विरोध की सीमा और समर्थन की मर्यादा तय करे मीडिया

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: लखनऊ विश्‍वविद्यालय में पत्रकारिता संस्‍थान में स्‍टूडियो का लोकार्पण : समाज और राष्ट्रहित में मीडिया को विरोध की सीमा और समर्थन की मर्यादा निर्धारित करनी चाहिए। उदारीकरण ने बाजारवाद का प्रभाव बढ़ाया। पत्रकारिता भी इससे मुक्त नहीं है, लेकिन स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। यह संक्रमणकाल है। अच्छाई और बुराई के इस संक्रमण में अन्ततः अच्छाई की विजय होगी, इसके लिए अच्छाई के पक्षधरों को मुखर होना पड़ेगा। पत्रकारों को देवर्षि नारद से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी तरह व्यक्तिगत हितों को छोड़कर समाजहित में समर्पित होना पड़ेगा, इससे सकारात्मक परिवर्तन होगा। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कही।

वह लखनऊ पत्रकारिता जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में स्टूडियो लोकार्पण समारोह के अवसर पर बोल रहे थे। उहोंने कहा कि अपना समाज संक्रमण काल से गुजर रहा है, इससे उजाले के पक्षधर रास्ता बना सकते हैं। इससे पत्रकारों की अहम भूमिका है। उन्हें नारद जी से प्रेरणा लेनी होगी। वह निर्गुट, विश्वनीय और सर्वसंचारी थे। उनके कार्य व्यक्तिगत हित के लिए नहीं थे। समाज, जीवनमूल्य और अच्छाई के लिए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्पादकों की कमी नहीं जिनके अग्रलेख हजारो, लाखों लोगों को प्रेरणा देते थे। समाज को आन्दोलित करते थे, उनके लिए पत्रकारिता एक मिशन थी।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार सुशील सिंह ने पत्रकारिता के व्यवसायीकरण पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने ‘‘समाज जागरण के लिए पत्रकारिता’’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया में समाचार तो दिखाये जा रहे हैं, लेकिन विजुअल, टीआरपी से जुड़ा है, यह व्यवसाय आधारित है। इसमें विज्ञापनदाताओं को जोड़ना महत्वपूर्ण होता है। इसमें सेन्सर बोर्ड का हस्तक्षेप नहीं होता है। टीवी को बुद्धुबक्सा कहा गया है और यह मान लिया गया कि इसमें गम्भीर विषय नहीं दिखायें जाने चाहिए। मीडिया बाजार की गिरफ्त में है। पहले विज्ञापन के लिए जगह निर्धारित थी। प्रथम पृष्ठ पर बीस गुणा तीन से अधिक का विज्ञापन नहीं लिया जाता था। अब पूरा प्रथम पृष्ठ विज्ञापन के हवाले हो गया। समाचार अन्दर के पेज में चले गए। सम्पादक नाम की संस्था समाप्त हो गयी, इससे विश्वसनीयता घटी, पेड न्यूज का चलन शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि विज्ञापन आवश्यक है। लेकिन यह सब कुछ नही। यह विश्वसनीयता की कीमत पर नहीं होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि एसके कालिया ने कहा कि पत्रकारिता के छात्रों को राष्ट्रीयता की शिक्षा देने पर बल दिया। पत्रकारों के प्रोत्साहन हेतु ‘‘समाज निर्माण सम्मान’’ पुरस्कार शुरू करना चाहिए।

इसके पहले सुरेश सोनी ने स्टूडियो का लोकार्पण किया। लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में प्रिन्ट व इलेक्ट्रानिक मीडिया की आधुनिक विधाओं की सम्पूर्ण जानकारी देने की व्यवस्था की गई है। आधुनिक सुसज्जित स्टूडियों, फाइनल कट-प्रो एडिटिंग सिस्टम, आधुनिक कैमरे, कम्प्यूटर लैब, प्रोजेक्टर तथा इन्टरनेट सहित सभी आधुनिक संसाधन उपलब्ध है। तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यक्त्वि विकास को भी अध्ययन में शामिल किया गया। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता महाराणा प्रताप ग्रुप के सचिव शैलेन्द्र भदौरिया ने की। समारोह का संचालन संस्थान के निदेशक अशोक सिन्हा ने किया।

विश्व संवाद केन्द्र पर तीन दिवसीय पत्रकारिता कार्यशाला का भी उद्घाटन हुआ। इसमें माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बलदेव राज गुप्त सहित अनेक प्रमुख पत्रकार, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए। लोकार्पण समारोह समारोह में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही, हृदयनाराण दीक्षित, अशोक बेरी, शिवनारायण, कृपाशंकर, अमरनाथ, दिलीप अग्निहोत्री सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।


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