मीडिया में बढ़ती अश्‍लीलता चिंताजनक

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: टीवी पत्रकारों ने रखी अपनी राय : मीडिया, खासकर मनोरंजन चैनल्स पर परोसी जा रही अश्लीलता पर एक गरमागरम परिचर्चा इंदौर प्रेस क्लब के राजेंद्र माथुर सभागार में हुई। देश के दिग्गज पत्रकारों ने मनोरंजन के नाम पर दिखाए जा रहे फूहड़ और भद्दे कार्यक्रमों पर अपनी राय व्यक्त की। सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि चैनल्स पर दिखाए जा रहे कार्यक्रमों की परिभाषा तय हो, उनके प्रसारण का समय निश्चित किया जाए। इस टॉक शो में स्कूल, कॉलेज के छात्र, प्रबुद्धजन और नेता भी श्रोता की भूमिका में थे।

इन दिनों विभिन्न चैनल्स पर रिएलिटी शो के बहाने अश्लीलता परोसी जा रही है। संसद से लेकर सड़क तक इस विषय पर चर्चा हो रही है। इसी के मद्देनजर इस कार्यक्रम की रुपरेखा तय की गई थी। स्वागत भाषण प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने दिया। सूत्रधार हृदयेश दीक्षित थे।

हावी हो रहा है बाजारवाद

आज तक के पत्रकार आशीष जोशी ने कहा कि अश्लीलता क्या है और क्या नहीं? इसकी एक महीन रेखा है। न्यूज और मनोरंजन चैनल्स बाजारवाद से गायब न हो जाएं, इस डर से सब कुछ दिखाया जा रहा हैं। दर्शकों को आकर्षित करने के साथ टीआरपी बढ़ाने के लिए अश्लीलता का सहारा लिया जा रहा है। यह एक सोचा-समझा अपराध है। इसे रोकने के लिए चैनल्स को सख्त कदम उठाना चाहिए।

तो पानी सिर से ऊपर निकल जाएगा

न्यूज 24 के सईद अंसारी ने कहा कि न्यूज चैनल्स से कहीं ज्यादा अश्लीलता मनोरंजन चैनल दिखा रहे हैं। इन्हें रोकना होगा, नहीं तो पानी सिर के ऊपर निकल जाएगा। आज स्थिति यह है कि फिल्मों और सीरियल में गंभीर संदेश होने के बावजूद अश्लीलता उन पर भारी पड़ती है। मीडिया उन संदेशों को उठाने के बजाए फूहड़ता को दिखाना ज्यादा पसंद करता है।

रिमोट आपके हाथ में है

एनडीटीवी की सिक्ता देव ने कहा कि दर्शकों के हाथ में सुपरपॉवर है। जो चैनल भद्दे कार्यक्रम दिखाएं, उसे रिमोट से हटा दीजिए।  दिनभर में दिखाए जाने वाले हर कार्यक्रम का प्रसारण समय तय होना चाहिए, ताकि दर्शकों को जानकारी रहे कि कौनसा कार्यक्रम कब देखना है। यही तरीका लगाम कसने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दिक्कत हमारी सोच में है

आज तक के सुमित अवस्थी ने कहा कि चैनल्स को दोष देना ठीक नहीं है, दिक्कत तो हमारी सोच में है। हम अश्लीलता भरे कार्यक्रम देखना ही बंद कर देंगे तो कौन चैनल प्रसारण करेगा। इन दिनों दिखाए जा रहे रिएलिटी शो टीआरपी में कहीं नहीं टिकते हैं। यह दर्शकों की नापसंदगी का ही नतीजा है।

मीडिया घराने आगे आएं

आईबीएन-7 के संदीप चौधरी ने कहा कि दर्शकों की पसंद को दोष देना ठीक नहीं है। मीडिया समूह और पत्रकारों को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। क्या दिखाया जाए, क्या छापा जाए, इसके लिए दफ्तर में चर्चा करना होगी। शुरुआत मीडिया को करना होगी, तभी कुछ सकारात्मक हो सकता है।


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