''...तो ऐसी पत्रकारिता को हिंद महासागर में फेंक दो''

E-mail Print PDF

Urmileshपिछले दिनों दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में ''इंडिया वर्ल्ड फाउंडेशन'' की तरफ से राउंड टेबल डिसकशन का आयोजन किया गया। विषय था- ''मुंबई टेरर अटैक, रोल आफ मीडिया एंड डेमोक्रेसी''।  वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने बहस की शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में मुंबई हमले के मामले में भारतीय मीडिया खासकर टीवी चैनलों की गैर-जिम्मेदारी भरी भूमिका की जमकर लानत-मलानत की और इस माध्यम के दिन-प्रतिदिन विश्वसनीयता खोते जाने के प्रति सभी संवेदनशील मीडियाकर्मियों को आगाह किया। 

मुंबई पर आतंकवादी हमले के कवरेज के दौरान मीडिया के व्यवहार को असंवेदनशील बताते हुए उन्होंने भविष्य में इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील रवैया अपनाने की जरूरत पर बल दिया। उनका कहना था कि इलेक्ट्रानिक मीडिया में इगनोरेंस और एरोगेंस- दोनों ने मिल-जुलकर जड़ जमा लिया है जिसके कारण स्थिति बहुत ज्यादा खतरनाक हो गई है। Panel Discussionउर्मिलेश ने मुख्यमंत्री अच्युतानंद को विलेन के रूप में पेश किए जाने की टीवी चैनलों की हरकत को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अच्युतानंद जैसा व्यक्तित्व, जिसने कई महान लड़ाइयों का नेतृत्व किया, की छोटी-सी गलती के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया ने उन्हें पूरे देश भर में खलनायक बना दिया और उनकी जीवन भर की उपलब्धियों को किनारे रख दिया। इलेक्ट्रानिक मीडिया को नासमझी का नया साम्राज्य बताते हुए उर्मिलेश ने कहा कि जिस तरह नव धनाढ्य लोग पैसों का अनुत्पादक खर्च बेतहाशा करते हैं और व्यापक मनुष्यता बोध के प्रति हेयदृष्ठि  रखते हैं, कुछ वैसा ही हाल इलेक्ट्रानिक मीडिया का है। प्रिवी पर्स, नेशनलाइजेशन, जेपी मूवमेंट, वीपी सिंह जनमोर्चा आदि प्रकरण का उल्लेख करते हुए उर्मिलेश ने मीडिया के लगातार नकारात्मक रवैए को उजागर किया। Kumar Rakesh, Ajay Jha and othersJaishankar, Vinod, Yashwantउर्मिलेश का कहना था कि नेताओं को दिन-रात गाली देने वाली मीडिया को समझ लेना चाहिए कि नेता लोग मीडिया से ज्यादा जवाबदेह हैं। उन्हें हर पांच साल में जनता के सामने जाना होता है, उनके सवालों का जवाब देना होता है, चुनकर आना होता है। लेकिन मीडिया के पास कोई सरोकार नहीं है। किसी के प्रति कोई जवाबदेही नहीं रह गई है। मीडिया ने अपनी भूमिका ऐसी बना ली है जैसे वही सब कुछ हो। उर्मिलेश ने जोर देकर कहा कि मीडिया अब प्रापर्टी डीलरों के चंगुल में आ गया है। इन प्रापर्टी डीलरों के इशारे पर मीडिया को बाजार के हाथों खेलने के लिए खुला छोड़ दिया गया है। अब तो कभी-कभी लगता है कि मीडिया में अब सिर्फ एक ही तरह के लोग भरे पड़े हैं जो सियारों की सी भाषा एक साथ बोलने लगते हैं, बिना सोचे-समझे। उर्मिलेश ने आह्वान किया कि अगर सत्ता की दलाली ही पत्रकारिता हो गई है तो इस पत्रकारिता को हिंद महासागर में फेंक देना चाहिए। कई घंटे तक चली बहस में तथागत सत्पथी (सांसद, प्रधान संपादक- धारित्री, उड़िया दैनिक), अजय झा, जयशंकर गुप्त (अध्यक्ष, प्रेस एसोसिएशन, नई दिल्ली), पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ (महासचिव, प्रेस क्लब आफ इंडिया, नई दिल्ली), रूप शर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, केबल आपरेटर एसोसिएशन एवं सदस्य, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार),  शिवानंद तिवारी (सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता जद-यू), चंद्रराज सिंघवी (वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व संपादक- द डेली, मुंबई), विनोद अग्निहोत्री, सुनील डंग (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इलना एवं सदस्य प्रसार भारती बोर्ड), अनीस दुर्रानी (राष्ट्रीय सचिव, कांग्रेस), देवेंद्र सिंह, संध्या मिश्रा, यशवंत सिंह (संपादक, भड़ास4मीडिया) आदि ने हिस्सा लिया। अजय झा और रूप शर्मा ने अपने धारधार तर्कों के जरिए मीडिया की कई कड़वी हकीकत को सामने रखा और सोचने पर मजबूर किया।  संचालन और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार कुमार राकेश ने किया।


AddThis