पत्रकारिता सर्वशक्तिमान होती तो आज संघ नहीं होता

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हिन्दू और हिन्दुत्व आज मीडिया के निशाने पर हैं : भारत की पत्रकारिता सर्वशक्तिमान होती तो आज संघ नहीं होता। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल के सदस्य और वरिष्ठ प्रचारक राममाधव का। वे लखनऊ में संघ द्वारा संचालित मीडिया सेंटर विश्व संवाद केन्द्र पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन महामना पं. मदन मोहन मालवीय की जयंती के उपलक्ष्य में सप्ताह भर के कार्यक्रमों की श्रृंखला में किया गया था। 'मीडिया की भूमिका और वर्तमान परिदृश्य' विषयक संगोष्ठी में श्री माधव के अलावा दैनिक हिन्दुस्तान, कानपुर के सम्पादक अशोक पाण्डे और पाञ्चजन्य, नई दिल्ली के सम्पादक बल्देव भाई शर्मा ने भी विचार व्यक्त किये।

संगोष्ठी में संघ के प्रचारक राममाधव ने लोकतंत्र के चार स्तम्भों की परिकल्पना को और अधिक विस्तार देते हुए कहा कि अब लोकतंत्र का एक और पांचवां स्तम्भ है और वह हैं सामाजिक संगठन। लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता इस पांचवे स्तम्भ के प्रति संवेदनशील हो, तभी समाज के प्रति न्याय हो सकेगा। उन्होंने जहां पत्रकारिता के मिशन से प्रोफेशन हो जाने और अब इण्डस्ट्री का रूप धारण कर लेने की यात्रा पर प्रकाश डाला वहीं यह भी स्वीकार किया कि इस सबके बावजूद पत्रकारों का एक वर्ग आज भी मिशनरी भावना से काम करता है। कुछ लोग प्रोफेशन में भी मिशन को बनाये हुए हैं। उन्होंने पत्रकारिता की स्वतंत्रता को अक्षुण्य रखने पर बल दिया, लेकिन इसके साथ ही यह भी जोड़ा कि यह तभी स्वतंत्र मानी जाएगी जब प्रेस भी समाचार के प्रति पवित्र रहे। उन्होंने कहा कि मीडिया को आजादी अपने व्यवहार में भी रखनी होगी। तथ्यों की पवित्रता रखकर ही पत्रकारिता को स्वतंत्र रखा जा सकता है। समाज पर मीडिया के प्रभाव के बारे में उन्होंने बहुत ही स्पष्ट कहा कि समाचार पत्र कुछ भी लिखें या टीवी पर कुछ भी प्रसारित हो, समाज सही बात को स्वयं समझ लेता है। श्री माधव ने कहा कि यदि पत्रकारिता ही सर्वशक्तिमान होती तो आज संघ नहीं होता। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में मीडिया में आने वाली खबरों को अतिरंजित और अतिरेकी बताया। उन्होंने कहा कि संघ अपना काम करता है। लेकिन मीडिया उसके आनुशंगिक संगठनों के कामों में भी संघ का हस्तक्षेप देखता है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के अध्यक्ष बदले जाने पर अखबारों ने लिखा कि संघ का मिशन पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि संघ का काम किसी को हटाना या पद पर बैठाना नहीं है। संघ का लक्ष्य भारत को परम वैभव पर पहुंचा कर विश्व गुरु बनाना है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में समाचार और टिप्पणी को अलग-अलग दिया जाना चाहिए। समाचार को विश्लेषण के रूप में देने पर उन्होंने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इससे प्रेस की निष्पक्षता प्रभावित होती है। उन्होंने भारतीय मीडिया में बढ़ते व्यवसायीकरण पर चिंता जाहिर की है।

परिचर्चा में पाञ्चजन्य के संपादक बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि आज हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद मीडिया के निशाने पर है। आज के मीडिया को हिन्दुत्व का विचार साम्प्रदायिक नजर आता है जबकि भारत की पत्रकारिता हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की रही है। उन्होंने कहा कि पं. मदन मोहन मालवीय ने हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान को पत्रकारिता का ध्येय बनाया था। उन्होंने आज की पत्रकारिता में विश्वनीयता के संकट पर चिंता व्यक्त की। श्री शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता तात्कालिक कर्म नहीं है। यह समाज पर स्थायी प्रभाव छोड़ती है तथा जीवन मूल्यों से इसका गहरा सम्बन्ध है। यह देश के मानस को गढने का काम करती है।

दैनिक हिन्दुस्तान, कानपुर के सम्पादक अशोक पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि आजादी के पूर्व की पत्रकारिता की चुनौतियां आज नहीं हैं, इसके बावजूद मिशनरी पत्रकारिता अब भी जारी है। यदि समाज में मूल्यों का क्षरण होगा तो पत्रकारिता उससे अछूती नहीं रहेगी, क्योंकि वह भी इसी समाज का अंग है। उन्होंने मीडिया में आई गिरावट के लिए राजनीतिक दलों और भ्रष्ट होती ब्यूरोक्रेशी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इससे सम्बन्धित कई संस्मरण भी सुनाये। पत्रकारिता में आ रही इन सभी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने आशा बंधाई और कहा कि ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारतीय समाज बड़ी तेजी से जागरूकता की तरफ बढ़ रहा है।

परिचर्चा में विशिष्ट अतिथि गोविन्द राम अग्रवाल ने मदन मोहन मालवीय के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण प्रसंगों पर प्रकाश डाला। कहा कि मालवीय जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। एक समाज सुधारक के रूप में उनकी भूमिका अहम थी। संगोष्ठी का संचालन लखनऊ के डॉ. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गोविन्द पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम संयोजक भारत सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।


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