भारत में अपनी जड़ें खोजेंगे मारीशस के पूर्व मंत्री जगदीश गोवर्धन

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भोजपुरीसाउथ एक्स दिल्ली में इन्डियन डायास्पोरा सेंटर मारीशस और विश्व भोजपुरी सम्मलेन, दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें दोनों देशों में चल रही भोजपुरी की गतिविधियों, चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे इन्डियन डायास्पोरा सेंटर, मारीशस के संयोजक व मारीशस के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जगदीश गोवर्धन और विशिष्ट अतिथि थीं मारीशस की चर्चित गायिका व अभिनेत्री होसिला देवी.

जगदीश गोवर्धन ने कहा कि मारीशस में भोजपुरी की गतिविधियाँ तेज हो गईं हैं. कैबिनेट स्तर पर भोजपुरी को मान्यता मिल गई है. वहाँ की सत्तर फीसदी आबादी भोजपुरी बोलती है. मेरी हार्दिक इच्छा है कि भारत में भी भोजपुरी ऐसे ही विकास करे. इसीलिए मैंने 6 जनवरी से 25 फरवरी तक 50 दिवसीय भारत भोजपुरी यात्रा की योजना बनाई है. इन्डियन डायास्पोरा सेंटर और विश्व भोजपुरी सम्मलेन की एक टीम भोजपुरिया क्षेत्र के कई गांवों में जायेगी और लोगों को जागरुक करते हुए यह बताएगी कि मातृभाषा का क्या महत्व होता है. वह मातृभाषा की ही ताकत थी कि 176 वर्षों पूर्व मारीशस गए गिरमीटिया अब वहाँ गवर्नमेंट बन गये हैं.

उन्‍होंने कहा कि भोजपुरी भाषा लगभग सभी अप्रवासी देशों में बोली जाती है क्योंकि वहां अधिकांश लोग भोजपुरी भाषी क्षेत्रों से ही गये थे. यही वजह है कि कुछ वर्षों पूर्व अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा था कि भोजपुरी भाषा भी दस अन्य भाषाओं की तरह एक संपर्क भाषा है. जगदीश गोवर्धन ने आगे कहा कि अब तो मारीशस के लोग भारत में अपनी जड़ें खोज रहे हैं. मारीशस के राष्ट्रपति अनिरूद्ध जगन्नाथ और प्रधान मंत्री डाओ नवीन चन्द्र गुलाम के भारत यात्रा दोनों देशों के बीच रिश्ता मजबूत करने के साथ अपनी जड़ों की खोज भी थी. इस 50 दिवसीय भारत भोजपुरी यात्रा में मेरी भी यही कोशिश होगी. इस यात्रा में विश्व भोजपुरी सम्मलेन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी, अंतर्राष्ट्रीय महासचिव अरुणे नीरन, दिल्ली के अध्यक्ष मनोज भावुक और सचिव कुलदीप श्रीवास्तव प्रचार-प्रसार व सहयोग हेतु हमारे साथ रहेंगे.

सभा में एक और रंग भरा मारीशस की चर्चित गायिका और अभिनेत्री होसिला देवी ने. उन्होंने अपने उदगार में 176 वर्षों पूर्व मारीशस  गए गिरमीटिया की व्यथा-कथा को सस्वर सुनाया- "कलकत्ता से छूटल जहाज भंवरवा धीरे चलs". अपने अध्यक्षीय भाषण में कवि मनोज भावुक ने विश्व भोजपुरी सम्मलेन की गत 15 वर्षो की विकास-यात्रा और उपलब्धियों का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि हम प्रति वर्ष राष्ट्रीय सम्मेलन और हरेक चौथे वर्ष अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन करते हैं. मुंबई, नागपुर, बनारस और आगरा समेत देश के कई महत्वपूर्ण शहरों में राष्ट्रीय सम्मेलन और मारीशस में दो बार अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन कर चुके हैं. अगला राष्ट्रीय सम्मेलन ऋषिकेश और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हालैंड में होगा. विश्व स्तर पर साहित्यिक-सांस्कृतिक विनिमय हेतु विश्व के तमाम भोजपुरी भाषी राष्ट्रों को एक सूत्र में बांधकर रखने के लिए मारीशस में केन्द्रीय सचिवालय की स्थापना की गई. और अब इन्डियन डायास्पोरा सेंटर और विश्व भोजपुरी सम्मलेन के संयुक्त तत्वाधान में होने वाले इस 50 दिवसीय भारत भोजपुरी यात्रा से निश्चित रूप से भोजपुरिया क्षेत्र में अपनी मातृभाषा भोजपुरी के प्रति एक जनजागरण होगा.

कार्यक्रम की अध्‍यक्षता भोजपुरी साहित्यकार व विश्व भोजपुरी सम्मलेन, दिल्ली के अध्यक्ष मनोज भावुक ने की. विश्व भोजपुरी सम्मलेन के राष्ट्रीय सचिव (प्रचार-प्रसार) कुलदीप श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत तथा पत्रकार जयप्रकाश ने कार्यक्रम का संचालन किया.


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