आलोक तोमर के बारे में राजेंद्र माथुर ने ये कहा था....

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''आलोक तोमर की रिपोर्टों को पढ़कर एक तो सुख यही होता है कि जो काम कभी-कभी बर्नियर या टेवर्नियर या ऐसे ही नामवाले लोग करते थे, वह अब परिचित नाम और चेहरों वाले लोग भी करने लगे हैं. लेकिन इतना बड़ा कैनवास सामने रखकर मैं आलोक तोमर के बारे में कुछ कहने से बच रहा हूँ, ऐसा कतई न समझा जाए. मेरी राय में हिंदी के गिने-चुने रिपोर्टरों में उनकी गिनती है, और क्योंकि यह काम हिंदी में कम हुआ है, इसलिए वे उन मल्लाहों की तरह हैं जो नए-नए महाद्वीपों की खोज में चार-पांच सौ साल पहले निकल जाया करते थे.''

(आलोक तोमर की पुस्तक 'प्रति समाचार' के पाथेय से)

इसे भड़ास4मीडिया तक पहुंचाया है वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार जी ने. प्रदीप जी को थैंक्यू. आलोक तोमर के बारे में ज्यादा जानने के लिए और उनके लिखे को पढ़ने के लिए नीचे कमेंट बाक्स के ठीक बाद आ रहे शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक करते जाएं.


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