पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में सुधार की जरूरत : गोविन्द सिंह

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देहरादून। हिन्दुस्तान के एसोसिएट एडिटर गोविन्द सिंह का मानना है कि आज की पत्रकारिता को और अधिक गुणवत्तायुक्त बनाने के लिए उसके वर्तमान पाठ्यक्रमों में सुधार की सख्त जरूरत है। गोविन्द सिंह एसएस जीना परिसर के हिन्दी व पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और रोजगार के बढते अवसरों को देखते हुए विश्‍वविद्यालयों द्वारा पत्रकारिता का स्पष्ट तथा समृद्ध पाठ्यक्रम तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता परिवर्तनशील है इसलिए समय-समय पर इसके पाठ्यक्रमों को अपडेट करना आवश्यक होता है।

उन्होंने कहा कि आज देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता के अलग-अलग कोर्स चलाए जा रहे हैं, लेकिन स्नातक और स्नात्कोत्तर समेत सभी स्तरों पर छात्रों को लगभग एक सा ही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता बेहद परिवर्तनशील है और इसमें हर रोज नई-नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।

साथ ही तकनीक के स्तर पर भी तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इस विधा के सभी आयामों का ज्ञान उपलब्ध कराने के लिए एक स्पष्ट व समृद्ध पाठ्यक्रम तैयार किया जा सके। जिससे छात्र पत्रकारिता के हर क्षेत्र में निपुण हो सकें। उन्होंने कहा कि यह काम विश्वविद्यालयों को ही करना होगा। गोविन्द सिंह ने कहा कि आज पत्रकारिता कैरियर के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण हैं और युवाओं का रूझान इसमें बढ़ रहा है। ऐसे में इसके मजबूत और सर्वांगीण पाठ्यक्रम की सख्त जरूरत भी महसूस की जा रही है।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए परिसर के निदेशक प्रोफेसर देव सिंह पोखरियाल ने कहा कि विद्यार्थियों को मूल्यों का बोध कराना भी आज की महती आवश्यकता है और इसके लिए वर्तमान में पत्रकारिता के क्षेत्र में उच्च स्तर पर शोध करने व हुनरमंद लोगों को इस क्षेत्र में लाने का प्रयास ही एकमात्र हल है।

गोष्ठी में पत्रकारिता के छात्रों ने गोविन्द सिंह से काफी सवाल किये। जिसका उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर जवाब दिया। इस दौरान कुलानुशासक डा. जगत सिंह बिष्ट, प्रोफेसर आरएस पाथनी, डा. भीमा मानराल, प्रो. दया पंत के साथ बड़ी संख्या में पत्रकारिता के छात्र/छात्राएं व गणमान्य लोग मौजूद रहे।

देहरादून से धीरेन्द्र प्रताप सिंह की रिपोर्ट.


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