पुलिसवालों की तरह बदनाम हो गए हैं पत्रकार भाई

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मंच से बोलते लखनऊ के एसपी सिटी डा. अशोक गौतम: एक पुलिस अधिकारी का लखनऊ में मंच से बयान : यशवंत बोले- नीरा कांड पत्रकारों के लिए बड़ा सबक : लखनऊ । जब हर कहीं सब कुछ फिक्स लगने लगा हो और एक गहन चुप्पी सब ओर दिख रही हो तो ऐसे में कुछ लोग पत्थर उछालने का काम करते हैं, बात-बहस शुरू करते हुए सवाल उठाने का काम करते हैं. रिजवान चंचल ने लखनऊ में पिछले दिनों ऐसा ही किया. चचा हरपाल सिंह के सानिध्य में रिजवान चंचल ने पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, अधिकारियों आदि को एक मंच पर बिठाया और बाजार से लेकर सत्ता, मीडिया तक की चर्चा करा डाली.

सबने अपनी बात रखी लेकिन जो एक चीज कामन दिखी वो ये कि सबको महसूस हुआ कि देश व समाज में सब ठीक नहीं चल रहा है. गड़बड़ियां इतनी बढ़ गई हैं कि उनके निदान के रास्ते बहुत कम दिखने लगे हैं. सो, हर कोई अपने तरीके से समस्या बताता हुआ नजर आ रहा है लेकिन समस्या के हल के रास्ते किधर हैं, ये ज्यादातर लोगों को मालूम नहीं है. लखनऊ में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में समारोह का आयोजन पत्रकारों के हितार्थ समाजसेवा, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित जनजागरण मीडिया मंच द्वारा किया गया.

समारोह में चर्चा का विषय था- ''बाजार, सत्ता व पत्रकारिता : खतरे और उम्मीद''. इस गोष्ठी में पैसे की बढ़ती महिमा के कारण पत्रकारिता के गिरते स्तर पर सबने चिंता जताई. समारोह में जन जागरण मीडिया मंच के महासचिव और रेड फाइल पत्रिका के सम्पादक रिजवान चंचल द्वारा सम्पादित ‘जागो भारत जागो’ पुस्तक व ‘महक’ शमां की कृति ‘कतरा-कतरा जिन्दगी’ का विमोचन भी किया गया.

समारोह के मुख्य अतिथि प्रेस सूचना ब्यूरो भारत सरकार के पूर्व निदेशक के.डी द्विवेदी थे. उन्होंने अपने सरकारी सेवा के दौरान मीडिया के लोगों से संपर्क का जिक्र करते हुए कहा कि अखबारों के मालिकान शुरू से ही विज्ञापन को प्राथमिकता पर रखते थे और यही कारण है कि मैनेजरों ने समाचारों को हमेशा दोयम दर्ज पर रखा और विज्ञापन के लिए कुछ भी करने को तैयार रहे. चर्चित न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया के सम्पादक यशवंत सिंह ने पिछले दिनों कुख्यात दलाल नीरा राडिया से संबंधित टेपों के जारी होने जाने के बाद पत्रकारिता से जुड़े कई चेहरों पर से नकाब उतरा है और यह सिलसिला आगे बढ़ने की संभावना है. नीरा कांड इस देश की मीडिया के लिए बड़ा सबक है. बरखा दत्त, प्रभु चावला, वीर सांघवी जैसे लोग जब इतने पतित हो सकते हैं तो समझा जा सकता है कि आखिर आज की पत्रकारिता का भविष्य क्या है. यशवंत ने न्यू मीडिया को संभावनाओं से भरा बताते हुए आह्वान किया कि जिन्हें सच्चे मन से मिशनरी पत्रकारिता को करना है वे न्यू मीडिया के साथ जुड़ें, बेहद कम संसाधनों में अच्छा काम करने के मौके यहां होते हैं.

