खूबसूरत दिमाग से ही खूबसूरत संचार संभव : डा. कलाम

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: 11वां अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लोक संचार सम्मेलन आयोजित :  खूबसूरत दिमाग से ही खूबसूरत संचार संभव है। तीसरी दुनिया के देशों मे भारत का आज अग्रणी स्थान केवल इसलिए है कि यहॉं की लोकतांत्रिक जन प्रणाली ने विज्ञान और प्रौद्यौगिकी को सहजता से अपनाया है। ये बात भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने नई दिल्ली के पूसा कांप्लेक्स के शिंदे सभागार में 11वें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लोक संचार सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर कही।

उन्होंने कहा कि  आज भारत विश्व के कुछ उन चुनिन्दा देशों में से है, जहां विज्ञान संचार एक संगठित अभियान के रूप अपनी पहचान बना चुका है। डा. कलाम ने कहा कि विगत तीन दशकों में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् ने समूचे देश मे विज्ञान और प्रौद्योगिकी लोक संचार की दिशा मे उल्लेखनीय कार्य किया है। और ऐसे ही प्रयासों का फल है कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज अत्यंत सशक्त स्थान हासिल कर चुका है। पूर्व राष्ट्रपति ने जन समस्याओं के प्रभावी निवारण में विज्ञान संचार की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आम जनता विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति से जितना ही परिचित होगी वह समाज उतना ही विकास एवं अनुकूल वातावरण के सृजन मे सहयोग देगा। कोई भी राष्ट्र युवाओं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्राथमिकता दिए बिना सशक्त नही बन सकता। पूर्व राष्ट्रपति ने पारम्परिक रूप से दीप जलाकर सम्मेलन का औपचारिक उद्धघाटन किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डा. टी रामासामी ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में भारत में विज्ञान संचार के प्रयासों एवं भावी रूपरेखा की एक झलक प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसी भी सम्प्रभुता सम्पन्न देश मे विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास उसकी पहली प्राथमिकताओं मे होना चाहिए। आज विश्व के अग्रणी एवं विकसित देश विज्ञान और प्रौद्योगिकी की बढ़त के कारण ही शक्ति और शौर्य का केन्द्र बने हुए हैं। भारत ने भी इसलिए ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है और विज्ञान के जनसंचार पर जोर दे रही है।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् के अध्यक्ष एवं विज्ञान सलाहकार डा. कमलकांत ने स्वागत सम्बोधन में कहा कि विज्ञान संचार की कोई सीमा नहीं होती, उसका महत्व सरहदों से पार होता है। तदन्तर पीसीएसटी नेटवर्क के अध्यक्ष डा. टॉस गैस्कोईन ने विश्व मे विज्ञान संचार के परिदृश्‍य और पीसीएसटी की भूमिका पर विस्‍तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि रहे भारत सरकार के भू-विज्ञान सचिव डा. शैलेष नायक ने पहली बार भारत में विज्ञान संचार पर हो रहे इस सम्मेलन पर प्रसन्नता जताते हुए इसके विशिष्ट महत्व को रेखांकित किया।

धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन के निदेशक डा. मनोज पटैरिया ने किया। डॉ पटैरिया ने पीसीएसटी सदस्यों का परिचय भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा आयोजन से जुड़ी संस्मरणिका एवं प्रोसीडिंग का भी विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त 8 समानान्तर अकादमिक सत्र भी रहे, जिनमे विज्ञान संचार के विविध मुद्दों पर प्रतिभागियों ने व्यापक विचार मंथन किया। नीति निर्धारकों के बीच विज्ञान संचार, विश्व में विज्ञान संचार के परिदृष्य, मीडिया और विज्ञान संचार, विज्ञान कथाओं के जरिये विज्ञान संचार आदि विषयों पर प्रस्तुति की गई।


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