बिहार टाइम्स कानक्लेव : पत्रकार अजय कुमार को धमका गए सुशील मोदी

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: श्रोताओं ने मंचासीन पत्रकारों की तरफ उछाले ढेरों सवाल : रात भर दौड़ी पटना-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस आज सुबह जब दिल्ली रुकी तो स्टेशन पर उतरते ही समझ आया कि दिल्ली का मौसम पटना से बहुत अलग है. गालों पर हवा के बर्फीले थपेड़ों से दिल्ली की सर्दी वाला गाना याद आ गया. प्रांजय गुहा ठाकुरता, मुकेश कुमार, आनंद प्रधान और मैं. चारों एक ही ट्रेन में अलग-अलग बोगियों में थे और दिल्ली में प्लेटफार्म पर एक जगह इकट्ठे हुए. फिर अपने-अपने घरों की ओर रवाना हुए.

आटो में बैठकर घर लौटते वक्त दिमाग में पटना के मौर्या होटल में दो दिन तक चले बिहार टाइम्स डॉट कॉम के कानक्लेव के कई दृश्य घूमते रहे. 'बिहार के आगे चुनौतियां' शीर्षक के साथ शुरू हुआ कानक्लेव दो दिन तक अलग-अलग सेशन में अलग-अलग मुद्दों पर गुत्थमगुत्था रहा. वे लोग जो बिहार की माटी से निकले और पढ़-बढ़ कर बिहार में या बिहार के बाहर अपनी उद्यमिता के कारण अच्छा-खासा नाम कमा रहे हैं, नाम कमाने की प्रक्रिया में हैं, नया कुछ रच रहे हैं, बड़ा कुछ रच चुके हैं, लोगों को रोजगार दे रहे हैं, बिहार के विकास में भागीदार हैं, पटना में मंच पर जब खड़े हुए तो अपने दिल की बात बोले. बिहार ने अपने पिछड़ेपन, अराजकता और नकारात्मकता का जो केंचुल उतार फेंका है, उसके आगे अब और क्या व कैसे करना चाहिए व इस राह में कितनी कठिनाइयां हैं, सबने बताया.

दूसरे दिन के सत्रों में एक सत्र मीडिया पर केंद्रित था, अल्टरनेटिव मीडिया पर. शायद भारत में अल्टरनेटिव मीडिया पर इतना बड़ा कानक्लेव हाल-फिलहाल कहीं न हुआ हो. पटना गवाह बना ट्रेडिशनल और न्यू मीडिया के लोगों के एक साथ मंच पर बैठकर आत्मचिंतन व आत्ममंथन करने का. इसके लिए बिहारटाइम्स.कॉम के संपादक अजय कुमार और उनकी पत्नी सुजाता को बधाई देना चाहिए कि इन लोगों ने बिहार के मीडिया वालों के दिल दिमाग में चल रहे सवालों को सबके सामने लाने का मौका दिया. सबसे ज्यादा सवाल आए मंच पर बैठे हिंदुस्तान, पटना के संपादक अकू श्रीवास्तव के लिए.

किसी ने पूछा कि लवली आनंद जब एक पीड़ित बच्चे को एक हजार रुपये देती हैं तो वो लीड खबर बन जाती है, तस्वीर के साथ, लेकिन जब एक आम आदमी की पत्नी पांच हजार रुपये उस पीड़ित बच्चे को देती हैं तो उसका कहीं कोई नामलेवा नहीं होता. किसी ने पूछा कि दलितों की हत्या होती है तो नीतीश राज में हत्याकांड की यह खबर हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित नहीं की जाती लेकिन यह खबर हिंदुस्तान की वेबसाइट पर होती है, प्रिंट से यह खबर ब्लैकआउट किए जाने का कारण क्या है. बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी के संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने मंच से बताया कि यहां जब मुख्यमंत्री-मंत्रियों से जब राजकाज में गड़बड़ियों के बारे में सवाल पूछा जाता है तो ये लोग जवाब देने की जगह सवाल पूछने वाले पत्रकार को ही बेइज्जत करने लगते हैं. यह कहां का सुशासन है.

