पेड न्यूज, राडिया प्रकरण विकृति का परिणाम : प्रो. कुठियाला

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: लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्‍थान में कार्यशाला का समापन : पश्चिमी पत्रकारिता अप्रकृतिक असमाजिक और अमानवीय है। हमने भी इसी का अनुसरण किया, इससे विकृति उत्पन्न हुई। पेड न्यूज, राडिया प्रकरण इसी विकृति का परिणाम है। पत्रकारिता बाजारू वस्तु बन गई। सबसे ऊँची बोली लगाने वाला न्यूज का मालिक बन गया। इससे समाज और राष्ट्र का हित नहीं हो सकता। मीडिया के बाजारीकरण में सिद्धान्तों की कीमत नहीं रह गई। सामाजिक संवाद के सशक्त माध्यम को इन विकृतियों को दूर करना होगा। इसे भ्रष्ट बाजार बनने से रोकना होगा। नारद के चौरासी भक्तिसूत्र में इनका समाधान है। यह बात माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विश्व संवाद केन्द्र में कही।

वह लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक मीडिया कार्यशाला के समापन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि करीब पच्चासी प्रतिशत समाचारों में समाहित नदारद रहते हैं। मीडिया और मनोरंजन में निवेश सर्वाधिक लाभप्रद और आकर्षक बन गया। यही पश्चिमी धारणा है। भारत में करीब सत्तर प्रतिशत मीडिया तन्त्र केवल सात समूहों में निहित है। ये मीडिया की दशा तय करते हैं। उसे नियन्त्रित करते हैं। इनका खुला दावा है कि समाज को सूचना देना या शिक्षित करना नहीं बल्कि विज्ञापन दाताओं को कहां तक पहुँचाना है, जिनकी जेबें भारी हैं। समाचार बिकाऊ पैकेज बन गया।

श्री कुठियाला ने कहा कि देवर्षि नारद के सभी संवाद लोकहित के लिए थे। इन्हें आधुनिक मीडिया आधार बनाना होगा। वाद को विवाद, वितण्डावाद नहीं बल्कि संवाद बनाना होगा। तभी लोकहित में तर्कसंगत परिणाम निकलेगें। विश्व के लिए वैकल्पिक संवाद की व्यवस्था प्रस्तुत करनी होगी। यह भारतीय दर्शन में है। सत्यवद पत्रकारिता का सूत्र है, यहां तो लोकगीतों में भी पत्रकारिता के संदेश हैं, असत्य न बोलने, अनुचित कार्य ना करने तथा सामाजिक सौहार्द के संदेश पत्रकारिता में निहित होने चाहिए। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इन तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए।

समापन समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी ने की। उन्होंने कहा कि अच्छी पत्रकारिता के लिए ज्ञान आवश्यक है, लेकिन इसे व्यवहार में लाना होगा। निजी, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय हितों में एकरूपता होनी चाहिए। ये विरोधभासी नहीं हो सकते। इसके लिए व्यापक दृष्टिकोण रखना होगा।

संस्थान के निदेशक अशोक सिन्हा ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में 90 विद्यार्थियों ने भाग लिया। समापन कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अवध प्रान्त सह संघचालक प्रभुनारायण श्रीवास्तव, सुभाष सिंह, राजेन्द्र मोहन सक्सेना, डा. दिलीप अग्निहोत्री, काशी एवं गोरक्ष प्रान्त प्रचार प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना, वीरेन्द्र भट्ट, ए.के. सिंह, सत्येन्द्र अवस्थी, डा. सुनील अग्रवाल सम्मिलित हुए।


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