पुलिस अधीक्षक नगर डा. वी.पी.अशोक ने कहा कि मेरी कामना है कि स्वच्छ पत्रकारिता और पवित्र भाव रखने वाले पत्रकार सफल हों और वे राष्ट्रीय विकास में अपना योगदान देते रहें. उन्होंने कहा कि उचित का स्वागत करना, अनुचित पर कलम से प्रहार करना व आमजनों के समक्ष वास्तविकता को बिना भेदभाव के प्रस्तुत करना, यही पत्रकारिता का मूल धर्म है. इस क्षेत्र में काम करने वालों में स्वाभिमान होना चाहिए पर अहंकार नहीं. आज स्थिति यह है कि पुलिस वालों की भांति पत्रकार भाई भी बदनाम हो गए हैं. पुलिस और पत्रकार, दोनों अपनी विश्वसनीयता कायम करने पर जोर दें, तभी हालात बेहतर बनेंगे.

जन जागरण मीडिया मंच के महासचिव रिजवान चंचल ने पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप पर पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में मीडिया में खबरों को सबसे पहले लोगों तक पहुंचाने के लिए होड़ लगी हुई है. पत्रकारिता धीर-धीरे व्यवसाय बनती जा रही है जिसमें बड़े-बड़े औद्योगिक घराने आ चुके हैं. जिंदगी कितनी मजबूर है, मंहगाई से आमआवाम त्रस्त है, लोग भूखों मर रहे हैं, जिस्म की कौन कहे, कोख बेचने को ममता विवश है लेकिन लेखनी शान्त है. चंचल ने कहा कि लेखनी से ही समाज में राष्ट्रभाव का जागरण किया जाना चाहिये. जन जागरण मीडिया मंच सभी पत्रकार साथियों से यही आह्वान करता है कि हम सब मिलकर राष्ट्र व समाज को लेखनी के जरिये ऐसी दिशा दें जिससे राष्ट्र सशक्त व समाज विकसित हो सके.

वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया मंच के अध्यक्ष चचा हरिपाल सिंह ने कहा कि भड़ास4मीडिया के सम्पादक ने शोषित उपेक्षित पत्रकारों को भड़ास निकालने को जो मंच दिया है उससे पत्रकारों का उत्साहवर्धन हुआ है और पत्रकारिता से गंदगी साफ होने का सिलसिला शुरू हुआ है. श्री सिंह ने जन जागरण मीडिया मंच के उददेश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये देश के आर्थिक सामाजिक राजनैतिक हालात का विश्लेषण किया. उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महात्मा गांधी ने जनजागरण को ही आधार बनाया था किन्तु आज की परिस्थितियां और भी जटिल हैं. धनवान लोग ज्यादा धनवान होते चले जा रहे हैं वहीं हाशिये पर खड़े लोग भूख से, ऋणाग्रस्तता से अपमानित होने पर आत्म हत्या को बाध्य हैं.

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नारायण ‘प्राण’ ने कहा ‘जागो भारत जागो’ नामक  पुस्तक लेखन से चंचल ने प्रमाणित कर दिया है कि वे नाम के अनुरूप चंचल नहीं वरन एक गम्भीर साहित्यकार हैं. आज का भारतीय परिवेश राष्ट्रीयता से कितनी दूर जा चुका है इसका वर्णन चंचल ने बेवाकी के साथ किया है. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व न्यायाधीश आर.सी. निगम ने कहा कि समाज में आए सारे परिवर्तनों के बाद सामाजिक मूल्य आज भी कायम हैं. श्री निगम ने कहा कि रिजवान चंचल द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘जागो भारत जागो’ का शब्द विन्यास एवं प्रकाशित विवरण स्वयं इस बात का साक्षी है कि उनका विश्वास व्यावसायिक पत्रकारिता में नहीं बल्कि साफ सुथरी जनहितकारी पत्रकारिता व नीतियों में है.

वरिष्ठ समाजसेवी व लोक सेनानी कल्याण परिषद के प्रदेश महासचिव चतुरभुज त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता के अपने मूल्य और उसका अपना एक धर्म है, किन्तु आज पत्रकारिता अपने मिशन से इतर कार्य कर रही है जिससे उसकी विश्वसनीयता घटी है. समारोह में नागरिक मेल के सम्पादक अनूप राय, पदमजात प्रभात, वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्णकेतु भारद्वाज,  समाजसेवी मीना खान, पत्रकार आर.के पाण्डेय, योगेश श्रीवास्तव, अजय विक्रम सिंह, बी.बी सिंह सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे.

हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टिविस्ट, लखनऊ में संगोष्ठी के बारे में प्रकाशित खबर


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