बिनायक सेन की रिहाई के लिए धरना-प्रदर्शन

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आजमगढ़ पीयूसीएल के राष्‍ट्रीय उपाध्यक्ष डा. बिनायक सेन पर देशद्रोह का आरोप और आजीवन कारावास का विरोध करते हुए सामाजिक व मानवाधिकार संगठनों ने आजमगढ़ में अम्बेडकर प्रतिमा के सामने धरना दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारे लिखी तख्तियां लीं थी और नारे लगा रहे थे कि कारपोरेट पूंजी का खेल, देश भक्त डाक्टर को जेल- नहीं चलेगा, डा. बिनायक सेन की अनयायपूर्ण सजा को रद्द करो, यूएपीए और छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम को रद्द करो, जल-जंगल-जमीन की लूट बंद करो, लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन नहीं सहेंगे।

वक्ताओं ने कहा कि मजबूत मानवाधिकार संगठन ही सच्चे लोकतंत्र की गारंटी करवाता है। पीयूसीएल देश का सर्वाधिक सम्मानित मानवाधिकार संगठन है। डा. बिनायक सेन को सजा देकर न्यायालय ने उन तमाम जनतांत्रिक आवाजों को चेतावनी दी है कि जो रोजी-रोटी, भूख-विस्थापन के सवाल पर लड़ते हैं उनका हश्र भी यही होगा। यह कैसी विडंबना है कि देश की आम जनता के सवालों को उठाने को हमारा न्यायालय देशद्रोह कहता है। बिनायक सेन पर देशद्रोह का आरोप लोकतंत्र की अवमानना है। बिनायक सेन जनता के लिए, जनता द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सच्चे सिपाही हैं। हम मांग करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार विनायक सेन के खिलाफ लगाए गए जनविरोधी राजनीति से प्रेरित आरोपों व जनविरोधी छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा कानून को तत्काल रद्द करे और विनायक सेन को रिहा करे।

धरने में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री को लाखों की संख्या मे पोस्ट कार्ड भेज कर हम आजमगढ़ के लोकतंत्र पसंद नागरिक इस निर्णय पर विरोध दर्ज कराएंगे, ताकि भविष्य मे इस तरह के जनविरोधी निर्णय न हो सके।

धरने में मसीहुद्दीन संजरी, विनोद यादव, तारिक शफीक, जीतेंद्र हरि पांडेय, सालिम दाउदी, अंशु माला सिंह, अब्दुल्ला एडवोकेट, राजेंद्र यादव, पीयूष बरनवाल, विनय श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश पांडेय, शफीक एडवोकेट आदि मौजूद थे। धरने को शेख रजब अली वेलफेयर सोसाइटी, कारवां, पीयूसीएल, जेयूसीएस आदि सामाजिक व मानवाधिकार संगठनों ने आयोजित किया।

आजमगढ़ से राजीव यादव की रिपोर्ट.


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