मीरा ने किया गुलाब कोठारी की पुस्तक का विमोचन

E-mail Print PDF

लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार ने सोमवार को पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी की पुस्तक "कृष्ण तत्व की वैज्ञानिकता" का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस पुस्तक से नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान और दर्शन से परिचित हो सकेगी। मीरा कुमार बोलीं- पुस्तक में गुलाबजी ने कृष्ण को लेकर अनेक जिज्ञासाओं का निराकरण किया है लेकिन हर निराकरण के पीछे सवाल खड़े हो जाते हैं।

यानी सवालों का सिलसिला कभी खत्म नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि पुस्तक में लालचवश मीरा को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते उन्होंने राधा तत्व को पूरे मनोयोग से पढ़ा है। मीरा के मुताबिक हमारे प्रतीकों की इतनी सुन्दर और गहरी विवेचना मैंने और कहीं नहीं देखी। संसद भवन के अपने कक्ष में पुस्तक के विमोचन समारोह में लोकसभाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि स्वच्छ पत्रकारिता और इतने गूढ़ विषयों के पाठन पठन के लिए गुलाबजी समय कैसे निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह गुलाबजी को तब से जानती हैं जब उन्होने जयपुर में निशक्तजनों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में पूरे समय तक गुलाबजी को मौजूद पाया, यह उनकी संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण है। कृष्ण तत्व की वैज्ञानिकता की चर्चा करते हुए मीरा कुमार ने कहा कि बेहद व्यस्त दिनचर्या के बावजूद कृष्ण को समर्पित गुलाबजी के गूढ़ चिंतन को पढ़ने से खुद को रोक नहीं सकीं।

मीरा कुमार ने अपना नाम रखने की सार्थकता बताते हुए कहा कि कृष्ण का नाम आते ही मानों कालिंदी की धारा की तरह ही उनका मन भी कृष्ण की ओर बहने लगता है। लोकसभा अध्यक्ष होने के नाते दसों दिशाओं में भ्रमण करने वाले लोगों से उनका मेलजोल होता रहता है लेकिन गुलाबजी ग्यारहवीं दिशा यानी मन, आत्मा, प्राण और आत्म तत्व की ओर जाने वाले पथिक हैं। शैव दर्शन के विद्वान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ कर्ण सिंह ने कृष्ण के प्रति समर्पित एक श्लोक का पाठ करते हुए कहा कि कोठारी की पुस्तक में मुंडकोपनिषद समेत तमाम उपनिषदों से बहुत ही सुन्दर श्लोक लिए गए हैं और आदि शंकराचार्य तो गीता को उपनिषदों का ही सार मानते थे। डॉ. सिंह ने कहा कि पत्रिका समूह के संस्थापक स्व. कर्पूरचंद कुलिश और गुलाब कोठारी को वे बहुत पहले से जानते हैं लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि कोठारी निर्भीक पत्रकारिता के साथ साथ इतने गूढ़ चिंतक भी हैं।

इस अवसर पर गुलाब कोठारी ने पुस्तक का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि इस किताब में उनका कुछ नहीं है। जो ज्ञान है वह किसी ने सिखाया है, मैं इसे कभी भी निजी धरोहर नहीं मान सकता। मैं तो बस अपने श्रद्धेय पिताजी और गुरूजी के अधूरे कार्यों को पूरा करने का प्रयास मात्र कर रहा हूं। मानव समाज को यह मेरी ओर से छोटी सी पुष्पकली है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को आजीविका से जोड़ने पर गहरी चिंता जताते हुए कोठारी ने कहा कि हमारे शास्त्र सार्वलौकिक, भौमिक और सर्वकालिक हैं, हम उन्हे किसी और स्वरूप में नहीं देख सकते । लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था ने हमारे संस्कारों और ज्ञान का बड़ा नुकसान किया है। और यह नुकसान इस हद तक है कि हम अपने शास्त्रों को सांप्रदायिक कहने लगे यानी हम धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अधर्म को स्वीकार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पुस्तक में उन्होंने यह समझने का प्रयत्न किया है कि कृष्ण वसुदेव के पुत्र यानी साधारण मनुष्य हैं और कब वह दिव्य यानी ईश्वर हैं। अब तक के तमाम ग्रंथों में कृष्ण को लेकर बहुत सारी विवेचनाएं मिलती ही नहीं। कृष्ण ने खुद चार धरातल दिए हैं लेकिन इसकी विवेचना कहीं मिलती ही नहीं। इससे हम गीता को भी ठीक से समझ नहीं पाये। हमारे शास्त्र कहते हैं सृष्टि में केवल ब्रह्म और माया है, यह दोनों कभी नष्ट नहीं होते इसी प्रकार पश्चिम का विज्ञान मानता है कि जगत में केवल पदार्थ और ऊर्जा है और इनका मात्र स्वरूप परिवर्तित होता है यह समाप्त नहीं होते। लेकिन हमारे विवेचनों में जहां ब्रह्म की महिमा गाई गई है वहां माया नदारद और शाक्त में केवल और केवल माया ही नजर आती है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे शास्त्रों में वर्णित संकेतों को ठीक ढंग से समझा जाये यानी डी-कोड करके पढ़ा जाये तो हमें उनकी काफी वैज्ञानिकता का पता चल सकता है।

कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एस जयपाल रेड्डी, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री डॉ. सीपी जोशी , कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल टी एन चतुर्वेदी , भाजपा की वरिष्ठ सांसद सुमित्रा महाजन और कांग्रेस सांसद डॉ. प्रभा ठाकुर भी मौजूद थीं। प्रारंभ में श्रीमती कल्पना कोठारी ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को राजस्थानी परम्परा अनुसार साड़ी ओढ़ाकर अभिनंदन किया। संचालन सहायक महाप्रबंधक प्रवीण नाहटा ने किया। पुस्तक विमोचन समारोह के कार्यक्रम की रिकॉर्डिग मंगलवार रात आठ बजे लोकसभा चैनल पर दिखाई जाएगी। साभार : राजस्थान पत्रिका


AddThis