श्रद्धांजलि सभा में तब्दील हुई पत्रकारों की विरोध सभा

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कलम की ताकत को राजनैतिक गुंडे अपने हथियारों से नहीं झुका सकते हैं. लोकतंत्र को बचाए रखने में अपनी महती भूमिका निभा रहे कर्तव्यनिष्ट पत्रकारों को न तो डराया जा सकता है, न ही काम से रोका जा सकता है. पत्रकारों के साथ जनता ने भी ये उदगार महाकौशल इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोसिएशन द्वारा जबलपुर के मालवीय चौक पर आयोजित धरना एवं सांकेतिक उपवास में प्रकट किये. बड़ी संख्या में प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया और न्यूज़ एजेंसी के पत्रकारों ने सांकेतिक प्रदर्शन कर पत्रकारों की एकजुटता को प्रदर्शित किया.

सुबह 11 बजे प्रारंभ हुए धरना एवं सांकेतिक उपवास में महाकौशल इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोसिएसन के अध्यक्ष संजय चौधरी और श्रमजीवी पत्रकार संघ के परमानन्द तिवारी, नालिनकांत बाजपेई ने अपने विचार रखे.वक्ताओं ने कहा कि किसी भी कीमत पर पत्रकार अपने कर्तव्यों से नहीं डिग सकता है. हम इस तरह के हमलों से डरते नहीं. हम भी मुंहतोड़ जवाब देना चाहते हैं ताकि कोई मीडिया की ओर आंख न उठा सके.

धरने के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शारदा पाठक के निधन की दुखद खबर आने के बाद महाकौशल इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोसिएसन एवं श्रमजीवी पत्रकार संघ ने धरना समाप्त कर दिया और एक शोक सभा का आयोजन किया. पत्रकारों ने स्व. श्री शारदा पाठक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर पाठक जी के निधन को अपूरणीय क्षति बताया गया. पत्रकार संजीव चौधरी ने कहा कि श्री पाठक के यायावारी एवं फकीरी जीवन और पत्रकारिता के महान आदर्शों को लगातार जीते रहने से हम सभी प्रेरणा लेते हैं. शैलेश मिश्र ने कहा कि पाठक जी पत्रकारिता और इतिहास की चलती फिरती लाइब्रेरी थे.


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