पत्रकार के लिए रचनात्मकता दिखाने की गुंजाइश नाममात्र ही

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: राष्ट्रीय सहारा के वरिष्ठ पत्रकार रोशन का माखनलला में लेक्चर : भोपाल। मीडिया में प्रतिस्पर्धा बहुत तेजी से बढ़ी है, अब पत्रकार के लिए रचनात्मकता दिखाने की गुंजाइश नाममात्र ही बची है। लेकिन अखबारों में अभी भी रचनात्मक कार्यों के लिए स्थान है। यह बात कही दैनिक राष्ट्रीय सहारा के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रोशन ने। वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल के जनसंचार विभाग में विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि पत्रकार के सामाजिक एवं निजी जीवन के बीच काफी महीन अंतर रह जाता है क्योंकि जिस तरह का ये पेशा है उसमें काम करने वाले को काफी समर्पित रहने की आवश्यकता होती है। इस दौरान विद्यार्थियों ने उनसे प्रश्न भी पूछे। एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जैसे-जैसे पत्रकारिता में व्ययवसायीकरण बढ़ा है, उतनी तेजी से भ्रष्टाचार भी बढ़ा है। अपनी कठिनाई के दिनों का अनुभव बांटते हुए उन्होंने कहा कि कठिन समय ही सबसे अच्छा शिक्षक साबित होता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वह शुरुआती दौर में निराश होने के बजाय सब्र और संयम से काम लें। इस दौरान विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी, डॉ.मोनिका वर्मा, सदीप भट्ट एवं विश्वविद्यालय के प्रकाशन अधिकारी सौरभ मालवीय मौजूद रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में छात्रा शालिनी ने श्री रोशन का स्वागत किया।


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