मणिकांत ठाकुर ने जानकारी दी कि वे एक बार पत्रकारिता से दुखी होकर इस पेशे को ही टाटा बाय बाय कह चुके थे और फूड ज्वाइंट खोलकर गुजारा करने लगे थे. बिहार में ईमानदार पत्रकारों की दिक्कतों और सुशासन के पीछे के सच का जोरदार तरीके से खुलासा किया मणिकांत ठाकुर ने. मुकेश कुमार ने बाजार के दौर में बिकाऊ हो चुकी मीडिया के दुर्भाग्य पर प्रकाश डाला और बताया कि अब संपादक रीढ़ वाले नहीं रह गए हैं. आनंद प्रधान ने वर्तमान मीडिया के ग्लोबल व लोकल ट्रेंड को पकड़ते हुए इसके पतन के कारणों को समझाया. उनका कहना था कि वर्तमान मीडिया का मतलब हो गया है कुछ घरानों का कब्जा. जिस तरह से कुछ घराने लगातार अपने संस्करण खोलते जा रहे हैं और अखबार के जरिए अन्य धंधों को आगे बढ़ा रहे हैं उससे लोकतंत्र के पूरे ढांचे के सामने संकट खड़ा हो चुका है. उन्होंने न्यू मीडिया और छोटी मैग्जीनों व अखबारों को सपोर्ट करने का आह्वान किया.

प्रांजय गुहा ठाकुरता ने अपने भाषण में मीडिया के राडियाकरण की चर्चा की और इसके इफेक्ट के बारे में बताया. यशवंत ने विकीलीक्स का उदाहरण देते हुए लोगों से निराश न होने की अपील की और कहा कि इस दौर में मीडिया के मिशन को आगे बढ़ाने का काम वेबसाइटें करने लगी हैं. एनआर मोहंती ने बिहार में पत्रकारिता की दशा-दिशा पर प्रकाश डाला और लालू व नीतीश के जमाने की मीडिया के फर्क को समझाया.

मौर्या होटल के खचाखच भरे सभागार में मंचासीन वक्ताओं ने जब अपनी बात रख ली तो श्रोताओं की तरफ से सवालों का जो क्रम शुरू हुआ, वो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था. कई पत्रकारों, उद्यमियों, नागरिकों ने अपने सवाल मंच के सामने रखे और मंच की तरफ से यथासंभव उचित जवाब देने की कोशिश हुई. कानक्लेव के पहले दिन बिहार के उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील मोदी ने कानक्लेव आयोजक बिहार टाइम्स.काम को ही धमका दिया.

मोदी ने इस पोर्टल के संस्थापक और संचालक अजय कुमार से कहा कि वे अपने साइट पर बिहार के सरकार के विकास के दावों की आलोचना करते हैं, यह ठीक नहीं है, आपको पाजिटिव होना चाहिए और विकास का स्वागत करना चाहिए. सुशील मोदी का यह कथन पत्रकारों में चर्चा का विषय रहा और इस धमकी को पत्रकारों ने बिहार टाइम्स के लिए सकारात्मक माना क्योंकि पत्रकारिता सत्ता पक्ष के समर्थन में रिपोर्टें प्रकाशित करने का नाम नहीं है. पत्रकारिता का आशय आंकड़ों व दावों का आलोचनात्मक विश्लेषण है जिससे जनता तक दूध का दूध और पानी का पानी पहुंचे. फिलहाल तो बिहार में जो माहौल है, उसमें जनता तक पानी मिला दूध पहुंच रहा है और लोग इसी को अमृत व ओरीजनल मान रहे हैं.

