छत्तीसगढ़ सरकार वीडियोकान समूह सलमान खान

E-mail Print PDF

घटिया डायलाग सुनाने वाले सलमान खान को किया गया सम्मानित: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच से सलमान ने किया वीडियोकान ग्रुप का विज्ञापन : घटिया डायलाग, अश्लील नाच और भ्रष्ट मिलीभगत से अपमानित हुई जनता : छत्तीसगढ़ राज्य को अस्तित्व में आए आए 1 नवंबर को दस साल हो जाएंगे। दीपावली के कारण एक सप्ताह तक चलने वाला राज्योत्सव मंगलवार से शुरू हो गया।

राज्य के कर्णधारों पर उस समय क्या गुजरी होगी जब उनके ही राज्य के राज्योत्सव के मंच से फिल्म अभिनेता सलमान खान ने मौजूद जनता को बताते हुए वीडियोकॉन समूह के मालिक अनिरुद्ध धूत का विज्ञापन कर दिया कि ये हैं वीडियोकॉन समूह के मालिक अनिरुद्ध धूत और ये छत्तीसगढ़ में पावर प्लांट खोलने जा रहे हैं, इससे यहां बड़ी संख्या में नौकरी मिलेगी। इस तरह तो सलमान ने अंदर का सारा तिया-पांचा जनता के सामने उजागर कर दिया कि उन्हें यहां बुलाने के एवज में राज्य सरकार की तरफ से अनिरुद्ध धूत को क्या सहूलियतें मिली होंगी? क्योंकि इससे पहले शासन खुद यह कहता रहा है कि वीडियोकॉन समूह की पहल पर ही सलमान आ रहे हैं।

सलमान आए और मंच पर दबंग फिल्म का मशहूर डॉयलॉग मारा कि "इतने छेद कर देंगे कि समझ नहीं पाओगे सांस कहां से लें और …… कहां से"। क्या राज्य के कर्णधारों समेत संस्कृति के रखवाले राज्य के सबसे बड़े मंच से बस यही डॉयलॉग सुनवाने लाए थे सलमान को? इस बात का जवाब कौन देगा कि सलमान ने महज पांच मिनट के लिए शासन से कितने का भुगतान लिया? और अगर नहीं लिया, उनका भुगतान वीडियोकॉन समूह कर रहा है तो सरकार इस समूह को इसके एवज में क्या विशेष देने जा रही है। सीधी सी बात है कि वीडियोकॉन समूह या उसके मालिक अनिरुद्ध धूत कोई जनसेवा नहीं कर रहे हैं या उन्हें छत्तीसगढ़ की माटी इतनी वंदनीय नहीं लगती कि वे सलमान को यहां ले आएं और बदले में सरकार से कुछ न लें। सरकार से लेकर शासन के प्रतिनिधियों को इस बात का जवाब देना चाहिए।

दूसरी बात यह कि बात-बात में छत्तीसगढ़िया संस्कृति का दंभ भरने वाले और मंच से सलमान के मुंह से "छत्तीसगढ़िया, सबले बढ़िया" का नारा बुलवाने वाले सरकार के कर्णधारों व संस्कृति के पहरुओं को अब यह दंभ भरना छोड़ देना चाहिए। उनके सामने ही राज्योत्सव के मंच पर सयाली भगत का जो अशालीन नृत्य चल रहा था उसे देखते हुए उन्हें यह  महसूस संजीत त्रिपाठीजरूर हुआ होगा कि वे रायपुर के मंच पर नहीं बल्कि मुंबई के किसी फिल्मी मंच पर कार्यक्रम देख रहे हैं जहां शरीर दिखाऊ वस्त्रों में सजी बाला " सारे हसीं, अहा नाचे-नाचे" से लेकर "हरि ओम हरि" और "लैला ओ लैला" जैसे गानों पर नाच रही थी और  'छत्तीसगढ़' की निराली संस्कृति के पहरूए मूकदर्शक बने तालियां पीट-पीटकर उसकी हौसला आफजाई कर रहे थे।

रायपुर से संजीत त्रिपाठी की रिपोर्ट.


AddThis