परंपरागत पत्रकारिता संभव नहीं : श्रवण गर्ग

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श्रवण गर्गपाठकों को बीस मिनट बांधे रखने की होड़ : नागपुर में 'प्रेस से मिलिए' कार्यक्रम में बोले श्रवण गर्ग : दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग का मानना है कि पाठकों की जिज्ञासा के अनुरूप पत्रकारिता व अखबारों के कलेवर में बदलाव आया है। अखबारों की होड़ इस लक्ष्य के इर्द-गिर्द नजर आती है कि पाठकों को 20 मिनट तक कैसे जोड़कर रखा जा सके। ऐसे में पत्रकारों को भी बदलाव के प्रवाह के अनुरूप तैयार रहना होगा। श्री गर्ग रविवार दोपहर तिलक पत्रकार भवन में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बदल रही दुनिया में परंपरागत पत्रकारिता संभव नहीं है। यहां उम्र या महज अनुभव नहीं बल्कि तात्कालिक कार्य पूछा जाता है। 

उन्होंने मीडिया पर व्यवसायिकता का प्रभाव स्वीकारते हुए कहा कि अखबार में बदलाव के लिए पाठक भी जिम्मेदार हैं। समाज में विभिन्न घटनाओं का असर पहले जैसा नहीं पड़ रहा। लिहाजा अखबारी रपट का असर भी समाज पर तत्काल नहीं दिखता। भाषायी अखबारों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि पाठक अलग-अलग होने से अखबारों की समाचार चयन और प्रस्तुति की मान्यताएं भी अलग-अलग नजर आती हैं। नये दौर में पत्रकारों को आधुनिक संसाधनों से जुड़ना जरूरी है। पहले की तुलना में अब पत्रकारों, संवाददाताओं का कार्य बढ़ा है। ज्ञान के विस्फोट ने पाठकों में नई-नई जानकारी पाने की जिज्ञासा बढ़ा दी है। वे प्रिंट मीडिया से अपनी जिज्ञासा पूरी करने की अपेक्षा रखते हैं। सीमित दायरे में न रहकर पत्रकार क्षेत्र विशेष से बाहर जाएं तो उन्हें नये अनुभव मिलेंगे साथ ही अपनी कार्यक्षमता को नया आयाम देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि छाया चित्रकार कभी पत्रकारिता में बड़ा महत्व रखते हैं।


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