बिहार टाइम्स डॉट कॉम की तरफ से आयोजित कानक्लेव में दोनों दिन क्या-क्या हुआ, और मीडिया वाले सत्र में किसने क्या कहा, इसकी पूरी रिपोर्ट या वीडियो हम जल्द ही यहां प्रकाशित करेंगे. पटना के पत्रकारिता के छात्र अभिषेक आनंद के जज्बे की मैं सराहना करूंगा जो दोनों दिन न सिर्फ हम लोगों से मिलने आए बल्कि दूसरे दिन अपने हैंडीकैम से वक्ताओं के भाषणों को रिकार्ड भी किया. उनसे अनुरोध है कि वे उन वीडियोज को यूट्यूब पर अपलोड करके उसके लिंक भेज दें. अजय कुमार जी से अनुरोध है कि दो दिन के आयोजन में जो कुछ हुआ उसकी एक प्रेस रिलीज भिजवा दें ताकि आयोजन के संपूर्ण विवरण को प्रकाशित किया जा सके. पटना के पत्रकारों से भी अनुरोध है कि उन्होंने आयोजन को किस नजरिए से देखा-जाना-सुना, उसे लिख कर सबके साथ शेयर करें. फिलहाल यहां कुछ लिंक दिए जा रहे हैं, जिसके सहारे आयोजन के कई अन्य डिटेल्स आप हासिल कर सकते हैं.


Bihar Conclave

Bihar conclave begins with call to invest

BiharTimes Conclave Instills New Hope Among One And All

Provide Bihar coal linkage for new power plants: Sushil Modi


पटना के युवा पत्रकार नवल किशोर एक पोर्टल चलाते हैं, अपना बिहार नाम से. बेहद मुखर और बेबाक नवल किशोर ने इस आयोजन के बारे में अपने पोर्टल पर जो कुछ लिखा है, उसे साभार लेकर यहां प्रकाशित कर रहे हैं-

बिहार कान्केल्व 2010 शुरु, लालू राज में अफ़गानिस्तान बन गया था बिहार – मोदी

पिछले 5 सालों के पहले बिहार में सरकारें तो थीं, लेकिन कोई शासन नहीं था। बीते पांच सालों में एनडीए ने राज्य में सरकार को स्थापित करने की कवायद की। इमानदारी के साथ की गई कवायद ने ही बिहार की जनता को विश्वास दिलाया और एनडीए को भारी जनादेश दिया। ये बातें राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार टाइम्स कान्केल्व 2010 के अवसर अपने उद्घाटन संबोधन में कहीं।

श्री मोदी ने कहा कि अन्य राज्यों यथा आंध्र प्रदेश्म कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात आदि विकसित राज्यों में तो कोई भी आदमी मुख्यमंत्री बन सकता है और सरकार चला सकता है, लेकिन वह बिहार जो लालू राज में अफ़गानिस्तान बन चुका था, उसे विकास की पटरी पर लाना हर किसी के वश की बात नहीं थी। एनडीए सरकार ने बिहार् को विकास की पटरी पर ला खड़ा किया और अगले पांच सालों में यह देश के तमाम विकसित राज्यों को  पीछे छोड़कर सबसे अधिक विकसित राज्य बन जायेगा। इन्होने बताया कि बिहार में हर चीज एक चैलेंज है। मसलन शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, जनवितरण प्रणाली आदि योजनाओं का लाभ आम आदमी तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नही है। बिहार सरकार ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ़ बिगुल फ़ूंक दिया है।

इन्होंने जीत के लिये समावेशी राजनिति को श्रेय देते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में एनडीए सरकार ने हर जाति और धर्म के लोगों के हित में काम किया। भारी जनादेश क रुप में जो चुनौतियां मिली हैं, राज्य सरकार उसका निर्वहन करने में सक्षम है। इससे पहले अपने संबोधन में बिहार टाइम्स के संपादक अजय ने बिहार की वर्तमान स्थितियों और चुनौतियों की सविस्तार जानकारी दी। उद्घाटन सत्र के बाद दूसरे सत्र में राज्य में हरित ऊर्जा की संभावनाओं पर विचार विमर्श में सेइकेई विश्वविद्यालय , जापान से आये विशेषज्ञ प्रो संजय कुमार ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो बिजली की क्मी को सौर ऊर्जा के बूते दूर की जा सकती है। इसी विश्वविद्यालय के प्रो कुरुसावा ने सौर ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग के लिये किये जाने वाले उपायों के बारे में जानकारी दी। अमेरिका से आये प्रो एम जे वारसी ने अपने संबोधन में बताया कि अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय में स्थानीय कार्टुनिस्ट पवन के कार्टुनों पर विशेष अध्ययन किया जा रहा है। इन्होंने यह भी बताया कि बिहार में अनेक कमिया हैं, जिन्हें दूर करने की जवाबदेही और सामर्थ्य केवल बिहारियों में ही है।

