15 की शाम प्रभाषजी के नाम

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प्रभाष जोशी 15 जुलाई को 74 साल के हो जाते. उन्हें मिलना-जुलना, बोलना-बतियाना, खाना-खिलाना, उत्सव मनाना और संगीत सुनना अच्छा लगता था. इस परंपरा को बचाए रखने की पहल 'प्रभाष परंपरा न्यास' ने की है. पत्रकार जगत और प्रभाष जी के घर-परिवार के लोगों ने 'प्रभाष परंपरा' नाम देकर लोकार्पण, व्‍याख्‍यान और संगीत का एक सुघड़ कार्यक्रम 15 जुलाई की शाम के लिए तैयार किया है.

समय है 5.30 बजे. स्थान है गांधी समाधि के ठीक सामने गांधी दर्शन परिसर का सत्याग्रह मंडप. सबसे पहले जोशी जी की तीन किताबों का लोकार्पण किया जाएगा. ये तीन किताब हैं- '21वी सदी : पहला दशक', 'आगे अंधी गली है' और 'मसि कागद' (नया संस्‍करण). सभी विभिन्‍न विषयों पर उनके लेखों का संकलन हैं. प्रोफेसर सुधीर चंद्र पहला प्रभाष जोशी स्‍मारक व्‍याख्‍यान देंगे. विषय है : गांधी एक असंभव संभावना. नामवर सिंह के अलावा प्रभात खबर के संपादक हरिवंश भी इस मौके पर मंच पर होंगे. उसके बाद पं. कुमार गंधर्व के सुपुत्र मुकुल शिवपुत्र का गायन होगा, जो इस समारोह के लिये खास तौर पर आ रहे हैं.

जोशी की याद में वरिष्‍ठ पत्रकार बी.जी. वर्गीज की अध्‍यक्षता में प्रभाष परंपरा न्‍यास का भी गठन किया गया है. इसमें पत्रकार राम बहादुर राय, एच.के. दुआ, कुलदीप नय्यर, जस्टिस पी.वी.सावंत, आलोक नामवर सिंह, अशोक वाजपेयी, पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र और पटकथा लेखक जावेद अख्‍तर समेत 30 से ज्‍यादा न्‍यासी हैं. यह न्‍यास तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम करेगा. एक तो पत्रकारिता, सामाजिक, सांस्‍कृतिक सरोकारों पर शोध संवाद, दूसरे हिंद स्‍वराज पर वैचारिक बहस और तीसरे लोक संगीत का संरक्षण.

प्रभाष परंपरा के तहत 15 जुलाई को होने वाले लोकार्पण, व्याख्यान और संगीत के कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में प्रभाष परंपरा न्यास के बारे में कुछ यूं लिखा गया है- ''श्री प्रभाष जोशी 5 नवंबर 2009 को चले गए. उसके बाद 27 दिसंबर को उनके घर पर 30 मित्र मिले. बैठक की अध्यक्षता डा. नामवर सिंह ने की. वहां यह सुझाव आया कि प्रभाष जोशी की याद में एक न्यास बनाया जाए. वह 'प्रभाष परंपरा न्यास' हो. इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई कि न्यास को क्या-क्या करना चाहिए. पहले एक संलेख (ट्रस्ट डीड) तैयार किया गया जिस पर सबकी सहमति बनी.. उसका 19 जनवरी 2010 को दिल्ली में पंजीकरण कराया गया. श्री बीजी वर्गीज न्यास के अवस्थावक हैं. इस तरह 'प्रभाष परंपरा न्यास' बना.''

न्यास इन क्षेत्रों में काम करेगा- पत्रकारिता, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक और ग्रामीण सरोकारों पर शोध, संवाद और जनमत जागरण. हिंद स्वराज पर वैचारिक बहस. बोली, लोक परंपरा, लोक देवता और लोक संगीत जैसी सांस्कृतिक धरोहर की पहचान और उनका संरक्षण.

15 जुलाई के कार्यक्रम के लिए सभी सपरिवार निमंत्रित हैं. यह आयोजन गांधी समाधि के सामने गांधी दर्शन परिसर के सत्याग्रह मंडप में शाम साढ़े पांच बजे से शुरू होगा.


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