अंग्रेजी के भाषाई साम्राज्यवाद के विरूद्ध संघर्ष की जरूरत

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भोपाल के संभागायुक्त मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि मातृभाषाओं की कीमत पर कोई भी भाषा स्वीकारी नहीं जानी चाहिए। दुनिया के तमाम देश अपनी भाषाओं के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं और अंग्रेजी के भाषाई साम्राज्यवाद के खिलाफ कानून बनाने जैसे कदम उठा रहे हैं। हमें भी अपनी भाषाओं के सम्मान और संरक्षण के लिए आगे आना होगा।

वे माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय भाषाओं में अंतरसंवाद विषय पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय के भाषाई वैविध्य को एक कौतुक की तरह देखा जा रहा है और उसे एक राष्ट्र के बजाए उपमहाद्वीप की संज्ञा दी जा रही है। क्या भाषाओं की अधिकता से कोई राष्ट्र, राष्ट्र नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि हिंदी सहअस्तित्व की भाषा है, उसके साथ ही भारतीय भाषाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है। भारतीय भाषा परिवार की सारी भाषाएं मिलकर इस देश को सम्पन्न करती हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती व कवि पत्रकार माखनलालजी की प्रतिमा पर दीप प्रज्‍ज्‍वलन कर किया गया। इस अवसर पर शारदा विहार स्कूल के बच्चों ने आचार्य अवध किशोर के निर्देशन में सरस्वती वंदना व गीत प्रस्तुत किए।

शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि विदेशी भाषा के माध्यम से हम पर एक सांस्कृतिक आक्रमण हो रहा है। जिसका नकारात्मक असर समाज जीवन के हर क्षेत्र में दिखने लगा है। कोई भी हमला तभी सफल होता है जब हम कमजोर हों। इसलिए हमें अपने अंदर झांकना होगा। देश में अंग्रेजियत का एक उन्माद सा चल रहा है, जिसमें यूं लगने लगा है कि पश्चिम की हर चीज हमसे बेहतर है। सभी भारतीय भाषाएं एक होकर ही इस जंग को जीत सकती हैं। वरना यह संकट हमें कहीं नहीं छोड़ेगा।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रमुख अतुल कोठारी ने कहा कि आजादी के छः दशकों के बाद हमें अपनी भाषाओं के सम्मान के लिए लड़ना पड़ रहा है यह कितने दुख की बात है। देश में यह वातावरण बनाया जा रहा है कि अंग्रेजी से ही प्रगति हो सकती है, जबकि यह सबसे बड़ा झूठ है। हमें अपनी भाषाओं का सम्मान बचाने के लिए स्वाभिमान जगाने की जरूरत है। इस मौके पर आचार्य दुग्गिराला विश्वेश्वरम द्वारा लिखित पुस्तक हमारी मातृभाषाएं का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में लगभग 20 राज्यों से आने भाषा आंदोलन से जुड़े साथियों ने अपने क्षेत्र में चल रहे कामों की जानकारी दी। इस सत्र के प्रमुख वक्ताओं में सर्वश्री उमाशंकर मिश्र, गोविंद प्रसाद, निर्मला नायक और विधान रेड्डी रहे। तीसरे सत्र में हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रयोग को लेकर एक घोषणा पत्र पारित किया गया। जिसमें हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए तमाम मांगें और सुझाव शामिल हैं। इसके साथ ही जनसंचार को संघ लोकसेवा आयोग और राज्य लोकसेवा आयोगों की परीक्षाओं में एक विषय के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस आयोजन में प्रख्यात शिक्षाविद  दीनानाथ बत्रा, डा. विजयबहादुर सिंह, डा. अमरनाथ (कोलकाता), वीपी पाण्डेय, हर्षदभाई शाह, केसी रेड्डी, जुगुलकिशोर, डा. महेशचंद्र शर्मा, डा. शाहिद अली, राघवेंद्र सिंह, रेक्टर चैतन्य पुरूषोत्तम अग्रवाल सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे। आभार प्रदर्शन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।


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