स्वीडेन से आये शिक्षाविद हरिशंकर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि अब यह कहना फ़िजूल है कि बिहार एक गरीब राज्य है, क्योंकि गरीबी और पैसे का कोई संबंध नहीं है। इन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सवाल केवल पैसे का होता तो अमेरिका जैसे विकसित देशों में कोई समस्या होती ही नहीं। दोहा-कतर से आये शकील अहमद काकवी ने सबसे बड़ी आवश्यकता है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं को तकनीकी रुप से कुशल बनाने की। अपने संबोधन में दोहा निवासी बिलाल खान ने कहा कि बिहार विकसित बने, यह हम सबकी चाहत है और इसके लिये जरूरी है कि हम भेद मिटाकर संयुक्त रुप से पहल करें।

मीडिया के लोगों ने मीडिया के अस्तित्व पर उठाये सवाल

बिहार कानक्लेव 2010 का दूसरा दिन मीडिया के नाम रहा। देश के चोटी के पत्रकारों ने मीडिया के अस्तित्व पर सवाल उठाये। सत्र की शुरुआत देश के वरिष्ठ पत्रकार प्रंजय गुहा ने की। इन्होंने कहा कि विकीलिक्स ने आज के शासकों की पोल खोलकर रख दी है। इसने मीडिया के पारंपरिक स्वरुपों यथा प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है। देश के शासक आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं और मीडिया के ही कुछ प्रतिनिधि इनके एजेंट बनकर देश और समाज से सच छिपाने का दुष्कर्म कर रहे हैं।

अपने संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार एनआर मोहंती ने कहा कि बिहार में मीडिया अब लोकतंत्र का चौथा खम्भा नहीं रह गया है। वर्तमान परिस्थिति में जिस प्रकार से नीतीश कुमार मीडिया पर हावी हो गये हैं, उससे तो यही लगता है कि यहां की मीडिया का स्वतंत्र अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। इन्होंने वैकल्पिक मीडिया यानि वेब मीडिया की चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान में यह मीडिया अपनी सार्थकता साबित कर रहा है। दैनिक हिन्दुस्तान के कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव ने कहा कि अखबार चलाना आसान काम नहीं रह गया है। इन्होंने कहा कि जिन्हें यह लगता है कि मीडिया सच को सामने नहीं ला रही है, वे बिहार टाइम्स के संपादक अजय कुमार की तरह बन सकते हैं। इन्होंने अखबारों की घटती प्रसार संख्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि आज जिस तरीके से इंटरनेट और मोबाइल का उपयोग बढा है, उससे यह लगने लगा है कि पारंपरिक स्वरुप वाले मीडिया को भी स्व्यं को इसके साथ जोड़ना चाहिये। 8 नेशनल अवार्ड जीत चुके डाक्युमेट्री मेकर अरविन्द सिन्हा ने कहा कि शासक वर्ग समाज को आईना दिखाने वाली फ़िल्मों का निर्माण होने ही नहीं देना चाहती है, जबकि ये फ़िल्में लो बजट की फ़िल्में होती हैं। नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन आज की तारीख में ऐसी किसी भी लघु फ़िल्म और डाक्युमेंट्री को वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करता है जो सच दिखाते हैं।

इस अवसर पर आईआईएमसी के प्रोफेसर आनंद प्रधान ने कहा कि लालू के समय में जिस प्रकार का साहस मीडिया करता था, नीतीश राज में यह बिल्कुल ही निष्क्रिय बन गया है। यह इस बात को साबित करता है कि यहां का स्थानीय मीडिया नीतीश कुमार की कमियों पर पर्दा डालना चाहता है। अपने संबोधन में भड़ास के संपादक यशवंत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के पत्रकारों के पास वैकलिप्क माध्यम है और वे आसानी से अपने विचारों को दूनिया के सामने रख सकते हैं।

