चुनौती के अलावा कोई और विकल्‍प नहीं

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वर्धा: वर्धा में चल रहे स्‍त्री अध्‍ययन सम्‍मेलन का दूसरा दिन : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय वर्धा व भारतीय स्‍त्री अध्‍ययन संघ के संयुक्‍त तत्‍वावधान में आयोजित स्‍त्री अध्‍ययन के 13वें राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन के उदघाटन अवसर पर भारतीय स्‍त्री अध्‍ययन संघ की अध्‍यक्ष अनीता घई ने कहा कि हमें महिला जीवन के विविधता व उनके अंतर-संबंध को समझने की जरूरत है और विभिन्‍न वर्गों के हाशिएकरण में छिपे संरचनात्‍मक असमानता को पहचानने की जरूरत है।

उन्‍होंने कहा कि हो सकता कि ये असहज राजनीतिक सवाल पैदा करे परंतु जेंडर राजनीति पर पुनर्विचार, हाशिएकरण का प्रतिरोध व बौद्धिक वर्चस्‍व को चुनौती के अलावे कोई भी विकल्‍प नहीं है। 'हाशिएकरण का प्रतिरोध, वर्चस्‍व को चुनौती : जेंडर राजनीति की पुनर्दृष्टि' पर गंभीर विमर्श करने के लिए वर्धा विश्‍वविद्यालय में आयोजित देशभर के 650 स्‍त्री अध्‍ययन अध्‍येताओं के महासम्‍मेलन के उदघाटन के अवसर पर अनीता घई द्वारा कुलपति विभूति नारायण राय को जेंडर समानता हेतु और लोकतंत्र के प्रतीक स्‍वरूप पीपल का पौधा प्रदान किया गया। इस दौरान महासम्‍मेलन की स्‍थानीय संयोजक व स्‍त्री अध्‍ययन की विभागाध्‍यक्ष प्रो. इलीना सेन, प्रतिकुलपति प्रो. ए अरविंदाक्षन, स्‍त्री विमर्शकार मेरी जॉन मंचस्‍थ थीं।

उद्घाटन समारोह के दौरान कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि विश्‍वविद्यालय के लिए यह गौरव की बात है कि इस प्रांगण में यह ऐतिहासिक स्‍त्री अध्‍ययन महासम्‍मेलन हो रहा है। उन्‍होंने इस महासम्‍मेलन के लिए स्‍त्री अध्‍ययन विभाग को बधाई देते हुए कहा कि इतने अधिक संख्‍या में विभिन्‍न विश्‍वविद्यालयों व संस्‍थानों से स्‍त्री विमर्श के लिए विवि में पहली बार आए हैं। उन्‍होंने देश-विदेश से आए प्रतिभागियों का स्‍वागत करते हुए कहा कि आपलोगों को थोड़ी असुविधा हो रही होगी, लेकिन हमें यह खुशी का अनुभव हो रहा है कि स्‍त्री विमर्श के लिए हम सभी इकट्ठे हुए हैं।  चार दिनों के इस सम्‍मेलन में स्‍त्री, दलित व हाशिए के लोगों के लिए भी विमर्श होगा। इस दौरान प्रतिकुलपति प्रो. ए अरविंदाक्षन ने कहा कि स्‍त्री विमर्श के लिए हमें सिर्फ जेंडर समानता तक ही नहीं अपितु हमें समस्‍त क्रियाकलाप से जुड़ने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि अन्‍याय के खिलाफ शोध की प्रवृति को हम सिर्फ वि‍श्‍वविद्यालय की चाहारदीवारी तक ही सीमित नहीं रखेंगे, अपितु हम इसे समाज में लाने का प्रयास करें।

अनीता घई ने वर्धा के ऐतिहासिक पृष्‍ठभूमि का जिक्र करते हुए अपने संस्‍थापक सदस्‍यों को याद करते हुए कहा कि महाराष्‍ट्र का यह क्षेत्र कई मायनों में हमारे लिए महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि समाज में अस्मिताओं की वजह से हम केवल एक जैसे हाशिए की अस्मिता के पक्ष का आंदोलन-सुख नहीं भोग सकते अपितु हमें असंख्‍य अस्मिताओं की राजनीति में जेंडर समानता का केंद्रीय सरोकार को बरकरार रखना होगा। इस अवसर पर वरिष्‍ठ दलित लेखिका नागपुर की कुमुद पावडे ने माधुरी शाह स्‍मृति पर अपना व्‍याख्‍यान देते कहा कि स्‍त्री अध्‍ययन का पाठ के लिए हमें सिर्फ पुस्‍तकीय अध्‍ययन से नहीं अपितु हमें आम जनों के बीच जाने की जरूरत है।

प्रथम प्‍लेनरी सेशन में प्रसिद्ध आदिवासी महिला कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वो गरीब परिवार में जन्‍मी तथा अपने जमीन को कम्‍पनी के हाथों गंवा बैठी। इस घटना ने उनके परिवार को बरबाद कर दिया और अनकहे पीड़ा में धकेल दिया। यह कहानी सभी हाशिए के लोगों की है। मुस्लिम महिला संगठन के शाहीन और जमीला ने दो हैदराबाद के बारे में जिक्र करते हुए बताया- एक पुराना हैदराबाद और दूसरा भूमंडलीकृत नया सायराबाद। पुराने हैदराबाद में 40 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है। मुस्लिम महिलाएं असमान कानून और गरीबी से दोतरफा पीडि़त हैं। घरेलू परिदृश्‍य, निरक्षरता, बेराजगारी आदि उनके प्रतिरोध के बाधक हैं। फोरम अगेन्‍स्‍ट ऑप्रेशन ऑफ वूमेन की चयनिका ने कहा कि 'सामान्‍य परिवार' जिस प्रकार देखा जाता है उसे फिर देखने की जरूरत है- विभिन्‍न स्‍त्‍ार की संलग्‍नता और संवाद की और नए ज्ञान निर्मिति की।

पांच दिवसीय राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन के दूसरे दिन 'प्रतिरोध लेखन और स्‍त्रीवादी संलग्‍नता' विषय पर आयोजित सत्र की अध्‍यक्षता सुप्रसिद्ध नारीवादी लेखिका प्रो. उमा चक्रवर्ती करेंगी। पाकिस्‍तान से आयी लेखिका व स्‍तंभ्‍ाकार जाहिदा हिना तथा शाहिन अख्‍तर, पेन्निया और नज़ीफा रूबी बतौर वक्‍ता के रूप में उपस्थित रहेंगी। सांस्‍कृतिक संध्‍या कार्यक्रम में लोकगायिका व पीपली लाइव फिल्‍म में गायन प्रस्‍तुत कर चुकी गायिका नगीन तनवीर एवं बस्‍तर बैण्‍ड प्रस्‍तुति की जाएगी।


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