रिमोट हाथ में, फिर क्यों देखते हैं सनसनी?

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सेमिनार

पटना के कॉलेज ऑफ कामर्स के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग द्वारा कल 'मीडिया की सनसनी का समाज पर प्रभाव' विषय पर आयोजित सेमिनार में विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों ने स्वीकार किया कि मीडिया में आजकल खबरों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है।

इस प्रवृत्ति से समाज पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रभात खबर के स्थानीय संपादक स्वयं प्रकाश ने कहा कि आज लोग सनसनी फैलाने वाली चटपटी खबरों को पढ़ना या देखना चाहते हैं, इसलिए खबरिया चैनलों या समाचार पत्रों के लिए ऐसी खबरों को तरजीह देना मजबूरी हो गयी है। लेकिन आम लोगों को अपने कर्तव्यों को समझना होगा।

आकाशवाणी के समाचार संपादक संजय कुमार ने कहा कि यह सच है कि सभी वास्तविक घटनाओं को दिखाना जरूरी नहीं है। लेकिन मीडिया जो कुछ सामने लाता है, उसमें सच्चाई होती है। यह अलग बात है कि समाज पर इसका अच्छा असर नहीं पड़ता। लेकिन अपनी लोकप्रियता बढाने और बाजार वाद से प्रभावित होना उनकी मजबूरी हो सकती है लेकिन दर्शकों या पाठकों के पास वह कौन सी मजबूरी होती है जिस कारण वह चटपटी खबरों को देखना या पढ़ना पसंद करते हैं, हालाकि रिमाट तो उनके ही हाथों में होता है।

आईनेक्स्ट, पटना के समाचार संपादक विवेक कुमार ने कहा कि मीडिया के प्रति आम लोगों को सजग होना जरूरी है ताकि इसके कुप्रभाव से समाज को बचाया जा सके। वर्तमान में मीडिया भी बाजारवाद से प्रभावित है। यही कारण है कि अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए खबरों को सनसनी बनाकर पेश करना उनकी मजबूरी हो गयी है।

इंडिया टी.वी. के वरीय संवाददाता नीतिश चंद्रा ने कहा कि सभी खबरें सनसनी नहीं होती हैं लेकिन कुछ वास्तविक खबरों को भी दर्शक सनसनी समझ बैठते हैं। इसके लिए दर्शकों को अपनी समझ बदलनी होगी।

उर्दू दैनिक कौमी तनजीम के संपादक अजमल फरीद ने कहा कि दर्शकों और पाठकों पर निर्भर करता है कि वे किन चीजों को देखना पसंद करते हैं। ऐसे में आम लोगों का यह सामाजिक कर्तव्य है कि वे समाज को प्रभावित करने वाली खबरों को प्राथमिकता न दें बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़ी खबरों को देखने और पढ़ने में रूचि दिखाएं।

अध्यक्षीय संबोधन में दूरदर्शन पटना के सहायक निदेशक समाचार पुष्पवंत ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि आज सनसनी और समाज को प्रभावित करने वाली खबरें ही लोगों की पहली पसंद बन गयी है। यही कारण है कि लोग समाजिक सरोकार और संस्कृति से जुड़ी खबरों में रुचि नहीं दिखाते और सनसनीखेज खबरों के दुष्प्रभाव के लिए मीडिया को दोषी ठहराते है।

इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डा. सुभाष प्रसाद सिन्हा, सेमिनार के संयोजक डा. तारिक फातमी और डा. कौशलेन्द्र कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

पटना से लीना की रिपोर्ट


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