यशवंत ने रखी पत्रकारिता की लाज

भडास फ़ार मीडिया के युवा संपादक यशवंत सिंह ने आज के पेड न्यूज के दौर में भी पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए इसकी लाज रख ली। कल बिहार कान्क्लेव 2010 के अवसर पर जब श्री सिंह का नाम उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा प्रतीक चिन्ह लेने के लिये बुलाया गया, तो उन्होंने प्रतीक चिन्ह लेने से इन्कार कर दिया। “अपना बिहार” के साथ विशेष बातचीत में श्री सिंह ने बताया कि आज के विकल्पविहीन पत्रकारिता के दौर में भी विकल्प है और आज के युवा चाहें तो यह काम आसानी से कर सकते हैं। आज के मीडिया का स्वरुप बदला है तो इसका मिजाज भी बदला है। विकीलिक्स द्वारा किये जा रहे खुलासे इस बात के सबूत हैं कि जहां एक ओर कारपोरेट जगत का गुलाम बन चुकी पत्रकारिता है तो दूसरी ओर विकीलिक्स जैसे वेब पोर्टल पूरी अस्मिता के साथ जीवित हैं, जिन्होंने अपने घुटने नहीं टेके।

ऐसा कोई पल नहीं जब बिहार याद नहीं आता – बिलाल

अरब देश दोहा में रहने वाले बिलाल खान बताते हैं कि उनके जीवन में ऐसा कोई पल नहीं है जब वे बिहार को याद नहीं करते हैं। औरों की तरह इनका सपना भी बिहार को विकसित बिहार के रुप में देखने की है। ये मानते हैं कि जिस आशा और विश्वास के साथ सूबे की जनता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना समर्थन दिया है, श्री कुमार को भी चाहिये कि वे बिहार में रोजगार पैदा करें और सूबे में खुशहाली लायें।

विकास के लिये सकारात्मक मानसिकता आवश्यक – डा हरि शंकर शर्मा

सात समुंदर पार स्वीडेन में शिक्षा की अलख जगाने वाले डा हरिशंकर शर्मा का मूल संबंध शाहाबाद इलाके से है। अपनी पत्नी डा श्रीमति अरुणा शर्मा के साथ समागम में भाग लेने आये डा शर्मा ने कहा बिहार के विकास के लिये लोगों की सोच का सकारात्मक होना आवश्यक है। इन्होंने बताया कि कृषि इस राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है, राज्य सरकार कृषि को बढावा दे और साथ ही कृषि आधारित उद्योगों को बढावा देने के लिये आगे आये। इन्होंने यह भी कहा कि कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिये भी योजनायें बनायी जानी चाहिये ताकि किसानों को उचित लाभ मिल सके।

भ्रष्टाचार और जनसंख्या पर काबू पाना आवश्यक – मनोज

पिछले 6 सालों में अस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में इको टेक्नोलाजी लिमिटेड कंपनी में बतौर अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रबंधक काम करने वाले मनोज मानते हैं कि भ्रष्टाचार और जनसंख्या पर काबू पाना ही बिहार के विकास का मूल मंत्र है। इन्होने बिहार सरकार से अपील करते हुए कहा कि बिहार के हर जिले में कम से कम 2 आईटीआई केंद्र खोले जायें ताकि युवा तकनीकी रुप से कुशल हो सकें।

गया में जमीन के अंदर बांध बनायेंगे प्रो कातो

गया जिले में जमीन के अंदर बहने वाली फ़ल्गू नदी में जमीन के अंदर ही बांध बनाकर गयावासियों को जलसंकट से मुक्ति दिलाना चाहते हैं तोक्यो विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफ़ेसर डा मकोतो कातो। अपना बिहार के साथ विशेष बातचीत में डा कातो ने हमें बताया कि गया जिले में पानी की कमी ने उन्हें प्रेरित किया है कि जमीन के अंदर बांध बनाकर जलस्तर को उपर लाया जाये। इन्होंने बताया कि यदि राज्य सरकार सहयोग करे तो निश्चित तौर पर भूजल स्तर को 30 फ़ीट तक लाया जा सकता है। इससे लोगों को सहज रुप से पानी मिल सकेगा और पानी निकालने के लिये लगने वाली बिजली में काफ़ी कमी भी आयेगी।


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