बहुत जरूरी है। समारोह में पूरे हरियाणा, चंडीगढ़ एवं दिल्ली से 300 के करीब बुद्विजीवी आए हुए थे। उन सभी की राय थी कि मीडिया के उपर बाजारवाद हावी होने के खिलाफ लड़ाई होनी चाहिए।


AddThis