''पत्रकारों से रिपोर्टिंग और मार्केटिंग दोनों काम कराना बिलकुल गलत बात''

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संगोष्ठी में बोलते चंदन मित्राकई अखबारों में पैसे लेकर छापी जाने वाली खबरों पर देश भर के वरिष्ठ पत्रकारों ने कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही उन्होंने मीडिया की गिरती साख पर चिंता व्यक्त की। एक स्वर में उन्होंने मांग की कि इसे विज्ञापन का रूप दिया जाना चाहिए और इसकी जानकारी पाठकों को स्पष्ट रूप से देनी चाहिए। प्रभाष जोशी, चंदन मित्रा, अच्युतानंद मिश्र, आलोक पुराणिक, मृदुला सिन्हा, राम बहादुर राय, सुरेश शर्मा, विजय क्रांति, अरुण त्रिपाठी, अवधेश कुमार सहित अनेक पत्रकारों, साहित्यकारों और राजनेताओं ने लोकसभा चुनाव में मीडिया की भूमिका विषय पर मालवीय स्मृति भवन में मीडिया की भूमिका पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में कई सुझाव दिए और देशभर के पत्रकारों से संगठित होने को कहा।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नोएडा परिसर की ओर से आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रभाष जोशी ने कहा कि आदर्श पत्रकारिता करने के लिए सभी पत्रकारों को शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे। ऐसा न करने पर पत्रकार यूनियन द्वारा उनका निष्कासन भी तय होना चाहिए। अब सबसे अहम है पाठकों को आदर्श पत्रकारिता के पक्ष में लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि मीडिया की साख बचाने के लिए यह जरूरी है कि पैसे लेकर छापी जाने वाली खबरों को विज्ञापन का रूप दिया जाए। इसकी सूचना पाठकों को स्पष्ट रूप से देनी आवश्यक होनी चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा सदस्य चंदन मित्रा ने पत्रकारों को मार्केटिंग और रिपोर्टिंग दोनों का दायित्व देने को पत्रकारिता का दुरुपयोग करार दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी पत्रकारों को निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला सिन्हा ने इसके लिए लोकतंत्र के चारों स्तंभों को जिम्मेवार ठहराया। राजनेता सोमपाल शास्त्री ने कहा कि अखबारों का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है, लेकिन सामाजिक समस्याओं पर अखबार का कोई ध्यान नहीं है। संपादकीय नियंत्रण का स्थान नहीं रह गया है। अब सिर्फ प्रबंधन नियंत्रण शेष है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में व्यापार का पक्ष बढ़ रहा है। वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि मीडिया में पैसे के लेन-देन का दस्तूर कोई नई बात नहीं है। आज से चौदह साल पहले महाराष्ट्र में भी पार्टियों ने पैसे देकर अखबारों में तथ्यहीन जानकारी छपवा दी थी। नंदकिशोर त्रिखा और विजय क्रांति ने कहा कि पत्रकार गहरे संकट में हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र और नोएडा परिसर के निदेशक प्रोफेसर अशोक टंडन ने कार्यक्रम का समापन करते हुए घोषणा की कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।     

तस्वीर व खबर : साभार : अमर उजाला, दिल्ली संस्करण

 


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