भ्रष्टाचार के रोल माडल बन रहे हैं बड़े अखबारों के मालिक

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कंचना व्‍याख्‍यानवरिष्ठ पत्रकार एवं अखबारों में खबरों की खरीद-फरोख्त की जांच के लिये गठित भारतीय प्रेस परिषद की समिति के सदस्य परंजॉय गुहा ठकुरता ने पत्रकारित की सुचिता पर जोर देते हुए पत्रकारों का आह्वान किया कि वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेडें. दिल्ली में सातवीं कंचना स्मृति व्याख्यानमाला में 'खबरों की खरीद फरोख्त, पत्रकारिता एवं लोकतंत्र' विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए परंजॉय गुहा ठकुरता ने कहा कि पत्रकारिता में आड़ में कुछ लोगों ने विज्ञापन एवं खबरों का घालमेल कर दिया है.

परिषद की जांच से संबंधित कई पहलुओं का विवरण देते हुए श्री ठकुरता ने बताया कि किस तरीके से कुछ बड़े अखबार समूह के मालिक खबरों के गोरखधंधे में शामिल हैं और इससे लोकतंत्र के साथ-साथ पत्रकारिता की गरिमा और प्रतिष्ठा को आघात पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि इस मामले पर लोक सभा और राज्य सभा में काफी बहस हुई है. लेकिन राजनीतिक दल बहुत खुल कर प्रतिकार नहीं कर रहे हैं. चुनाव में खबरों की खरीद-फरोख्त का काम सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं और अखबार भी कंपनी अधिनियम और आयकर अधिनियम समेत कई तरह के उल्लंघनों में शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि इस काम में सबसे बड़े अखबार सबसे ज्यादा शामिल हैं और वे छोटे अखबारों के लिये भ्रष्टाचार का एक रास्ता दिखा रहे हैं. फिर भी उन्होंने इस बात का संतोष जताया कि कई अखबार खबरों की खरीद-फरोख्त के खिलाफ खड़े हुए हैं और बिहार के चुनाव में चुनाव आयोग ने भी एक अलग कमेटी बनायी है. लेकिन यह बीमारी महामारी न बन जाये, इस नाते इसे रोकने के लिये सभी को आगे आना होगा अन्यथा इससे मीडिया की विश्वसनीयता समाप्त हो जायेगी.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विख्यात पत्रकार एवं नई दुनिया के राष्ट्रीय संपादक मधुसूदन आनंद ने अपने विद्वतापूर्ण वक्तव्य में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मूल्यों और कंचना पुरस्‍कारमिशनरी भाव का उल्लेख करते हुए बताया कि आजादी के बाद भी पत्रकारिता में मूल्य दिखाई देते थे, लेकिन धीरे-धीरे पत्रकारिता सकारात्मकता से नकारात्मकता की ओर उन्मुख हो गयी है. हमारे लिये सबसे बड़ा चिंता का विषय यह है कि खबर तथा विज्ञापन के बीच की रेखा धुंधली हो गयी है. और भ्रष्टाचार को संस्थागत स्वरूप मिल गया है. उन्होंने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई की उपभोक्ता समाज में टेलीविजन, शिक्षित करने की बजाय महज मनोरंजन प्रधान भूमिका में हो गया है. उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ सभी को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है.

जाने-माने समाज शास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार ने विषय प्रस्तावना में मीडिया के साथ शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य पेशों में आये व्यापक बदलाव और अतिशय व्यवसायिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबसे लोकतंत्र को ऐसा खतरा नहीं है, जो परिकल्पित किया जा रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने प्रस्तावना में कंचना स्मृति व्याख्यानमाला तथा समारोहों के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि भविष्य में दिल्ली से बाहर कार्यक्रम की योजना है. सामाजिक कार्यकर्ता राम कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया. कार्यक्रम का संचालन बाबूलाल शर्मा ने किया. प्रोफेसर ओम प्रकाश ने स्वर्गीय मार्कंडेय सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला. अतिथियों ने कंचना स्मृति व्याख्यानमाला 2009 की पुस्तिका का भी लोकार्पण किया.

समारोह में इस वर्ष का कंचना स्मृति पुरस्कार सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता स्वर्गीय मार्कंडेय सिंह को मरणोपरांत दिया गया. यह पुरस्कार उनके करीबी सहयोगी व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर आनंद कुमार ने प्राप्त किया.

इस कार्यक्रम में गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा बहन, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र, पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी, डा. रामकृपाल सिन्हा, रामाशीष राय, मृदुला सिन्हा, विख्यात हिंदी सेवी मदन विरक्त, प्रवाल मैत्र, बनारसी सिंह, जवाहर लाल कौल, प्रेस क्लब आफ इंडिया के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, भारत कृषक समाज के अध्यक्ष डा. कृष्णवीर चौधरी, कंचना स्मृति न्यास के अध्यक्ष रामबहादुर राय, प्रबंध न्यासी अवधेश कुमार, जवाहर सिंह, निर्दोष त्यागी समेत कई क्षेत्रों के विख्यात समाजसेवी, पत्रकार एवं लेखक आदि उपस्थित थे.


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