कलम के पैनेपन को दबा रही हैं सरकारें

E-mail Print PDF

: राजसत्ता पूंजी के पक्ष में श्रम के दमन कर रही है : रामनगर में पाक्षिक 'नागरिक' समाचार पत्र की तरफ से 'राजकीय दमन, जनता व मीडिया की भूमिका' विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। खत्री सभा भवन में आयोजित गोष्ठी में दिल्ली से आए प्रो. ईश सिंह ने कहा कि कलम के पैनेपन को दबाने का कार्य लगातार सरकारें कर रही है। निजी सम्पत्ति को सुरक्षा देने के लिए ही राजसत्ता दमन पर उतरती है। जनता पर औपनिवेशिक जमाने के काले कानूनों के अलावा समय-समय पर काले कानून बनाकर दमन किया जा रहा है। फर्जी एनकाउंटर की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

हरियाणा सिरसा से आए शहीद भगत सिंह विचार मंच के बलजीत सिंह ने कहा कि आंदोलन करने वाली जनता को गोली व जेल मिल रही है। कोई भी नेता व मीडिया राजसत्ता के दमन के वक्‍ताखिलाफ नहीं बोल रहा है। हल्द्वानी से आए प्रो. प्रभात उप्रेती ने कहा कि दमन को उजागर करने वाले पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है। हेम पांडे जैसे होनहार पत्रकार का एनकाउंटर करना सरकार की स्थिति को बयां करता है।

दूसरे वक्ताओं ने कहा कि मीडिया का पूंजीपरस्त चरित्र रोजाना उजागर होता है। दिनों दिन देखने में आ रहा है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ ही प्रिंट मीडिया से भी आम जनता के दुख, परेशानी व जीवन की बातें दूर होती जा रही है। मीडिया में फूहड़ता, सनसनी की खबरें छाई रहती हैं। पेड न्यूज व प्रायोजित खबर के बढ़ते चलन ने सच्चाई पर चमकीला भड़कीला पर्दा डाल दिया है। पूरे विश्व में चल रहे मजदूर आंदोलन की बात तो दूर देश के भीतर चल रहे मजदूर आंदोलन की खबर भी मीडिया से नदारद रहती है।

मीडिया पर बड़े घरानों के मालिकान होने के कारण आज उनके लिए मीडिया एक माल है। उसमें कार्यरत ईमानदार लोग भी एक तरह से माल ही प्रर्दशनीहैं। लेकिन इन सबके बीच पूंजीपति वर्ग द्वारा जनता के खिलाफ षडयंत्र का खुलासा करने वाले पत्रकारों का दमन किया जाता है। ऐसे में आवश्यकता है कि मीडिया क्षेत्र में ईमानदार व प्रगतिशील लोगों को अपनी पक्षधरता तय करनी होगी। जनपक्षधर मीडिया को पूरे देश के स्तर पर विस्तार करना होगा, तभी सही मायने में व्यवस्था के दमन के खिलाफ सशक्त आवाज उठा सकता है।

गोष्ठी के माध्यम से जनपक्षधर पत्रकारों, बुद्विजीवियों, साहित्यकारों से आह्वान किया गया कि वह देश में पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा जारी दमन व देश में लागू काले कानूनों के खिलाफ एकजुट हों। गोष्ठी में दिल्ली से आए एडवोकेट कमलेश कुमार, क्रालोस के अध्यक्ष पीपी आर्य, पत्रकार कमल भटट, बची सिंह, नितिन, कैलाश भटट, नरमिंदर सिंह, मुनीष कुमार, हेम भटट सहित अनेक ने अपने विचार व्यक्त किए।

गोष्ठी में शहीद भगत सिंह विचार मंच द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में 1857 से 1945 तक देश की आजादी के लिए अंग्रेजों की यातनाएं सहने वाले व शदीद हुए आंदोलनकारियों की फोटो प्रदर्शनी लगाई गई थी। जिसमें 300 से भी अधिक शहीदों व आंदोलनकारियों के सचित्र जीवन परिचय दिया गया था। इसके अलावा आजादी के आंदोलन के बारे में अखबारों में छपी खबरों की कटिंग भी लगाई गई थी।


AddThis