''स्ट्रिंगर बनवाने के लिए वसूले दो लाख''

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: सहारा के पूर्व स्ट्रिंगर जरीन सिद्दीकी का आरोप :  टीवी चैनलों में जिलों के लिए स्ट्रिंगर, रिपोर्टर और ब्‍यूरोचीफ बनाने के नाम पर तरह-तरह के खेल होने, पैसा लेने-देने की बात उठती रहती है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है रायपुर से. रायपुर में सहारा न्‍यूज के लिए काम करने वाले जरीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि इंडिया न्‍यूज में उनके एक परिचित को स्ट्रिंगर बनवाने के लिए मुकुंद शाही और फारुख नवाजे ने दो लाख रुपये वसूले और काम भी नहीं कराया. अब पैसा भी वापस नहीं कर रहे हैं.

जरीन सिद्दीकी ने बताया कि वो सन 2008 में  सहारा समय के लिए रायपुर में काम करते थे. इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में होने के चलते तमाम पत्रकारों से परिचय था. इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के लोग खबरों के आदान-प्रदान के चलते एक दूसरे पर विश्‍वास भी करते थे. ऐसे में इंडिया टीवी के लिए काम करने वाले फारुख नवाजे ने मुझसे एक दिन कहा कि इंडिया न्‍यूज में रायपुर ब्‍यूरो खाली है, अगर कोई परिचित हो तो बोलो लगवा दूंगा. इसके लिए दो लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे.

जरीन ने बताया कि मैंने अपने एक परिचित चिंतामणि को यह बात बताई तो वह इसके लिए तैयार हो गया. इसके बाद फारुख के सहयोग से हमलोग इंडिया न्‍यूज के दिल्‍ली ऑफिस में मुकुंद शाही से मिले. बातचीत के बाद उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि वो चिंतामणि को रायपुर का ब्‍यूरो दिलवा देंगे. इंडिया न्‍यूज के ऑफिस के भीतर बात होने पर हमलोगों को भी विश्‍वास हो गया कि काम हो जाएगा.

जरीन ने बताया कि इसके बाद मैंने चिंतामणि से दो लाख रुपये फारुख नवाजे को दिलवा दिया. इसके बाद काफी दिनों तक चिंतामणि का कोई काम नहीं हुआ. बार-बार हमलोगों को टाला जाने लगा. इस दौरान हम कई बार दिल्‍ली आए, उसमें भी काफी पैसा खर्च हो गया. फिर भी चिंतामणि को रायपु ब्‍यूरो की जिम्‍मेदारी नहीं मिल पाई. जिसके बाद चिंतामणि मेरे ऊपर पैसा वापस कराने का दबाव बनाने लगा. मैं दोनों तरफ से चक्‍कर में फंस गया.

जरीन ने बताया कि किसी तरह यहां वहां से कर्ज लेकर मैंने चिंतामणि के पैसे वापस किए. पर बीच में पड़ने के चलते मेरा पैसा फंस गया. इसमें मेरा कोई फायदा नहीं था परन्‍तु पैसा दिलाने के लिए बीच में पड़कर मैंने बड़ा गुनाह कर दिया. बैठे-बैठाए लाखों का चपत लग गया. अब मैं मुकुंद शाही और फारुख नवाजे से पैसा वापस पाने के लिए चक्‍कर लगाने लगा. इस बीच मेरे ऊपर ही पैसे लेने का आरोप लगाकर इसकी शिकायत सहारा प्रबंधन से कर दी गई.‍‍ जिसके बाद चैनल ने मुझे निकाल दिया. मेरे सामने पैसों की दिक्‍कत हो गई. बार बार मैं पैसे वापस करने के लिए गिड़गिड़ाता लेकिन दोनों कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देते.

जरीन ने बताया कि लगातार दबाव बनाने के बाद फारुख नवाजे ने मुझे 44 हजार रुपये वापस कर दिए. इसके बाद बोल दिया कि बाकी पैसा मुकुंद शाही के पास है. मैं मुकुंद शाही के पास पैसे के लिए दौड़ने लगा. इस बीच मुकुंद शाही ने मुझे बीस हजार रुपये वापस किया. फोन पर जब भी बात करता तो फोन नहीं उठाते या मीटिंग का बहाना कर देते थे. एक बार मैं अपने बीबी बच्‍चों के साथ दिल्‍ली गया. मेरे पास पैसे नहीं थे. मैं जब रोया-गिड़गिड़ाया तो मुझे चार हजार रुपए दिए.

जरीन ने बताया कि चार हजार देने के बाद मुकुंद ने मुझे तमाम तरह से हड़काया और कहा कि मैं क्राइम रिपोर्टर हूं अगर आगे से परेशान किया तो एक बार में बोरिया-बिस्‍तर बंधवा दूंगा. आगे से कभी आना होगा तो बता के आना नहीं तो ठीक नहीं होगा. मैं पारिवारिक दिक्‍कतों के चलते पहले ही परेशान हूं तुम और परेशान कर रहे हो. इस बीच उन्‍होंने अपना संस्‍थान बदलकर पी7 में चले गए. अब मेरी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. परेशान होकर मैंने मुख्‍यमंत्री को भी पत्र लिखा था.

इस संदर्भ में जब इंडिया टीवी के फारुख नवाजे से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि इस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है. इसमें सारी गड़बड़ी जरीन की ही है. ना तो मैंने किसी को पैसा दिलवाया है और ना ही इसमें मेरा कोई रोल है. किसी के कह देने से मैं दोषी थोड़ी ही हो जाऊंगा. आरोप तो कोई किसी पर लगा सकता है, मैं आप पर भी आरोप लगा सकता हूं. जरीन सरासर झूठ बोल रहा है. पैसे का गोलमाल खुद उसने ही किया है.

जब इस संदर्भ में मुकुंद शाही का पक्ष जानने के लिए बात की गई तो उन्‍होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं है. अगर कोई मुझे पैसा दिया है तो उसके पास प्रूफ तो होना चाहिए ना. कोई साबित करके देखे. कह देने से थोड़े ही मैंने किसी का पैसा ले लिया है. कोई ऐसे पैसा नहीं देता है, अगर वो प्रूफ लाकर दे दे तो मैं मानने के लिए तैयार हूं. आरोप तो कोई किसी पर लगा सकता है, लेकिन सच्‍चाई के लिए सबूत की आवश्‍यकता होती है.


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