अफगानी मीडिया चाहता है भारत जैसी आजादी

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अफगानी पत्रकार चाहते हैं कि भारत में प्रेस को जितनी आजादी है, उतनी ही अफगानिस्तान में भी मिले। उन्होंने यहां प्रेस की आजादी को जानने और समझने का प्रयास किया है और अफगान जाकर इसी तरह की पत्रकारिता करने की कोशिश करेंगे। अफगानी पत्रकारों का 30 सदस्यीय दल इन दिनों भारत में है।

कल यह दल सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत के लिए आया था। इस मौके पर दल ने अजमेर के पत्रकारों से बातचीत की। अफगानिस्तान टाइम्स के पत्रकार अब्दुल सबूर सरीर के मुताबिक अफगान के हालात हिंदुस्तान से काफी मायनों में अलग हैं। इसके चलते मीडिया को हालात के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अफगानी पत्रकारों के मुताबिक जंग के बाद अफगानिस्तान आर्थिक तौर पर काफी कमजोर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से वहां कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। भारत भी काफी मदद कर रहा है। मीडिया इनके सकारात्मक परिणाम को ध्यान में रखकर पत्रकारिता कर रहा है। इसीलिए पुनर्वास, विकास और शिक्षा के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी जगजीत सिंह और देव चक्रवर्ती ने बताया कि पंद्रह दिवसीय इस दौरे में अफगानिस्तान के पत्रकारों को भारतीय पत्रकारिता की जानकारी दी जा रही है। दल में अफगानिस्तान टाइम्स, आउटलुक अफगानिस्तान, समाचार एजेंसी वक्त, टीवी चैनल नूर और रेडियो आजादी आदि से जुड़े अब्दुल सबूर सरीर, काजिम अली गुलजारी, नवेद अहमद अमीरी, साहिला कबीरी, हुमा मरियम, यास्मीन समेत तीस पत्रकार शामिल थे। आगरा और अजमेर की यात्रा के बाद दल जयपुर होते हुए नई दिल्ली लौट गया। नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह की परेड देखने के बाद दल का अफगान लौटने का कार्यक्रम है।

अजमेर से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट


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